भागलपुर में फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन चालक के बिना ठप, पनीर और मिठाइयों में मिलावट रोकने को लेकर कार्रवाई तेज
बिहार के भागलपुर जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट से जुड़ी एक गंभीर बात सामने आई है। यहां जांच के दौरान पनीर को अधिक दिनों तक ताजा दिखाने के लिए उसमें फॉर्मलिन और अन्य हानिकारक रसायन मिलाने की आशंका जताई गई है। इसके साथ ही त्योहारी सीजन और सामान्य दिनों में बिकने वाली मिठाइयों में अनधिकृत रंगों के इस्तेमाल का अंदेशा भी जताया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले कुछ महीनों के दौरान जिले के विभिन्न इलाकों में कार्रवाई करते हुए करीब आधा दर्जन दुकानदारों के खिलाफ कदम उठाए हैं। हालांकि, विभाग के पास उपलब्ध 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' मोबाइल जांच वाहन इस समय चालक के अभाव में सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रहा है, जिससे मैदानी स्तर पर होने वाली जांच में कुछ बाधाएं आ रही हैं।
वाहन चालक के सेवानिवृत्त होने से नियमित जांच प्रभावित
जिले के लोगों को मिलावटी और दूषित खाद्य पदार्थों से बचाने के लिए करीब छह साल पहले सरकार की तरफ से 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' नामक विशेष प्रयोगशाला वाहन उपलब्ध कराया गया था। श्रावणी मेला जैसे बड़े मेलों और दीपावली, छठ जैसे महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों के दौरान मुख्यालय द्वारा इसी वाहन के जरिए मौके पर ही खाद्य पदार्थों की त्वरित जांच करने के निर्देश दिए जाते हैं। इस मोबाइल वैन के संचालन के लिए तकनीशियन की व्यवस्था तो पूरी है, लेकिन नियमित चालक के सेवानिवृत्त हो जाने के कारण इसके संचालन पर संकट खड़ा हो गया है। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजहंस कुमार ने इस बात की पुष्टि की है कि चालक के सेवानिवृत्त होने की वजह से वाहन को मैदान में उतारने में परेशानी आ रही है। हालांकि, स्थिति से निपटने के लिए सरकार की ओर से संविदा पर नए चालक की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया जा चुका है। नई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहन का नियमित संचालन फिर से पटरी पर आ जाएगा।
सप्ताह में दो दिन जांच का है प्रावधान
मुख्यालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि इस मोबाइल प्रयोगशाला वाहन के माध्यम से सप्ताह में कम से कम दो दिन अलग-अलग बाजारों में जाकर खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच की जाए। खाद्य निरीक्षक अशोक कुमार सिन्हा, जिनके पास भागलपुर के अलावा मुंगेर जिले का भी अतिरिक्त प्रभार है, ने बताया कि चालक के नहीं होने के कारण इस साप्ताहिक रोस्टर के पालन में रुकावट आ रही है। जब तक विभाग को स्थायी या संविदा पर नया चालक नहीं मिल जाता, तब तक उपलब्ध सीमित संसाधनों और मैदानी स्टाफ के जरिए ही काम चलाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ न हो सके।
मोबाइल वैन में होती है सामान्य जांच, रासायनिक परीक्षण के लिए नमूने पटना भेजे जाते
'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' वाहन के अंदर बनी छोटी प्रयोगशाला में खाद्य पदार्थों की सामान्य और प्राथमिक जांच की जाती है। इस बारे में जानकारी देते हुए खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजहंस कुमार ने स्पष्ट किया कि वाहन के जरिए हर प्रकार की सूक्ष्म रासायनिक जांच संभव नहीं है। इस प्रयोगशाला में मौके पर मुख्य रूप से मिठाइयों में फफूंद लगने, किसी तरह की असामान्य गंध आने और अन्य खराब होने वाले लक्षणों की तुरंत पहचान की जाती है। यदि किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर संदेह गहराता है, तो उसके आधिकारिक नमूने यानी सैंपल सील करके विस्तृत रासायनिक जांच के लिए राज्य के पटना स्थित प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं। पटना लैब से मिलने वाली अंतिम रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
अगस्त से अब तक आधा दर्जन दुकानदारों पर शिकंजा
खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले में मिलावटखोरों के खिलाफ अपनी मुहिम तेज कर दी है। राजहंस कुमार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल अगस्त महीने से लेकर अब तक भागलपुर जिले में करीब आधा दर्जन दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। शहर और ग्रामीण इलाकों में औचक निरीक्षण के दौरान कई दुकानों पर खराब और अमानक खाद्य पदार्थ बेचे जाने के मामले पकड़े गए। जब प्रयोगशाला जांच में मिलावट की पुष्टि हो जाती है, तो नियमानुसार पूरी फाइल सक्षम प्राधिकारी के पास भेजी जाती है। मिलावट की गंभीरता और मामले की प्रकृति को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी द्वारा दुकानदारों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा गंभीर किस्म के मामलों में अदालत की लंबी कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाती है। खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रावधानों के तहत दोषी पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों का खाद्य कारोबार लाइसेंस या तो कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया जाता है या पूरी तरह रद्द कर दिया जाता है।
पनीर में फॉर्मलिन का प्रयोग और स्वास्थ्य पर इसके गंभीर खतरे
जांच के दौरान सबसे चिंताजनक पहलू पनीर में मिलावट का सामने आया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, कुछ मुनाफाखोर दुकानदार पनीर को सामान्य से अधिक दिनों तक बिना सड़े और बिना खराब हुए स्टोर करने के लिए फॉर्मलिन और अन्य खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। फॉर्मलिन एक ऐसा रसायन है जिसका उपयोग आमतौर पर मृत शरीरों या जैविक नमूनों को संरक्षित करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसका खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल कानूनी रूप से पूरी तरह प्रतिबंधित और अवैध है। इस रसायन के प्रयोग से पनीर पर जल्दी खराब होने के प्राकृतिक लक्षण स्पष्ट नहीं दिखाई देते, जिससे आम ग्राहक आसानी से धोखा खा जाते हैं। खाद्य विशेषज्ञों का मानना है कि फॉर्मलिन मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इसके लगातार संपर्क में आने या इसके सेवन से शरीर को गंभीर आंतरिक नुकसान पहुंच सकता है। इस प्रकार के अवैध रसायनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल आम जनता की जान के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। पनीर के अलावा मिठाइयों में तय मात्रा से अधिक या प्रतिबंधित सिंथेटिक रंगों के इस्तेमाल की आशंका को भांपते हुए भी विभाग समय-समय पर नमूने एकत्र कर रहा है। विभाग का कहना है कि नियमों के दायरे में रहकर लगातार सैंपल लिए जा रहे हैं और मिलावट की पुष्टि होने पर किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।