धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में प्राचीन धरोहरों को संवारने की दिशा में नगर निगम ने एक और बड़ा कदम उठाया है। शहर की पहचान रहे पौराणिक जलस्रोतों, तालाबों और कुंडों को उनके पुराने वैभव और भव्य स्वरूप में वापस लाने के लिए अब जमीनी स्तर पर काम तेज हो गया है। इसी कड़ी में प्रशासन ने शहर के तीन प्रमुख और ऐतिहासिक जलस्रोतों का औचक निरीक्षण कर विकास कार्यों को गति देने के निर्देश दिए हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है।
निरीक्षण से कसी गई कार्ययोजना की नकेल
रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शहर के महत्वपूर्ण जलस्रोतों—पिशाचमोचन कुंड, पितरकुंडा तालाब और राम कुंड तालाब का स्थलीय दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चल रहे निर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों की गहन समीक्षा की। अधिकारियों के साथ हर एक बिंदु पर चर्चा करते हुए उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी अधूरे कार्यों को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
पिशाचमोचन कुंड परिसर में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पिशाचमोचन कुंड के विकास को लेकर प्रशासन ने विशेष योजना तैयार की है। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के कड़े निर्देश दिए।
- बेहतर लाइटिंग: कुंड परिसर में शाम ढलते ही अंधेरा न रहे, इसके लिए आधुनिक और उच्च क्षमता वाली प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) करने के निर्देश दिए गए हैं।
- सीसीटीवी सर्विलांस: परिसर की सुरक्षा और असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए पूरे क्षेत्र को सीसीटीवी कैमरों की जद में लाया जाएगा।
- ओपन जिम की सौगात: स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे युवाओं और स्थानीय नागरिकों के लिए पिशाचमोचन कुंड परिसर में एक नया 'ओपन जिम' स्थापित किया जाएगा। इससे यहां आने वाले लोगों को फिटनेस की भी सुविधा मिलेगी।
राम कुंड और पितरकुंडा तालाब का भी होगा सौंदरीकरण
केवल पिशाचमोचन ही नहीं, बल्कि राम कुंड और पितरकुंडा तालाब के दिन भी जल्द बदलने वाले हैं। निरीक्षण के दौरान राम कुंड तालाब पर पूर्व में क्षतिग्रस्त हुई पुरानी दीवार को हटाकर एक मजबूत आरसीसी (RCC) दीवार का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा परिसर की सुंदरता बढ़ाने के लिए वहां लगी रेलिंग की मरम्मत और आकर्षक पेंटिंग का कार्य भी जल्द पूरा किया जाएगा।
दूसरी ओर, पितरकुंडा तालाब के कायाकल्प के लिए एक भव्य प्रवेश द्वार (गेट) के निर्माण को मंजूरी दी गई है। तालाब के चारों ओर सुरक्षा और सुंदरता के लिए रेलिंग लगाने और रंग-रोगन करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम का साफ कहना है कि इन सभी स्थानों पर नियमित साफ-सफाई की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए ताकि जलस्रोतों का मौलिक स्वरूप भी बचा रहे और गंदगी का नामोनिशान न रहे।
ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने की पहल
बढ़ते शहरीकरण के बीच वाराणसी के ये पौराणिक कुंड और तालाब लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हो रहे थे। कई जगहों पर अतिक्रमण और गंदगी के कारण इनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया था। नगर निगम के इस नए अभियान से उम्मीद जगी है कि शहर के ये ऐतिहासिक धरोहर न केवल सुरक्षित बचेंगे, बल्कि पर्यटन के नए केंद्रों के रूप में भी उभरेंगे।
इस पूरी निरीक्षण प्रक्रिया के दौरान क्षेत्रीय पार्षद सिंधु सोनकर सहित नगर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने स्थानीय जनता की समस्याओं और सुझावों से अधिकारियों को अवगत कराया। प्रशासन के इस त्वरित और गंभीर रुख से यह तय माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में वाराणसी के इन पौराणिक स्थलों की तस्वीर पूरी तरह से बदली हुई नजर आएगी।