बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए मतगणना शुरू, केंद्रों पर सीसीटीवी न होने पर उम्मीदवारों का विरोध
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए वोटों की गिनती कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हो गई है। इन चुनावों में कुल 150 प्रत्याशियों के राजनीतिक भाग्य का फैसला होना है। मतदान प्रक्रिया 23 अक्टूबर को संपन्न हुई थी, जिसमें स्नातक क्षेत्रों में औसतन 53.42 प्रतिशत और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 82.85 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 89.05 प्रतिशत वोट पड़े, जबकि तिरहुत स्नातक क्षेत्र में सबसे कम 48.51 प्रतिशत मतदान हुआ था।
पटना स्नातक और तिरहुत सीट पर टिकी निगाहें
इस चुनाव में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मुकाबले पर विशेष नजर है, जहां जेडीयू के मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार और जन सुराज समर्थित अनुज सिंह आमने-सामने हैं। इस सीट पर जन सुराज उम्मीदवार का समर्थन करने के कारण मोकामा विधायक अनंत सिंह को जदयू से निष्कासित किया जा चुका है। अनुज सिंह की संभावित जीत को लेकर अनंत सिंह के आवास पर जश्न की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इसके अलावा तिरहुत शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मुजफ्फरपुर के एमआईटी परिसर में वोटों की गिनती जारी है। कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए जिला स्कूल परिसर स्थित बिहार विद्यालय परीक्षा समिति कैंपस में 14 टेबल पर मतों की छंटनी और गिनती का काम चल रहा है, जहां जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी न होने पर हंगामा
विभिन्न मतगणना केंद्रों पर व्यवस्थाओं को लेकर प्रत्याशियों ने तीखा विरोध जताया है। कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. संजय कुमार मतगणना हॉल में सीसीटीवी कैमरे न होने के विरोध में धरने पर बैठ गए। उनका आरोप था कि बिना सीसीटीवी कैमरों के मतगणना करवाई जा रही है। जन सुराज की शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार दिव्या ज्योति और अनुज सिंह ने भी मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी न होने तथा साफ-सफाई के अभाव पर सवाल उठाए। आरजेडी के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार डॉ. संजीव ने भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर आपत्ति दर्ज कराई।
मतगणना की प्रक्रिया और वरीयता क्रम
विधान परिषद चुनाव में साधारण बहुमत के बजाय आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote - STV) पद्धति का उपयोग किया जाता है। मतदाता अपने मतपत्र पर प्रत्याशियों के नाम के आगे 1, 2, 3 जैसी वरीयता दर्ज करते हैं। सबसे पहले प्रथम वरीयता (1st Preference) के वोटों की गिनती की जाती है। यदि कोई उम्मीदवार कुल वैध मतों का 50 प्रतिशत और एक वोट का कोटा हासिल कर लेता है, तो उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है। कोटा पूरा न होने पर न्यूनतम मत पाने वाले उम्मीदवार को बाहर कर उसकी दूसरी वरीयता के मतों को अन्य उम्मीदवारों में स्थानांतरित किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, शिक्षक कोटे की सीटों पर मतदाताओं की संख्या कम होने के कारण उनके परिणाम पहले आने की संभावना है।