खेती को आधुनिक बनाने और उत्पादन लागत को कम करने की दिशा में बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में किसानों को 86 प्रकार के कृषि यंत्रों की खरीद पर 40 से 80 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती की लागत को घटाना और खेतों में पराली जलाने की समस्या पर पूरी तरह रोक लगाना है।
बांका सहित पूरे राज्य में कृषि विभाग द्वारा सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत किसानों को केवल 20 से 60 प्रतिशत तक की राशि अपनी जेब से खर्च करनी होगी, बाकी की राशि सरकार सब्सिडी के रूप में देगी। इस योजना से छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक कृषि उपकरण बेहद कम खर्च पर मिल सकेंगे।
किन यंत्रों पर मिलेगी सब्सिडी और क्या हैं केंद्र
योजना के तहत खेत की जुताई, बुआई, निकाई-गुड़ाई, सिंचाई, कटाई, फसल ढुलाई और उद्यान से जुड़े कुल 86 प्रकार के आधुनिक कृषि उपकरणों को शामिल किया गया है। इसमें पराली प्रबंधन से जुड़े यंत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि फसल अवशेष जलाने की कुप्रथा को रोका जा सके। इसके अलावा गांवों में कृषि यंत्र बैंक, कस्टम हायरिंग सेंटर, स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर, फार्म मशीनरी बैंक और आधुनिक किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर भी स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे किराए पर भी मशीनें आसानी से मिल सकें।
अनुदान पाने की 6 चरणों की पूरी प्रक्रिया
- डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण: योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों का कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- आधार आधारित सत्यापन: पोर्टल पर पंजीकरण के बाद आधार कार्ड के माध्यम से पहचान का सत्यापन किया जाएगा।
- कृषि यंत्रिकीकरण योजना पोर्टल पर आवेदन: आधार सत्यापित होने के बाद किसान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी जरूरत के यंत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
- आवेदन की जांच: पोर्टल पर जमा किए गए सभी ऑनलाइन आवेदनों की संबंधित अधिकारियों द्वारा विभागीय स्तर पर जांच की जाती है।
- लॉटरी से चयन: जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद पारदर्शी तरीके से लॉटरी प्रणाली के जरिए लाभार्थियों का चयन किया जाता है।
- स्वीकृति पत्र जारी: निर्धारित तिथि पर चयनित किसानों के नाम से विभाग द्वारा स्वीकृति पत्र जारी किया जाता है।
इन महत्वपूर्ण नियमों का रखना होगा ध्यान
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि अभियंत्रण) रजनीश रंजन ने बताया कि योजना के तहत जारी किए जाने वाले स्वीकृति पत्र की वैधता केवल 15 दिनों की होती है। किसानों को इन 15 दिनों के भीतर केवल विभाग द्वारा अधिकृत विक्रेताओं से ही कृषि यंत्र खरीदना अनिवार्य है। यदि निर्धारित अवधि में खरीद नहीं की जाती है, तो स्वीकृति पत्र स्वतः रद्द हो जाएगा।
यंत्र खरीदने के बाद विभाग द्वारा उसका भौतिक सत्यापन किया जाता है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होते ही स्वीकृत अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी किसान के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेज दी जाती है। इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल पर जाकर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं और ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।