बिहार के भागलपुर जिले से इस वक्त एक बड़ी और सख्त प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। प्राकृतिक आपदा और बाढ़ की विभीषिका झेल रहे पीड़ितों तक सरकारी मदद पहुंचाने में कथित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर प्रशासन का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने राहत कार्यों में सुस्ती दिखाने वाले छह अंचलाधिकारियों (सीओ) से स्पष्टीकरण तलब किया है। इस कार्रवाई के बाद से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
समीक्षा बैठक में खुली पोल, शून्य पाई गई प्रगति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय में आपदा प्रबंधन को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा बाढ़ पीड़ितों के बीच अनुग्रह अनुदान (जीआर राशि) के वितरण की प्रगति की समीक्षा करना था। जब संपूर्ति पोर्टल पर अंचलवार आंकड़ों की जांच की गई, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कुछ अंचलों में जीआर राशि की अनुशंसा की प्रगति पूरी तरह से शून्य (0) है। आपदा के इस दौर में जहां युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाने की आवश्यकता होती है, वहां इस तरह की उदासीनता को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी ने इसे सीधे तौर पर प्रशासनिक कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और आदेशों की अवहेलना माना है।
किन-किन अंचलों के अधिकारियों पर गिरी गाज?
लापरवाही के इस मामले में भागलपुर जिले के कुल छह महत्वपूर्ण अंचलों के सीओ को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है। जिन अधिकारियों से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- गोपालपुर के अंचलाधिकारी
- इस्माइलपुर के अंचलाधिकारी
- नारायणपुर के अंचलाधिकारी
- रंगरा चौक के अंचलाधिकारी
- सबौर के अंचलाधिकारी
- शाहकुंड के अंचलाधिकारी
इन सभी छह अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित समयावधि के भीतर अपना पक्ष रखें कि आखिर पोर्टल पर प्रविष्टि और राहत राशि के वितरण में इतनी देरी क्यों हुई।
24 घंटे के भीतर देना होगा संतोषजनक जवाब
जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक समय पर सहायता पहुंचाना सरकार और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस कार्य में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली या सुस्ती को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संबंधित अधिकारियों को नोटिस मिलने के बाद से 24 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण समर्पित करना होगा। यदि इस समयावधि में उनका जवाब नहीं मिलता है या उनका स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया जाता है, तो प्रशासन की ओर से आगे की कड़ी विभागीय कार्रवाई के लिए उच्च स्तर पर अनुशंसा भेज दी जाएगी। इस सख्त रुख से साफ है कि इस बार प्रशासनिक स्तर पर किसी को भी बचाने की कोशिश नहीं की जाएगी।
आपदा पीड़ितों के दर्द पर मरहम लगाने की कोशिश
गंगा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण भागलपुर के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। घर-बार छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेने वाले लोगों के लिए सरकारी आर्थिक सहायता यानी जीआर राशि किसी बड़े सहारे से कम नहीं होती। ऐसे समय में यदि जरूरतमंदों के खाते में समय पर पैसे नहीं पहुंचे, तो उनकी परेशानियां कई गुना बढ़ जाती हैं।
आम जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से भी लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि राहत सामग्री और राशि के वितरण में अस्तर पर देरी हो रही है। इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर जिलाधिकारी ने खुद कमान संभालते हुए यह कड़ा कदम उठाया है।
प्रशासनिक गलियारों में मचा हड़कंप
डीएम के इस कड़े तेवर के बाद से जिले के अन्य अंचलों के अधिकारियों में भी डर का माहौल है। जिन अंचलों में सुस्ती बरती जा रही थी, वहां अब युद्ध स्तर पर कागजी कार्रवाई पूरी करने की कोशिश की जा रही है। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयों से मैदानी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों में जवाबदेही तय होती है।
बहरहाल, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन छह अंचलाधिकारियों की ओर से क्या जवाब दिया जाता है और जिला प्रशासन उनके स्पष्टीकरण पर क्या अंतिम निर्णय लेता है। क्या यह सिर्फ एक चेतावनी बनकर रह जाएगा या वाकई कुछ बड़े अधिकारियों पर गाज गिरेगी, यह आने वाले कुछ ही घंटों में साफ हो जाएगा।