पटना हाईकोर्ट के वरीय न्यायाधीश सुधीर सिंह को उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपनी हालिया बैठक में पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश सुधीर सिंह को उत्तराखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की औपचारिक अनुशंसा की है। कॉलेजियम के इस प्रस्ताव के बाद अब उनकी नियुक्ति की आगे की प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके तहत राष्ट्रपति भवन से औपचारिक वारंट जारी होने के बाद वे नया पदभार संभालेंगे।
न्यायिक सफर और पटना हाईकोर्ट में नियुक्ति
न्यायाधीश सुधीर सिंह का लंबा और समृद्ध न्यायिक करियर रहा है। वे 15 अप्रैल 2015 को पटना हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किए गए थे। इसके बाद न्यायिक कार्यों में उनके योगदान को देखते हुए 20 अप्रैल 2016 को उन्हें पटना हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई थी। अपने लगभग एक दशक के कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई और फैसले में अहम भूमिका निभाई है।
शिक्षा और वकालत की पृष्ठभूमि
न्यायाधीश सुधीर सिंह की शुरुआती शिक्षा झारखंड के रांची स्थित विकास विद्यालय से पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए पटना का रुख किया। उन्होंने पटना कॉलेज (पटना विश्वविद्यालय) से राजनीति विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने पटना लॉ कॉलेज से विधि (एलएलबी) की शिक्षा पूरी की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 1991 में एक अधिवक्ता के रूप में अपना पंजीकरण कराया और पटना हाईकोर्ट में वकालत की शुरुआत की, जहां उन्होंने दीवानी और आपराधिक मामलों में कानूनी प्रैक्टिस की।
विधिक परिवार से संबंध
न्यायाधीश सुधीर सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि का ताल्लुक भी न्यायपालिका और कानून के क्षेत्र से बहुत पुराना और प्रतिष्ठित रहा है। उनके पिता न्यायमूर्ति एन.पी. सिंह देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं। इसके अलावा वे बहुचर्चित कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वहीं, उनके दादा बैरिस्टर बलदेव प्रसाद सिंह पटना हाईकोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता थे और वे लंबे समय तक पटना हाईकोर्ट बैरिस्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर भी रहे थे।