उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने शीर्ष नेतृत्व को मैदान में उतार दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरों के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्य के विभिन्न हिस्सों में चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहनाने में जुट गए हैं। पार्टी का यह संगठनात्मक अभियान केवल सामान्य दौरे नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने का एक बड़ा प्रयोग माना जा रहा है।
लखनऊ से संवाददाता संतोष शुक्ल की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन जैसे शीर्ष चेहरों के एक सप्ताह के भीतर प्रदेश में लगातार कार्यक्रम और प्रभारी विनोद तावड़े के ताबड़तोड़ दौरे इस बात का संकेत हैं कि भाजपा ने जमीनी स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। वाराणसी और आजमगढ़ के बहाने पूर्वांचल में पार्टी की स्थिति को मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है, वहीं राजधानी लखनऊ में होने वाली बैठकों के जरिए चुनावी मुद्दों और एजेंडों को नए सिरे से आकार दिया जा रहा है। आने वाले नवंबर महीने में भाजपा अपने पूरे संगठन को मैदानी स्तर पर उतारने की तैयारी में है।
वाराणसी और आजमगढ़ पर विशेष फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का दौरा कर एक कपड़ा मिल की आधारशिला रखी और गंगा किनारे आयोजित एयर शो में हिस्सा लिया। हालांकि इस दौरान उन्होंने कोई बड़ी जनसभा नहीं की, लेकिन स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर चुनावी माहौल का जायजा जरूर लिया। दूसरी ओर, 27 अक्टूबर को आजमगढ़ में एनडीए के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के मंच पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहुंचने का कार्यक्रम है। इस आयोजन के जरिए पार्टी समाजवादी पार्टी के गढ़ में मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश करेगी।
राजनीतिक रूप से आजमगढ़ को सपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्ष 2017 की प्रचंड मोदी लहर में भी जिले की 10 विधानसभा सीटों में से भाजपा केवल एक सीट ही जीत पाई थी, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का खाता तक नहीं खुला था। ऐसे में नितिन नवीन का यह दौरा और सहयोगी दलों के साथ मंच साझा करना पूर्वांचल में एनडीए की एकजुटता का संदेश देने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस कदम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हाल ही में एनडीए के एक अन्य घटक दल निषाद पार्टी ने तीखे तेवर दिखाते हुए गठबंधन से अलग होने तक के संकेत दिए थे।
अमित शाह का लखनऊ दौरा और माइक्रो मैनेजमेंट
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे प्रदेश और राष्ट्रीय पदाधिकारियों, केंद्र तथा राज्य सरकार के मंत्रियों, क्षेत्रीय व जिला इकाइयों के साथ-साथ पार्टी के सभी छह मोर्चों के साथ मैराथन बैठकें करेंगे। इस विस्तृत मंथन के जरिए शाह वर्ष 2014 और 2017 की तर्ज पर सूक्ष्म प्रबंधन (माइक्रो मैनेजमेंट) की पटकथा तैयार करेंगे।
इस उच्च स्तरीय संवाद का एक मुख्य उद्देश्य सुभासपा, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), अपना दल (एस) और निषाद पार्टी जैसे सभी प्रमुख सहयोगियों के साथ चुनावी तालमेल को सहज बनाना भी है। पार्टी के भीतर संगठन, सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच आपसी अंतर्विरोधों के साथ-साथ मौजूदा जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जनता में बढ़ रही नाराजगी ने भाजपा के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है।
चुनावी चुनौतियां और राजनीतिक समीकरण
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय कई पेचीदा मुद्दे उभरकर सामने आए हैं। यूजीसी आरक्षण और नीट परीक्षा के पेपर लीक जैसे विषयों को लेकर युवाओं में सरकार के खिलाफ आक्रोश देखा गया है। इसके अलावा, लोकसभा चुनाव 2024 में सपा के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के सफल होने के बाद से भाजपा पर अपने पारंपरिक ओबीसी वोटों को सुरक्षित रखने का अतिरिक्त दबाव आ गया है। पार्टी के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और कई विधायकों के बागी तेवर भी चिंता का विषय बने हुए हैं। इन तमाम अंदरूनी चुनौतियों से निपटने और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए शीर्ष नेतृत्व का यह सक्रिय हस्तक्षेप बेहद अहम माना जा रहा है।