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जमुई मड़वा पहाड़ कांड: 40 घंटे सोती रही पुलिस, वायरल वीडियो ने खोली पोल

जमुई मड़वा पहाड़ कांड: 40 घंटे सोती रही पुलिस, वायरल वीडियो ने खोली पोल

बिहार के जमुई जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला मुख्यालय से महज करीब पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर स्थित सूने मड़वा पहाड़ की छांव में इंसानियत को शर्मसार करने वाला कुकृत्य अंजाम दिया गया। इस मामले में सबसे डरावना पहलू यह नहीं है कि गुनाहगारों ने जुर्म किया, बल्कि यह है कि खाकी की नींद तब टूटी जब सोशल मीडिया पर इस घिनौनी करतूत का वीडियो तेजी से वायरल होने लगा।

मड़वा पहाड़ का खूनी सन्नाटा और पुलिस की सुस्ती

घटना की शुरुआत 19 सितंबर की शाम को होती है, जब मड़वा पहाड़ के उस सुनसान रास्ते पर एक नाबालिग छात्रा को दरिंदगी का शिकार बनाया गया। आरोप है कि अपराधियों ने न सिर्फ इस वारदात को अंजाम दिया, बल्कि इसका वीडियो भी बनाया जो बाद में सोशल मीडिया पर तैरने लगा। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर घटना के बाद करीब 40 से 48 घंटे बीत गए, लेकिन स्थानीय पुलिस महकमे को इसकी भनक तक नहीं लगी।

सवाल यह उठता है कि क्या जमुई पुलिस की साइबर मॉनिटरिंग सेल सो रही थी? क्या उस इलाके में गश्त लगाने वाली पुलिस की गाड़ियां सिर्फ कागजों पर ही पेट्रोलिंग कर रही थीं? बीट पुलिस और चौकीदार की खामोशी इस बात की गवाही दे रही है कि गांव और थाने के बीच की खुफिया कड़ी पूरी तरह से फेल हो चुकी है। आखिर क्यों स्थानीय स्तर पर इस जुर्म की खबर पुलिस तक समय पर नहीं पहुंच पाई?

वीडियो वायरल होने के बाद जागा प्रशासन

तारीख 21 सितंबर को जब इस खौफनाक वाकये का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होना शुरू हुआ, तब जाकर पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) नवीन कुमार और पुलिस अधीक्षक (SP) विश्वजीत दयाल के संज्ञान में यह बात आते ही पुलिस महकमा हरकत में आया।

  • एसआईटी का गठन: मामले के खुलासे और आरोपियों की धरपकड़ के लिए एसडीपीओ की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
  • तुरंत कार्रवाई: पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान और शुरुआती सुरागों के आधार पर ताबड़तोड़ दबिश देना शुरू किया।
  • गिरफ्तारियां: इस मामले में शुरुआती कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन नाबालिग आरोपियों को अपनी गिरफ्त में लिया। इसके बाद मुख्य आरोपी नंदन यादव और हरेश राम यादव पर भी कानून का शिकंजा कसा गया।

पुलिस मुठभेड़ और मुख्य आरोपी पर एक्शन

जांच और धरपकड़ के दौरान उस वक्त एक बड़ा मोड़ आया जब मुख्य मुजरिमों की गिरफ्तारी के प्रयास में पुलिस के साथ मुठभेड़ की खबर सामने आई। पुलिस कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी के पैर में गोली लगने की सूचना मिली, जिससे यह साफ हो गया कि खाकी ने आखिरकार अपराधियों के गिरेबान तक पहुंच ही बनाई। हालांकि, इन गिरफ्तारियों के शोर के बीच उस शुरुआती प्रशासनिक लापरवाही पर पर्दा नहीं डाला जा सकता, जिसके कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हुए थे।

क्या कहती है जनता और उठ रहे सवाल?

स्थानीय स्तर पर आम नागरिकों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि सिर्फ अपराधियों की गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा। उन लापरवाह अधिकारियों और थाना प्रभारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए जिनकी सुस्ती की वजह से यह काला अध्याय लिखा गया। यदि समय रहते पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई होती, तो शायद इस तरह की घटना से बचा जा सकता था।

"जब तक जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को पारदर्शी और जवाबदेह नहीं बनाया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं समाज के सीने पर खंजर की तरह चुभती रहेंगी। पीड़िता की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।"

भविष्य के लिए चेतावनी और सबक

जमुई का यह मड़वा पहाड़ कांड केवल एक आपराधिक वारदात नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा तंत्र के भीतर दीमक की तरह लगी सुस्ती का आईना है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में कोर्ट और पुलिस मिलकर मुजरिमों को किस तरह की सजा दिलाते हैं, ताकि आने वाले समय में कोई भी इस तरह की घिनौनी हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके। साथ ही, उन कुंभकर्णी नींद सोने वाले अफसरों पर क्या कार्रवाई होती है, जिन पर शुरुआती स्तर परलापरवाही बरतने के गंभीर आरोप हैं।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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