बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए मतदान से ठीक पहले सियासी पारा चढ़ गया है। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात राजद प्रत्याशी के आवास पर पुलिस के पहुंचने और एसटीएफ द्वारा गिरफ्तारी के प्रयास का दावा किए जाने से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
बिहार विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन सीटों के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही सूबे की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात करीब एक बजे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रत्याशी डॉ. संजीव के आवास पर पुलिस बल के पहुंचने का मामला प्रकाश में आया है। इस घटनाक्रम का एक वीडियो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया है, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया है कि राजद के नेता और कार्यकर्ता पुलिस की इस प्रकार की कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। वहीं, डॉ. संजीव ने खुद एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) उनके घर पहुंची थी।
आधी रात पुलिस की दस्तक और वीडियो वार
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में पुलिस अधिकारी आवास के मुख्य द्वार पर मौजूद लोगों से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में पुलिस अधिकारी यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि उन्हें सूचना मिली थी कि घर के अंदर बाहर से चार-पांच लोग ठहरे हुए हैं, जो आगामी चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। इसके जवाब में आवास पर मौजूद लोगों ने इसे सिरे से खारिज करते हुए इसे फर्जी सूचना और प्रशासनिक हताशा करार दिया। हालांकि, पुलिस के इस प्रकार अचानक पहुंचने के पीछे के वास्तविक कानूनी कारणों और परिस्थितियों को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
तेजस्वी यादव का सरकार पर तीखा हमला
घटना के बाद राजद नेता तेजस्वी यादव ने राज्य की वर्तमान सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों के राजनीतिक दबाव में पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। तेजस्वी ने दावा किया कि शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव से ठीक पहले राजद उम्मीदवार के आवास पर बिना किसी सर्च वारंट के आधी रात को पुलिस भेजना विपक्षी नेताओं को हतोत्साहित करने की सोची-समझी साजिश है। उन्होंने दो टूक कहा कि पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के सिपहसालार और राजद के तमाम कार्यकर्ता इस तरह के दबाव से भयभीत नहीं होने वाले हैं। अपने इस पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया और केंद्र तथा राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
डॉ. संजीव का दावा, एसटीएफ पर लगाए आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में रहे राजद प्रत्याशी डॉ. संजीव ने भी एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है। उन्होंने दावा किया कि उनके आवास पर एसटीएफ के जवान पहुंचे थे और उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा था। डॉ. संजीव ने सवालिया लहजे में कहा कि जब पुलिस या एसटीएफ की तरफ से उन्हें कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया और न ही किसी पूर्व दर्ज मुकदमे या वारंट की जानकारी दी गई, तो ऐसे में पुलिस बल उनके घर क्यों दाखिल हुआ? फिलहाल, डॉ. संजीव और तेजस्वी यादव के इन गंभीर आरोपों पर पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। प्रशासनिक और कानूनी पक्ष स्पष्ट होने के बाद ही इस हाई-वोल्टेज ड्रम की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
आठ सीटों पर 150 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर
बिहार विधान परिषद की चार स्नातक निर्वाचन और चार शिक्षक निर्वाचन सीटों के लिए कुल 150 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इन सभी सीटों पर कुल 5,32,847 मतदाता पंजीकृत हैं, जो अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। मतदान से ठीक पहले मध्य रात्रि में घटे इस सियासी घटनाक्रम ने चुनाव के माहौल को और अधिक गर्मा दिया है। एक तरफ जहां मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस कार्रवाई को लेकर लगातार आक्रामक बना हुआ है। चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति और निष्पक्षता बनाए रखने को लेकर सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी और जवाबदेही इस समय सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है।