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हाजीपुर सदर अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री का छापा, खुली पोल

हाजीपुर सदर अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री का छापा, खुली पोल

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक अमले में एक बार फिर खलबली मच गई है। गुरुवार शाम को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित सदर अस्पताल का अचानक औचक निरीक्षण किया। मंत्री के इस प्रकार बिना किसी पूर्व सूचना के अस्पताल परिसर में कदम रखते ही वहां मौजूद डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के होश उड़ गए। अचानक हुए इस हाई-प्रोफाइल दौरे की भनक लगते ही पूरे महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

अचानक पहुंचे मंत्री, उड़ गए अस्पताल प्रशासन के होश

अक्सर देखा जाता है कि वीआईपी दौरों से पहले अस्पतालों में व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर दी जाती हैं, लेकिन इस बार मामला बिल्कुल अलग था। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने किसी भी प्रोटोकॉल या पूर्व सूचना के बिना सीधे सदर अस्पताल का रुख किया। जब वे अस्पताल के मुख्य द्वार से अंदर दाखिल हुए, तो वहां मौजूद कर्मचारियों को समझ ही नहीं आया कि स्थिति को कैसे संभाला जाए। इस औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना था।

जैसे ही मंत्री के अस्पताल में पहुंचने की खबर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को मिली, वैशाली की जिला पदाधिकारी (डीएम) वर्षा सिंह भी तुरंत मौके पर पहुंच गईं। डीएम के पहुंचने के बाद अस्पताल परिसर की सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जायजा लेने का दायरा और बढ़ गया, जिससे मौके पर मौजूद लापरवाह कर्मियों की मुश्किलें और अधिक बढ़ गईं।

इमरजेंसी वार्ड और ड्यूटी रोस्टर में मिली भारी खामियां

अस्पताल के भीतर कदम रखते ही स्वास्थ्य मंत्री सीधे इमरजेंसी वार्ड की तरफ बढ़े। उन्होंने वहां भर्ती मरीजों से सीधे संवाद किया और उनसे पूछा कि उन्हें अस्पताल की तरफ से समय पर दवाइयां, इलाज और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। मरीजों और उनके परिजनों ने कई मोर्चों पर चल रही समस्याओं से मंत्री को अवगत कराया।

इसके बाद मंत्री ने अस्पताल के ड्यूटी रोस्टर (Duty Roster) और कागजी रिकॉर्ड्स की जांच की। रोस्टर की गहन पड़ताल के दौरान जब जमीनी हकीकत और कागजों पर दर्ज आंकड़ों में भारी अंतर दिखा, तो स्वास्थ्य मंत्री का पारा चढ़ गया। वार्ड में कई डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति और साफ-सफाई के स्तर को देखकर उन्होंने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।

  • इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण: मरीजों से मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं का हाल जाना।
  • ड्यूटी रोस्टर में गड़बड़ी: कागजों और जमीनी उपस्थिति में भारी अंतर सामने आया।
  • अधिकारियों की क्लास: लापरवाही बरतने वाले कर्मियों को मौके पर ही कड़ी फटकार लगाई गई।

लापरवाह अधिकारियों और कर्मियों पर होगी सख्त कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान जिस प्रकार की लचर व्यवस्था देखने को मिली, उससे स्वास्थ्य मंत्री बेहद आहत और गुस्से में नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद तमाम अधिकारियों और चिकित्सा प्रभारियों को खरी-खरी सुनाई। मंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ड्यूटी के दौरान गायब रहने वाले डॉक्टरों और स्टाफ की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन पर विभागीय स्तर पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।

इस औचक निरीक्षण के दौरान वैशाली डीएम वर्षा सिंह भी स्वास्थ्य मंत्री के साथ मौजूद रहीं। मंत्री ने डीएम को भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर कड़ी नजर रखने और समय-समय पर इसकी मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए ताकि आम जनता को बेहतर चिकित्सीय लाभ मिल सके।

प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे में मचा हड़कंप

हाजीपुर सदर अस्पताल में हुई इस औचक कार्रवाई का असर केवल वैशाली जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके बाद पूरे बिहार के स्वास्थ्य विभाग में सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस घटना के बाद से प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच यह संदेश साफ चला गया है कि कभी भी कोई भी बड़ा अधिकारी या मंत्री औचक निरीक्षण के लिए पहुंच सकता है, इसलिए अपनी कार्यशैली में सुधार लाना बेहद जरूरी है।

आम जनता लंबे समय से सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाओं के सुधार की मांग करती रही है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री का यह कड़ा कदम निश्चित रूप से उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत की उम्मीद जगाता है जो निजी अस्पतालों का महंगा खर्च उठाने में असमर्थ हैं और पूरी तरह से सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर निर्भर हैं।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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