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बिहार में महिलाओं की बदली तकदीर, नौकरियों और निकायों में आरक्षण से आई बड़ी क्रांति

बिहार में महिलाओं की बदली तकदीर, नौकरियों और निकायों में आरक्षण से आई बड़ी क्रांति

बिहार की राजनीति और सामाजिक परिदृश्य में पिछले दो दशकों में जो बदलाव आए हैं, उन्होंने देश भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसी क्रम में, नालंदा जिले के बिहारशरीफ स्थित महाराजा पैलेस में जिला जदयू महिला प्रकोष्ठ की एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यापक समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। इस उच्च-स्तरीय बैठक में महिलाओं के उत्थान, सरकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि किस तरह पिछले कुछ वर्षों में लागू नीतियों ने आधी आबादी की तकदीर और तस्वीर दोनों को बदलकर रख दिया है।

'नीतीश मॉडल' बना महिलाओं के लिए वरदान: शिवरानी प्रजापति

समीक्षा बैठक को मुख्य तौर पर संबोधित करते हुए प्रदेश महिला जदयू अध्यक्ष सह नवनिर्वाचित विधान पार्षद शिवरानी प्रजापति ने बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं के उत्थान और विकास के लिए जिस 'नीतीश मॉडल' को धरातल पर उतारा गया है, वह किसी वरदान से कम नहीं साबित नहीं हुआ है। वर्ष 2005 के बाद से बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में महिला सशक्तिकरण की दिशा में जो ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं, उनके दूरगामी परिणाम आज साफ तौर पर देखने को मिल रहे हैं।

शिवरानी प्रजापति ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि किस प्रकार सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण देकर उन्हें प्रशासनिक महकमों में मजबूत जगह दी गई है। इसके साथ ही, पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की ऐतिहासिक व्यवस्था ने ग्रामीण और शहरी दोनों ही स्तरों पर महिलाओं को सत्ता और निर्णय प्रक्रिया की मुख्यधारा में ला खड़ा किया है। अब महिलाएं केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने गांवों और शहरों की सरकार खुद चला रही हैं।

'जीविका' समूहों से आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत

महिला सशक्तिकरण की बात जब भी होगी, तब 'जीविका' समूहों का जिक्र किए बिना तस्वीर अधूरी मानी जाएगी। बैठक में इस बात पर विशेष प्रकाश डाला गया कि कैसे जीविका के माध्यम से राज्य की करोड़ों महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। छोटे-छोटे लोन, स्वयं सहायता समूहों के जरिए बचत और विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण ने ग्रामीण महिलाओं की सोच और उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।

  • वित्तीय स्वतंत्रता: जीविका दीदियों ने यह साबित कर दिया है कि यदि उन्हें सही मंच और वित्तीय सहायता मिले, तो वे स्वरोजगार के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।
  • सामाजिक बदलाव: आर्थिक रूप से मजबूत होने के कारण समाज में महिलाओं के प्रति नजरिए में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
  • निर्णय लेने की क्षमता: घर के आर्थिक मामलों से लेकर सामाजिक मुद्दों तक में अब महिलाओं की आवाज को प्राथमिकता मिलने लगी है।

शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं से संवर रहा बेटियों का भविष्य

सिर्फ रोजगार और राजनीति ही नहीं, बल्कि शिक्षा के मोर्चे पर भी बिहार की बेटियों ने लंबी छलांग लगाई है। शिवरानी प्रजापति ने शिक्षा के क्षेत्र में आए क्रांतिकारी बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाओं ने बेटियों की राह बेहद आसान कर दी है। शिक्षण संस्थानों में छात्राओं के लिए शुल्क माफी जैसी सहूलियतें दी गई हैं। इसके अलावा, मैट्रिक, इंटर और स्नातक की परीक्षाएं उत्तीर्ण करने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि ने बालिकाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए न केवल प्रेरित किया है, बल्कि उनके माता-पिता के आर्थिक बोझ को भी काफी हद तक कम किया है।

आज स्थिति यह है कि बिहार के दूर-दराज के गांवों से निकलकर बेटियां उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रही हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी से लेकर उद्यमी तक, हर क्षेत्र में बेटियों की बढ़ती भागीदारी इस बात की गवाही दे रही है कि शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयास सही दिशा में जा रहे हैं।

बुनियादी ढांचे और विकास के हर मोर्चे पर आगे बढ़ा बिहार

बैठक में उपस्थित विधान परिषद की सचेतक रीना यादव ने भी अपने संबोधन में राज्य सरकार की नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी सोच के कारण बिहार ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure), शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यटन के क्षेत्रों में अभूतपूर्व और तेज गति से विकास किया है। सरकार द्वारा बनाई गई नीतियां किसी एक वर्ग विशेष के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर तबके को साथ लेकर चलने और उन्हें आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं।

रीना यादव ने कहा कि आज का बिहार विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। सड़कों का जाल बिछ चुका है, बिजली की स्थिति बेहतर हुई है और स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया गया है। इन तमाम विकास कार्यों का सबसे बड़ा फायदा महिलाओं और बच्चों को मिला है, क्योंकि बुनियादी सुविधाएं बेहतर होने से उनका जीवन स्तर भी सुधरा है।

संगठन की मजबूती और आगामी रणनीतियों पर चर्चा

यह समीक्षा बैठक केवल उपलब्धियों के जश्न तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने के उपायों पर भी घंटों मंथन किया गया। आगामी राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई ताकि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाया जा सके। महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया।

कार्यक्रम के दौरान महिला जदयू की प्रभारी सुप्रिया रानी ने भी अपने विचार रखे और कार्यकर्ताओं में जोश भरा। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष मधु, जिला अध्यक्ष वसुंधरा कुमारी, नगर अध्यक्ष निरंजन गुप्ता समेत भारी संख्या में महिला नेत्री और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहीं। सभी ने एक स्वर में आगामी समय में संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया।

निष्कर्ष: महिला नेतृत्व का नया स्वर्ण काल

बिहार में महिलाओं को लेकर चल रही इन योजनाओं और राजनीतिक भागीदारी के विश्लेषण से यह साफ जाहिर होता है कि राज्य में महिला नेतृत्व का एक नया स्वर्ण काल शुरू हो चुका है। आरक्षण के जरिए जो राजनीतिक जमीन महिलाओं को दी गई थी, आज वह फलित होती दिख रही है। जिस प्रकार से ग्रामीण और शहरी महिलाएं आगे बढ़कर अपनी बात रख रही हैं और शासन व्यवस्था में अपनी भूमिका निभा रही हैं, वह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण बन चुका है। आने वाले समय में महिलाओं की यह बढ़ती सक्रियता बिहार की राजनीति और समाज की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगी।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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