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सीतामढ़ी में जिला पार्षद प्रतिनिधि की हत्या, पुलिस पर पथराव और बवाल

सीतामढ़ी में जिला पार्षद प्रतिनिधि की हत्या, पुलिस पर पथराव और बवाल

बिहार के सीतामढ़ी जिले में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के डुमरा थाना क्षेत्र के मिश्रौलिया पंचायत के केथरिया रामपट्टी गांव में शनिवार सुबह एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया गया। अपराधियों ने मॉर्निंग वॉक पर निकले जिला पार्षद प्रतिनिधि बैद्यनाथ महतो को गोलियों से भून डाला। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया है और आम जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

मॉर्निंग वॉक के दौरान अपराधियों ने दागी आठ गोलियां

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला परिषद क्षेत्र संख्या-13 की पार्षद खुशदील देवी के पति बैद्यनाथ महतो हर रोज की तरह शनिवार की सुबह करीब छह बजे टहलने के लिए निकले थे। वे केथरिया रामपट्टी गांव स्थित श्मशान घाट के पास बने एक बैठका पर रुके हुए थे, तभी घात लगाए बैठे अपराधियों ने उन पर हमला बोल दिया। चश्मदीदों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दो बाइकों पर सवार होकर आए चार अपराधियों ने बेहद करीब से बैद्यनाथ महतो पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

अपराधियों ने उन्हें एक के बाद एक कुल आठ गोलियां मारीं, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। दिनदहाड़े हुई इस सनसनीखेज हत्या की वारदात से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। घटना को अंजाम देने के बाद सभी हमलावर हथियार लहराते हुए आसानी से फरार होने में कामयाब रहे।

हत्या के बाद भड़की हिंसा, पुलिस पर पथराव और गाड़ियों में तोड़फोड़

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय स्वजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए। आक्रोशित भीड़ ने अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी और पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सड़क जाम कर आगजनी की गई और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई।

हालात को नियंत्रित करने के लिए जब पुलिस बल मौके पर पहुंचा, तो गुस्साए ग्रामीणों का विरोध और उग्र हो गया। भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसक झड़प में इंस्पेक्टर सह यातायात थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उग्र भीड़ ने पुलिस के कई वाहनों में भी जमकर तोड़फोड़ की, जिससे घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसपी अमित रंजन खुद भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और हालात को संभालने की कोशिश की।

चार दिन पहले ही थाने का किया गया था घेराव

इस हत्याकांड के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच पनपा आक्रोश अचानक नहीं फूटा है, बल्कि इसके पीछे गहरी नाराजगी छिपी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की घोर निष्क्रियता और लचर कानून व्यवस्था के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

उल्लेखनीय है कि बीते 28 अगस्त की रात भी इन्हीं बदमाशों ने बैद्यनाथ महतो के घर पर पहुंचकर दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग की थी। उस वक्त घटना के तुरंत बाद बैद्यनाथ महतो ने थाने पहुंचकर पुलिस को दो जिंदा या खाली खोखे भी उपलब्ध कराए थे। इस मामले में एजाज और त्रिभुवन समेत कुल तीन नामजद लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि नामजद प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद डुमरा थाने की पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पुलिस की इसी उदासीनता के खिलाफ मात्र चार दिन पहले ही आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने का घेराव किया था और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग उठाई थी। यदि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो शायद यह बड़ा हत्याकांड टाला जा सकता था।

पुलिस प्रशासन पर उठ रहे गंभीर सवाल

बैद्यनाथ महतो की हत्या ने एक बार फिर बिहार में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा और पुलिसिया इकबाल पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। दिनदहाड़े एक राजनीतिक प्रतिनिधि की इस तरह हत्या होना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। फिलहाल, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपद्रवियों और हत्या में शामिल अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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