बिहार की सियासत एक बार फिर से गर्मा गई है। इस बार राजनीतिक सरगर्मी की बड़ी वजह बने हैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले प्रतिष्ठित BRICS सम्मेलन और उसमें बिहार के नेतृत्व को लेकर उठा सवाल। राज्य के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने मौजूदा एनडीए (NDA) सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने न सिर्फ BRICS सम्मेलन के बहाने तंज कसा, बल्कि बाढ़ की तबाही, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे तमाम गंभीर मुद्दों पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उनके इस तीखे अंदाज ने राज्य की राजनीतिक फिजा में हलचल बढ़ा दी है.
BRICS सम्मेलन और 'व्याकुल मत हो' वाला तंज
रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने व्यंग्य करते हुए कहा कि ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में बिहार के नेतृत्व को निमंत्रण न मिलना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि शायद मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री को इस वजह से आमंत्रित नहीं किया गया कि कहीं वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने भी वैसी ही टिप्पणी न कर बैठें, जैसी उन्होंने हाल ही में राज्य विधानसभा के भीतर अध्यक्ष के संदर्भ में की थी।
तेजस्वी ने हंसते हुए और बेहद कटाक्ष भरे लहजे में कहा, "यदि सम्राट चौधरी मंत्री रहते हुए विधानसभा के भीतर इस तरह की भाषा बोल सकते हैं, तो सोचिए कि अगर वे रूस पहुंच जाते और पुतिन से मुखातिब होते, तो वहां क्या कहते? शायद यही कि 'व्याकुल मत हो'। यही कारण रहा होगा कि उन्हें इस अंतरराष्ट्रीय मंच से दूर रखा गया।" राजनीतिक गलियारों में तेजस्वी का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, ब्रिक्स सम्मेलनों के प्रोटोकॉल और आमंत्रित सदस्यों की सूची पूरी तरह से कूटनीतिक और राष्ट्रीय स्तर पर तय होती है, लेकिन विपक्षी दल इसे एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहे हैं।
'डबल इंजन के दोनों इंजनों में लग चुकी है आग'
बिहार में चल रही बाढ़ की गंभीर स्थिति का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने सरकार के प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस वक्त 'डबल इंजन' की सरकार होने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन दोनों इंजनों में ही भयानक आग लग चुकी है और जनता त्राहिमाम कर रही है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि बिहार के करीब 45 लाख से अधिक लोग इस समय बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। उनके घर डूब चुके हैं, मवेशी संकट में हैं और खाने-पीने के लाले पड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आपदा के समय सरकार पूरी तरह से नदारद है। तेजस्वी ने कहा, "मैंने खुद बाढ़ के हालात को लेकर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को कई पत्र लिखे, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब तक आना मुनासिब नहीं समझा गया। सरकार जवाब दे या न दे, लेकिन जनता ने उन्हें सेवा करने का जो अधिकार दिया है, कम से कम उसके प्रति तो ईमानदारी बरतनी चाहिए थी।"
आकस्मिक निधि के पैसों पर उठाए सवाल
बाढ़ पीड़ितों की सुधि न लिए जाने को लेकर सरकार को घेरते हुए तेजस्वी यादव ने वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बीते जून महीने में राज्य सरकार ने आकस्मिक निधि (Contingency Fund) से करीब तीन से चार हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निकाली थी। यह पैसा आखिर कहां गया?
तेजस्वी ने सरकार से तीखा सवाल किया कि यदि इस फंड का इस्तेमाल आपदा प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री बांटने, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनके पुनर्वास के लिए नहीं किया गया, तो फिर इस पैसे का इस्तेमाल कहां हुआ? उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत प्रभाव से आपदा पीड़ितों के खातों में सहायता राशि भेजे और जमीनी स्तर पर राहत शिविरों की व्यवस्था दुरुस्त करे।
सीतामढ़ी हत्याकांड: कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
केवल प्राकृतिक आपदा ही नहीं, बल्कि राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरे में लिया। उन्होंने हाल ही में सीतामढ़ी जिले में हुई आरजेडी (RJD) के जिला उपाध्यक्ष की सनसनीखेज हत्या का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया।
घटना की पृष्ठभूमि साझा करते हुए उन्होंने बताया कि मृतक नेता ने अपनी जान को खतरा बताते हुए घटना से कुछ दिन पहले ही स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया था। आरोप है कि पुलिस ने उनकी फरियाद सुनने तक की जहमत नहीं उठाई और मामले को टाल दिया। नतीजतन, कुछ ही दिनों बाद उन्हें सरेआम नौ गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया गया।
इस वीभत्स घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए तेजस्वी ने कहा, "जब राज्य में एक जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दल के पदाधिकारी की शिकायत को पुलिस गंभीरता से नहीं लेती और थाने में उसकी सुनवाई नहीं होती, तो आम और गरीब इंसान की क्या बिसात होगी? बिहार में अपराधियों के हौसले पूरी तरह बुलंद हैं और पुलिस प्रशासन केवल मूकदर्शक बना हुआ है।"
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी साधा निशाना
राज्य के साथ-साथ केंद्र सरकार पर भी हमला बोलते हुए तेजस्वी यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से बिहार की बाढ़ और अन्य समस्याओं को लेकर बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जानने के लिए आज तक गृह मंत्री बिहार के दौरे पर नहीं आए।
उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर काम करना चाहिए, लेकिन यहां केवल राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। जनता के दुखों से किसी को कोई सरोकार नहीं बचा है।
निष्कर्ष
तेजस्वी यादव द्वारा उठाए गए इन तमाम मुद्दों ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में तापमान और अधिक बढ़ने वाला है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों के दावे कर रहा है, वहीं विपक्ष बाढ़, अपराध और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राज्य की साख जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि इन तीखे हमलों और आरोपों पर सरकार की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।