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आसमान छूने वाली बुर्ज खलीफा जमीन के अंदर कितनी धंसी है? जवाब कर देगा हैरान

आसमान छूने वाली बुर्ज खलीफा जमीन के अंदर कितनी धंसी है? जवाब कर देगा हैरान

जब भी दुनिया की सबसे ऊंची और आलीशान इमारतों का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम दुबई के 'बुर्ज खलीफा' (Burj Khalifa) का आता है। बादलों को चीरती हुई यह इमारत 828 मीटर यानी करीब 2,716 फीट ऊंची है। इसकी भव्यता और ऊंचाई को देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जमीन से ऊपर आसमान की ऊंचाइयों को छूने वाली यह इमारत जमीन के अंदर कितनी गहराई तक टिकी हुई है?

किसी भी इमारत की मजबूती उसकी नींव पर टिकी होती है। कहा जाता है कि इमारत जितनी ऊंची होगी, उसकी जड़ें उतनी ही मजबूत और गहरी होनी चाहिए। आज हम आपको बुर्ज खलीफा के उस राज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि रेगिस्तान की रेतीली जमीन पर इतनी विशालकाय इमारत को कैसे खड़ा किया गया।

रेगिस्तान की रेत पर कैसे टिका है बुर्ज खलीफा?

दुबई का इलाका मुख्य रूप से रेगिस्तानी है, जहां की जमीन पारंपरिक रूप से पक्की नहीं मानी जाती है। ऐसे में 5 लाख टन से ज्यादा वजन वाली इस इमारत को रेत पर खड़ा करना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं था। अगर सामान्य निर्माण की बात की जाए, तो इतनी भारी इमारत के लिए चट्टानी जमीन की जरूरत होती है। लेकिन इंजीनियरों ने अपनी सूझबूझ से नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया।

इंजीनियरिंग की भाषा में कहें तो बुर्ज खलीफा पारंपरिक अर्थों में जमीन के बहुत अंदर तक नहीं धंसी है, बल्कि इसका फाउंडेशन सिस्टम पूरी तरह से अलग और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है।

जमीन के अंदर कितनी गहराई तक जाती है नींव?

आमतौर पर लोगों को लगता है कि बुर्ज खलीफा जमीन के अंदर सैकड़ों फीट नीचे तक गई होगी। हालांकि, इसकी सही गहराई और तकनीकी आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बुर्ज खलीफा की नींव जमीन के अंदर लगभग 50 मीटर (यानी करीब 164 फीट) की गहराई तक बनाई गई है। यह गहराई एक 15 से 20 मंजिल की इमारत के बराबर होती है।

लेकिन सिर्फ गहराई ही नहीं, बल्कि इसका बेस जिस तकनीक पर काम करता है, वही इसकी असली ताकत है। इस इमारत को थामने के लिए जमीन के अंदर 192 विशेष पाइल्स या पिलर्स का इस्तेमाल किया गया है।

पाइल फाउंडेशन का कमाल

बुर्ज खलीफा को थामने के लिए 'फ्रिक्शन पाइल्स' (Friction Piles) तकनीक का सहारा लिया गया है। इसके तहत:

  • जमीन के अंदर 1.5 मीटर व्यास (Diameter) वाले कुल 192 स्टील और कंक्रीट के खंभे गाड़े गए हैं।
  • ये सभी खंभे लगभग 50 मीटर की गहराई तक नीचे जाते हैं।
  • इन खंभों को किसी सख्त चट्टान पर टिकाने के बजाय, रेगिस्तान की रेत और मिट्टी के साथ होने वाले घर्षण (Friction) के सहारे खड़ा किया गया है।
  • इतनी बड़ी संख्या में लगे पाइल्स मिलकर पूरी इमारत के भारी-भरकम वजन को संतुलित करते हैं।

मजबूत राफ्ट स्लैब का इस्तेमाल

पाइल फाउंडेशन के ऊपर 3.7 मीटर (लगभग 12 फीट) मोटा कंक्रीट का एक बेहद मजबूत राफ्ट स्लैब बिछाया गया है। इस राफ्ट को बनाने में विशेष प्रकार के कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है, जो अत्यधिक दबाव को झेल सकता है। यही कारण है कि रेगिस्तान की रेतीली और कमजोर दिखने वाली जमीन भी आज दुनिया की सबसे वजनी और लंबी इमारत का भार आसानी से उठा रही है।

तेज हवाओं और भूकंप से कैसे मुकाबला करती है इमारत?

इतनी अधिक ऊंचाई पर हवा का दबाव बहुत ज्यादा होता है। इसके अलावा भूकंप के झटकों का भी खतरा बना रहता है। इन सब चुनौतियों से निपटने के लिए बुर्ज खलीफा का डिजाइन एरोडायनामिक (Aerodynamic) तैयार किया गया है, ताकि हवा इसके चारों तरफ से आसानी से निकल सके और स्ट्रक्चर पर दबाव कम पड़े। इसकी नींव और ऊपरी ढांचा मिलकर इसे किसी भी प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित रखते हैं।

निष्कर्ष तौर पर कहा जा सकता है कि बुर्ज खलीफा केवल अपनी ऊंचाई के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी और मजबूत नींव की इंजीनियरिंग के लिए भी पूरी दुनिया में मिसाल बनी हुई है।


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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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