Breaking
► वाराणसी में अक्टूबर का मुफ्त राशन वितरण 30 अक्टूबर तक बढ़ा ► उत्तराखंड: सीएम धामी ने 728 करोड़ की विकास योजनाओं को दी मंजूरी ► आगरा में ड्यूटी जा रहे होमगार्ड और बेटे पर फावड़े से हमला, वीडियो वायरल ► गुमला में हाथियों को भगाने के दौरान ग्रामीण की मौत, सूंड़ में लपेटकर दूर ले गया हाथी ► भागलपुर में चार सड़क परियोजनाओं के आड़े आई वनभूमि, 19.94 हेक्टेयर वैकल्पिक जमीन की तलाश तेज ► निदेशक नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायणम्' के नए गाने 'मंगल रंग' पर भड़के सोशल मीडिया यूजर्स ► दिल्ली के हर्ष विहार में इमारत की स्लैब गिरने से दो की मौत, निर्माण कार्य जारी था ► नागपुर में 1.54 करोड़ रुपये की एमडी ड्रग्स जब्त, कुख्यात फल्ली गुप्ता और 5 गुर्गे गिरफ्तार ► बिहार में 86 प्रकार के कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन ► उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनावी रणनीति, पूर्वांचल साधने के लिए उतरे अमित शाह और नितिन नवीन ► वाराणसी में अक्टूबर का मुफ्त राशन वितरण 30 अक्टूबर तक बढ़ा ► उत्तराखंड: सीएम धामी ने 728 करोड़ की विकास योजनाओं को दी मंजूरी ► आगरा में ड्यूटी जा रहे होमगार्ड और बेटे पर फावड़े से हमला, वीडियो वायरल ► गुमला में हाथियों को भगाने के दौरान ग्रामीण की मौत, सूंड़ में लपेटकर दूर ले गया हाथी ► भागलपुर में चार सड़क परियोजनाओं के आड़े आई वनभूमि, 19.94 हेक्टेयर वैकल्पिक जमीन की तलाश तेज ► निदेशक नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायणम्' के नए गाने 'मंगल रंग' पर भड़के सोशल मीडिया यूजर्स ► दिल्ली के हर्ष विहार में इमारत की स्लैब गिरने से दो की मौत, निर्माण कार्य जारी था ► नागपुर में 1.54 करोड़ रुपये की एमडी ड्रग्स जब्त, कुख्यात फल्ली गुप्ता और 5 गुर्गे गिरफ्तार ► बिहार में 86 प्रकार के कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन ► उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनावी रणनीति, पूर्वांचल साधने के लिए उतरे अमित शाह और नितिन नवीन

भागलपुर में चार सड़क परियोजनाओं के आड़े आई वनभूमि, 19.94 हेक्टेयर वैकल्पिक जमीन की तलाश तेज

भागलपुर में चार सड़क परियोजनाओं के आड़े आई वनभूमि, 19.94 हेक्टेयर वैकल्पिक जमीन की तलाश तेज

भागलपुर जिले में यातायात को सुगम बनाने और सड़क संपर्क को बेहतर करने के लिए शुरू की गई चार महत्वपूर्ण सड़क निर्माण व चौड़ीकरण परियोजनाओं के सामने वनभूमि की बड़ी अड़चन आ गई है। संरेखण यानी अलाइनमेंट में वन क्षेत्र की भूमि आने के कारण सड़क निर्माण विभाग ने नियमानुसार समान क्षेत्रफल की वैकल्पिक गैर-वनभूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

सड़क निर्माण विभाग ने भागलपुर जिला प्रशासन को आधिकारिक पत्र भेजकर कुल 19.945 हेक्टेयर गैर-वनभूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। पर्यावरण नियमों के मुताबिक, यदि किसी विकास परियोजना में वन विभाग की भूमि का उपयोग किया जाता है, तो निर्माण एजेंसी को पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए उतनी ही समतुल्य गैर-वनभूमि वन विभाग को हस्तांतरित करनी होती है, ताकि भविष्य में वहां वनीकरण किया जा सके।

कजरैली-अमरपुर और सुल्तानगंज-तारापुर पथ में सबसे बड़ी मांग

जिला प्रशासन को भेजे गए विस्तृत प्रस्ताव के अनुसार, चार प्रमुख पथों के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण के कार्य में वनभूमि का पेच फंसा है। इनमें सबसे बड़ी आवश्यकता भागलपुर-अमरपुर वाया कजरैली पथ (एसएच-25) के लिए है। इस सड़क के 0 से 16 किलोमीटर खंड के चौड़ीकरण हेतु सबसे अधिक 9.60 हेक्टेयर गैर-वनभूमि की जरूरत है।

इसके अतिरिक्त, मुंगेर पथ प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सुल्तानगंज-तारापुर-संग्रामपुर-बेलहर-कटोरिया-चांदन-दर्दमारा (बिहार सीमा) पथ यानी एसएच-22 के 0 से 40 किलोमीटर खंड के लिए 5.590 हेक्टेयर वैकल्पिक जमीन मांगी गई है। यह सड़क बांका और मुंगेर जिलों को आपस में जोड़ती है, जिससे इसका तकनीकी और सामरिक महत्व काफी अधिक है।

अन्य प्रभावित परियोजनाएं और कुल आवश्यकता

इन दोनों प्रमुख स्टेट हाईवे के अलावा एशियाई विकास बैंक (ADB) की सहायता से प्रस्तावित धोरैया-इंग्लिशिया मोड़-असरगंज पथ के उन्नयन और चौड़ीकरण के लिए 3.321 हेक्टेयर गैर-वनभूमि की मांग की गई है। वहीं, भागलपुर-अगरपुर-कोतवाली पथ के 0 से 17.750 किलोमीटर खंड के लिए 1.434 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है। इन चारों परियोजनाओं को मिलाकर कुल 19.945 हेक्टेयर गैर-वनभूमि की दरकार है।

जिला प्रशासन के निर्देश और आगे की चुनौतियां

सड़क निर्माण विभाग से पत्र मिलने के बाद जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर समाहर्ता (एडीएम) को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग को इन प्रस्तावित सड़कों के संरेखण में आने वाली वनभूमि के बदले समतुल्य सरकारी या अधिग्रहित की जाने वाली गैर-वनभूमि को चिन्हित कर जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती समतुल्य भूमि का भौतिक रूप से चयन करना और उस पर वन विभाग एवं पर्यावरण मंत्रालय से समय पर आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करना है। विभाग ने भूमि की मांग तो रख दी है, लेकिन जमीन का अंतिम रूप से चयन और परियोजनाओं को गति देने के लिए पर्यावरणीय स्वीकृतियों की कागजी प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है।

About the Author

नसीम अहमद

नसीम अहमद

Writer

नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

Read More

ज़रूर पढ़ें (You May Also Like)

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →