चंद्रपुर के आत्मानुसंधान भू-वैकुंठ अड्याल टेकड़ी पर राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की 58वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बुधवार को एक भव्य पालकी पदयात्रा निकाली गई। इस आध्यात्मिक आयोजन में विभिन्न गांवों और क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों गुरुदेव भक्तों ने हिस्सा लिया और राष्ट्रसंत के विचारों को नमन करते हुए मानवसेवा का संदेश दिया।
प्रतिवर्ष की स्थापित परंपरा के अनुसार बुधवार को सुबह 9 बजे अड्याल टेकड़ी स्थित सत्संग भवन से पालकी यात्रा का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संचालक सुवोध के मार्गदर्शन में हुई, जिसमें शिक्षक नवल मुले, लालचंद नखाते और मुनेश्वर दिवटे की प्रमुख उपस्थिति रही। सबसे पहले सुबोध द्वारा पालकी का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद उपस्थित गुरुदेव भक्तों ने पूजा-अर्चना और आरती कर पालकी को आगे की यात्रा के लिए रवाना किया। यात्रा के दौरान चौगान और लोहारा के भजन मंडलों ने मनमोहक भजनों की प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
गुरुपद गुफा और महासमाधि पर श्रद्धासुमन
पदयात्रा के मार्ग में पड़ने वाली गुरुपद गुफा में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की पवित्र पादुकाओं का विशेष पूजन किया गया। इसके उपरांत, कर्मयोगी संत पूज्य तुकारामदादा गीताचार्य की महासमाधि पर श्रद्धालुओं ने पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर संचालक सुबोध ने पालकी पदयात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा केवल किसी कर्मकांड या अंधविश्वास का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के विचारों, कार्यों और उनके दर्शन को समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है। राष्ट्रसंत ने जीवनभर समाजप्रबोधन, ग्रामविकास, मानवसेवा और समाज में व्याप्त कुरीतियों के उन्मूलन के लिए कार्य किया था। उनके इन्हीं विचारों को अपने आचरण में उतारना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करना है।
विभिन्न क्षेत्रों के भक्तों की सहभागिता और मार्ग में स्वागत
इस पालकी यात्रा में महाराष्ट्र और आसपास के कई क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भागीदारी की। इसमें मुख्य रूप से चौगान, कासर्ला, ब्रह्मपुरी, अड्याल, मांदेड, मोखारा, चिंधीचक, लोहारा, चोरटी, पारडी, पान्होली, लाखापुर, कोजबी, मांगरूल, अमरावती, शेगांव-बुलढाणा, वैरागड़ और सुलतानपुर के गुरुदेव भक्त शामिल हुए। इस आयोजन ने श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने के साथ ही सामाजिक एकता और समरसता का संदेश दिया।
अड्याल टेकड़ी से रवाना हुई पालकी यात्रा का विभिन्न पड़ावों पर स्थानीय नागरिकों और संगठनों द्वारा जोरदार स्वागत किया गया। मार्ग में महिला आश्रम, मेढा-किरमिटी में शिवदास कोरे की रसवंती, किरमिटी-मेढा में लक्ष्मण कोरे, सहारा इंडस्ट्री के सुनील रणदिवे, कोर्धा स्थित श्री गुरुदेव राइस मिल और मिथूर के गुरुदेव सेवा मंडल द्वारा पालकी का स्वागत एवं पूजन किया गया। इसके पश्चात नवेगांव पांडव स्थित गुरुदेव सेवा मंडल में पालकी का उत्साहपूर्वक स्वागत हुआ, जहां पालकी पूजन के साथ विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए। इन आयोजनों के बाद उपस्थित सभी गुरुदेव भक्तों ने सामूहिक महाप्रसाद का लाभ लिया और इसके बाद पालकी पदयात्रा कोटगांव की ओर आगे बढ़ी।