चंद्रपुर में किन्नर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला मुख्यालय के नियोजन भवन में सामाजिक न्याय विभाग, चंद्रपुर और नांदेड की सप्तरंगी सेवाभावी संस्था के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यशाला के दौरान समुदाय के सदस्यों को शिक्षा, रोजगार, कौशल प्रशिक्षण और विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपर जिलाधिकारी डॉ. नितीन व्यवहारे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किन्नर समुदाय समाज का एक अभिन्न अंग है और उन्हें केवल सहानुभूति की दृष्टि से देखने के बजाय समान अधिकारों वाले नागरिक के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ग को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ समाज के हर वर्ग को अपनी सोच बदलनी होगी। सरकार द्वारा इनके अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधान करने के साथ ही सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। डॉ. व्यवहारे ने इस बात पर जोर दिया कि पात्र लाभार्थियों को इन योजनाओं का लाभ सुगमता से मिले, इसके लिए उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसी बुनियादी प्रक्रियाएं पूरी कराने में मदद की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने समाजकार्य के विद्यार्थियों से भी आह्वान किया कि वे इस समुदाय को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए जनजागृति अभियान चलाएं।
शिक्षा, कौशल और रोजगार के समान अवसर
कार्यशाला में मुख्य मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित सप्तरंगी सेवाभावी संस्था की अध्यक्ष तथा तृतीयपंथीय कल्याण महामंडल की सह-अध्यक्ष डॉ. सान्वी जेढवाणी ने किन्नर समुदाय के अधिकारों पर व्यापक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज भी इस समुदाय के कई लोग रेलवे स्टेशनों, टोल नाकों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अपनी आजीविका चलाने को विवश हैं। उन्हें इस स्थिति से बाहर निकालकर शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। डॉ. जेढवाणी ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक 'नालसा' (NALSA) फैसले का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसके बाद इस समुदाय को स्वतंत्र कानूनी पहचान मिली और उनके अधिकारों को सुरक्षा कवच प्राप्त हुआ।
उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार की ओर से किन्नर समुदाय के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा पूरी तरह निःशुल्क कर दी गई है। इसके अलावा, स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए बीज पूंजी योजना के तहत व्यवसाय शुरू करने हेतु 2 लाख रुपए तक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। हर जिले में इस समुदाय के लिए विशेष संरक्षण कक्ष स्थापित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने समुदाय के लोगों से अपील की कि वे अपने जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान भारत कार्ड समय पर बनवा लें ताकि सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ प्राप्त कर सकें।
पुलिस प्रशासन की सुरक्षा और प्रतिबद्धता
कार्यक्रम में उपस्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे ने कहा कि किन्नर समुदाय को लंबे समय तक उपेक्षा और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा है, जिसे बदलने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब समय बदल रहा है और पुलिस बल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके लिए अवसर के द्वार खुल रहे हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से उन्होंने आश्वस्त किया कि किन्नर समुदाय के किसी भी व्यक्ति के साथ यदि अन्याय, उत्पीड़न या कोई अन्य समस्या होती है, तो वे किसी भी समय आपातकालीन सहायता के लिए 112 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। पुलिस उनकी हर समस्या के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नियोजन भवन में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यशाला के दौरान मंच पर अपर जिलाधिकारी डॉ. नितीन व्यवहारे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे, समाज कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त विनोद मोहतुरे, डॉ. सान्वी जेढवाणी के अलावा किन्नर समुदाय के प्रतिनिधि राज और साजन भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इस दौरान समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी अपनी समस्याएं और प्रशासनिक अपेक्षाएं साझा कीं, जिन पर अधिकारियों ने सकारात्मक रुख दिखाया।