बिहार की न्यायिक व्यवस्था में आज एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। राजधानी पटना के लोक भवन में आयोजित एक गरिमामयी शपथ ग्रहण समारोह के दौरान, जस्टिस वी. कामेश्वर राव ने पटना हाईकोर्ट के 49वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के रूप में आधिकारिक तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ ली। बिहार के राज्यपाल ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर राज्य की न्यायपालिका और प्रशासन से जुड़ी कई दिग्गज हस्तियां मौजूद रहीं।
भव्य समारोह में दिग्गजों की रही मौजूदगी
शपथ ग्रहण समारोह को काफी अहम माना जा रहा है। इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद जस्टिस वी. कामेश्वर राव से मुलाकात की और उन्हें इस नए और सर्वोच्च दायित्व को संभालने के लिए अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस दौरान बिहार सरकार के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीश और राज्य के कई गणमान्य लोग भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
गौरतलब है कि पटना हाईकोर्ट के पिछले चीफ जस्टिस मीनाक्षी मदन राय के 11 जुलाई, 2026 को सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद खाली था। उनकी सेवानिवृत्ति के पश्चात अदालत के वरिष्ठ जज जस्टिस सुधीर सिंह कार्यवाहक (Acting) चीफ जस्टिस के रूप में न्यायिक कामकाज संभाल रहे थे। अब जस्टिस वी. कामेश्वर राव के कार्यभार संभालने से न्यायिक कार्यों में और अधिक तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर हुई नियुक्ति
इस महत्वपूर्ण नियुक्ति की प्रक्रिया कुछ महीने पहले शुरू हुई थी। देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने बीते 6 अगस्त, 2026 को हुई एक अहम बैठक में दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन जज वी. कामेश्वर राव के नाम की अनुशंसा पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में की थी। कॉलेजियम के इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद अब उन्होंने विधिवत रूप से अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है।
शिक्षा और शुरुआती करियर का सफर
जस्टिस वी. कामेश्वर राव का शैक्षणिक और वकालत का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उनका जन्म 7 अगस्त, 1965 को हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की। वर्ष 1987 में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से भूगोल (Geography) विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कानून के क्षेत्र में कदम रखा और साल 1990 में इसी विश्वविद्यालय से एलएलबी (LLB) की डिग्री हासिल की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मार्च 1991 में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में बतौर वकील खुद को रजिस्टर्ड कराया और अदालती दुनिया में उतर पड़े।
वकालत के लंबे अनुभव और महारਤ
बेंच तक पहुँचने से पहले जस्टिस राव ने वकालत के पेशे में लंबा और कड़ा संघर्ष किया है। उन्होंने लगभग 20 वर्षों तक देश की विभिन्न अदालतों में वकालत की प्रैक्टिस की। इस दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट और कैट (CAT) सहित कई अन्य प्रमुख न्यायिक मंचों पर अपनी मजबूत पैरवी का लोहा मनवाया।
उनकी कानूनी विशेषज्ञता को देखते हुए साल 2010 में उन्हें 'सीनियर एडवोकेट' (Senior Advocate) के रूप में नामित किया गया। वकालत के अपने लंबे करियर के दौरान उन्हें मुख्य रूप से:
- सेवा मामलों (Service Matters)
- श्रम कानून (Labour Law)
- संवैधानिक मामले (Constitutional Matters)
- प्रशासनिक और मध्यस्थता (Administrative & Arbitration) मामले
इन तमाम कानूनी शाखाओं में गहरी विशेषज्ञता हासिल थी। यही वजह है कि कानूनी गलियारों में उनकी पकड़ को हमेशा से बहुत मजबूत माना जाता रहा है।
न्यायिक सेवा का सफर और विभिन्न अदालतें
वकालत के लंबे और सफल सफर के बाद उनके प्रशासनिक और न्यायिक अनुभव को देखते हुए 17 अप्रैल, 2013 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज (Additional Judge) नियुक्त किया गया। इसके ठीक दो साल बाद, 18 मार्च, 2015 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में स्थायी न्यायाधीश के तौर पर प्रमोट कर दिया गया।
समय के साथ उनके कार्यक्षेत्र में विस्तार हुआ। साल 2024 में उनका स्थानांतरण कर्नाटक हाईकोर्ट में कर दिया गया। इसके बाद मई 2025 के दौरान उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट में एक्टिंग चीफ जस्टिस के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। कुछ समय वहां अपनी सेवाएं देने के बाद, जुलाई 2025 में वे वापस दिल्ली हाईकोर्ट लौट आए और बतौर जज अपनी सेवाएं देते रहे। अब उन्हें देश के एक महत्वपूर्ण राज्य बिहार के पटना हाईकोर्ट की कमान सौंपी गई है, जहां वे बतौर चीफ जस्टिस न्याय प्रणाली का नेतृत्व करेंगे।
बिहार की न्याय व्यवस्था के लिए क्या हैं उम्मीदें?
कानूनी जानकारों का मानना है कि जस्टिस वी. कामेश्वर राव के पास अदालतों के संचालन और प्रशासनिक मामलों का लंबा अनुभव है। ऐसे में उनके नेतृत्व में पटना हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आ सकती है। साथ ही, आम जनता को समय पर न्याय मिलने की उम्मीदों को भी बल मिला है। शपथ ग्रहण के बाद से ही बिहार के कानूनी हलकों में उनके इस कार्यकाल को लेकर काफी सकारात्मक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।