बिहार के सुपौल जिले से इस वक्त एक बड़ी राजनीतिक हलचल की खबर सामने आ रही है। निर्मली शहर में रविवार, 04 अक्टूबर 2026 को चुनावी प्रक्रिया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ महागठबंधन के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने शहर की सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। इस प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला भी फूंका गया, जिससे इलाके में सियासी सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
निर्मली शहर में निकला आक्रोश मार्च, सिपाही चौक पर हुआ पुतला दहन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महागठबंधन के नेतृत्व में निर्मली-मरौना क्षेत्र के सैकड़ों कार्यकर्ता स्थानीय दुर्गास्थान पर एकत्र हुए। वहां से एक आक्रोश जुलूस निकाला गया जो शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए सिपाही चौक तक पहुंचा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मार्च जब सिपाही चौक पर पहुंचा, तो प्रदर्शनकारियों ने वहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। इस प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन की भी सांसें अटका दी थीं, जिसे संभालने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था।
मतदाता सूची से नाम हटाने का गंभीर आरोप
प्रदर्शन का मुख्य केंद्र मतदाता सूची (Voter List) में कथित गड़बड़ी और बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने का मुद्दा रहा। महागठबंधन के नेताओं ने आरोप लगाया कि सोची-समझी रणनीति के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें उनके संवैधानिक मताधिकार से वंचित किया जा सके।
- मताधिकार पर हमला: नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद वोट डालने के अधिकार पर टिकी है और इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ असहनीय है।
- निष्पक्ष जांच की मांग: मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- पारदर्शिता की गुहार: चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई।
केंद्र सरकार और महंगाई-बेरोजगारी के मुद्दे पर तीखा हमला
केवल चुनाव आयोग ही नहीं, बल्कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और वरिष्ठ भाजपा नेतृत्व को भी निशाने पर लिया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि देश के संसाधनों का लाभ केवल कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों को मिल रहा है, जबकि आम आदमी महंगाई की मार और बेरोजगारी के दलदल में फंसता जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश की जनता अब सब कुछ समझ रही है और आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीकों से इसका करारा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता अपने अधिकारों के हनन को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगी।
प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद
महागठबंधन के इस उग्र प्रदर्शन को देखते हुए निर्मली प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। शहर के हर चौक-चौराहे और संवेदनशील स्थानों पर मजिस्ट्रेट की निगरानी में सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारी लगातार जुलूस के साथ रहे और स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
सुपौल में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूचियों के प्रबंधन को राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इस मामले को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहा है।