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72 की उम्र में 24 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़े कपिलदेव, जमुई के लाल ने रचा इतिहास

72 की उम्र में 24 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़े कपिलदेव, जमुई के लाल ने रचा इतिहास

उम्र केवल एक संख्या है, इस बात को अक्सर कहा जाता है, लेकिन बहुत कम लोग इसे अपने जीवन में सच कर दिखाते हैं। आज के इस दौर में जहां 70 की उम्र पार करते ही लोग अपनी जिंदगी को चार दीवारों और आरामदेह कुर्सियों तक सीमित मान लेते हैं, वहीं बिहार के जमुई जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे देश के युवाओं और बुजुर्गों को हैरान भी किया है और एक नई प्रेरणा भी दी है। जमुई के रहने वाले 72 वर्षीय कपिलदेव रावत ने उम्र की तमाम झुर्रियों और शारीरिक सीमाओं को दरकिनार करते हुए हिमाचल प्रदेश की बर्फीली वादियों में आसमान को चीरते हुए एक ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है।

हिमाचल की वादियों में 24 हजार फीट की ऊंचाई पर भरी उड़ान

हिमाचल प्रदेश की दुर्गम और खूबसूरत पहाड़ियों के बीच साहसिक खेलों का रोमांच अपने चरम पर होता है। इसी रोमांच के बीच 72 साल के कपिलदेव रावत ने लगभग 24 हजार फीट की ऊंचाई से पैराग्लाइडिंग करके यह साबित कर दिया कि सपनों को जीने की कोई उम्र नहीं होती। इतनी अधिक ऊंचाई पर हवा के बीच तैरना अच्छे-अच्छे युवाओं के दिलों की धड़कनें बढ़ा देता है, लेकिन इस बुजुर्ग ने जिस अदम्य साहस और हौसले का परिचय दिया, वह वाकई अद्भुत और मिसाल कायम करने वाला है।

जब उन्होंने आसमान की ऊंचाइयों में गोता लगाया, तो बादलों के बीच से नीचे दिखती दुनिया का वह नजारा उनकी जिंदगी का सबसे हसीन और यादगार पल बन गया। हवा के वेग के साथ उड़ते हुए उन्होंने महसूस किया कि जिंदगी को खुलकर जीने की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।

परिवार का साथ और बच्चों का प्रोत्साहन बना सबसे बड़ा संबल

किसी भी उम्र में जब आप कोई जोखिम भरा या लीक से हटकर काम करते हैं, तो अपनों का साथ सबसे बड़ी ताकत बनता है। कपिलदेव रावत की इस सफलता के पीछे उनके बच्चों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया कि इस अनोखे सफर में उनके बच्चों ने उनका हौसला पल-पल बढ़ाया। परिवार का अटूट भरोसा ही था कि उन्होंने इस उम्र में भी पैराग्लाइडिंग जैसे जोखिम भरे खेल को आजमाने का फैसला किया।

बच्चों की जिद और प्रोत्साहन ने उनके भीतर छिपे उस शख्स को जगा दिया, जो शायद समय के साथ कहीं छिप गया था। आज के इस आधुनिक युग में जहां कई बार बुजुर्ग खुद को अकेला या उपेक्षित महसूस करते हैं, वहीं कपिलदेव और उनके बच्चों का यह तालमेल एक आदर्श पारिवारिक बॉन्डिंग की खूबसूरत मिसाल पेश करता है।

बच्चों के जिक्र पर भावुक हुए कपिलदेव

अपनी इस ऐतिहासिक उड़ान के अनुभव को साझा करते हुए कपिलदेव रावत मीडिया के सामने अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। बच्चों का जिक्र करते हुए उनका गला भर आया और वे भावुक हो गए। उन्होंने नम आंखों से बताया कि अगर उनके बच्चों का साथ न होता, तो शायद वह इस सपने को कभी पूरा नहीं कर पाते। उन्होंने अपने दिल की बात कहते हुए यह भी कामना की कि दुनिया के हर माता-पिता को ऐसे ही समझदार और सपोर्टिव बच्चे मिलें, जो उनके सपनों को अपना समझें और बुढ़ापे की दहलीज़ पर भी उन्हें एक नई उड़ान भरने का हौसला दें।

उन लोगों के लिए तमाचा है जो उम्र को मानते हैं बहाना

आजकल तमाम ऐसे लोग हैं जो 40-50 की उम्र पार करते ही अपनी फिटनेस, अपने शौक और अपने सपनों को यह कहकर दफन कर देते हैं कि अब उनकी उम्र नहीं रही। ऐसे तमाम लोगों के लिए कपिलदेव रावत की यह कहानी एक आईना है। उन्होंने अपनी इस उड़ान से यह संदेश पूरी दुनिया को दिया है कि जीवन का हर पल नया है और यदि आपके भीतर कुछ कर दिखाने का जज्बा है, तो कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती।

बढ़ती उम्र में फिटनेस और मानसिक दृढ़ता का संदेश

24 हजार फीट की ऊंचाई पर पैराग्लाइडिंग करने के लिए न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद मजबूत होना पड़ता है। 72 साल की उम्र में इस स्तर की फिटनेस और मानसिक दृढ़ता बनाए रखना यह बताता है कि कपिलदेव अपनी जीवनशैली को लेकर कितने अनुशासनप्रिय रहे होंगे। उनका यह साहसिक कदम देश भर के सीनियर सिटीजंस के लिए एक बड़ा मोटिवेशन है कि वे अपनी सेहत का ख्याल रखें और जीवन के हर पड़ाव का आनंद लें।

जमुई के माटी से ताल्लुक रखने वाले कपिलदेव रावत ने अपनी इस छोटी सी लेकिन ऐतिहासिक उड़ान से यह साबित कर दिया कि आसमान की कोई सीमा नहीं होती, बस आपके परों में हौसले की उड़ान होनी चाहिए। उनकी यह कहानी आने वाले कई सालों तक लोगों को प्रेरित करती रहेगी और याद दिलाती रहेगी कि जिंदगी सिर्फ जीने के लिए नहीं, बल्कि उसे अपनी शर्तों पर यादगार बनाने के लिए है।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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