मुजफ्फरपुर के पारू में बेला और मोतीपुर के बाद जिले का तीसरा अत्याधुनिक इंडस्ट्रियल एरिया आकार लेने जा रहा है। इसके लिए पहले चरण में 246 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के औद्योगिक मानचित्र पर एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। जिला भू-अर्जन कार्यालय द्वारा भेजे गए प्राक्कलन को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निदेशक ने प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना के मूर्त रूप लेने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
चांदपुर चिउटांहा मौजा में पहले चरण का अधिग्रहण
पारू अंचल में कुल 700 एकड़ भूमि पर नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इसी कड़ी में पहले चरण के तहत मौजा चांदपुर चिउटांहा में 246 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया पर एक अरब 26 करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी।
रैयतों के खातों में सीधे पहुंचेगी मुआवजे की राशि
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब भूमि अधिग्रहण के लिए राशि उपलब्ध कराने हेतु बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) को अधियाचना भेजी जाएगी। बियाडा से राशि प्राप्त होते ही जमीन मालिकों यानी रैयतों के बैंक खातों में मुआवजे की रकम सीधे ट्रांसफर कर दी जाएगी। प्रशासन की ओर से इसके लिए स्थानीय स्तर पर कैंप लगाए जा रहे हैं, जहां रैयतों से जमीन के जरूरी दस्तावेज एकत्र करके उनका सत्यापन किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मुआवजा राशि की गणना आधिकारिक अधिसूचना की तिथि के आधार पर की जाएगी।
शेष चार मौजा के लिए भी भेजा गया प्रस्ताव
प्रशासनिक योजना के मुताबिक पारू अंचल के पांच अलग-अलग मौजा में कुल 700 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, जिसकी अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। पहले चरण के चांदपुर चिउटांहा के अलावा शेष चार मौजा में चतुरपट्टी के लिए 150 एकड़, हरपुर कपरफोड़ा के लिए 120 एकड़, भोजपट्टी के लिए 95 एकड़ और विशुनपुर सरैया के लिए 85 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है। इन चारों मौजा के अधिग्रहण का प्रस्ताव भी संबंधित विभाग को भेजा जा चुका है, जिसे जल्द ही प्रशासनिक मंजूरी मिलने की संभावना है। इन शेष क्षेत्रों के विकास पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने का अनुमान है। मुजफ्फरपुर में बेला और मोतीपुर के बाद इस तीसरे बड़े औद्योगिक क्षेत्र के विकसित होने से उत्तर बिहार में औद्योगिक निवेश को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।