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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जल्द होगी मुहर, वाणिज्य सचिव ने दिए बड़े संकेत

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जल्द होगी मुहर, वाणिज्य सचिव ने दिए बड़े संकेत

नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच आर्थिक कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर स्थिति अब काफी हद तक साफ होने लगी है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित यह समझौता लगभग अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। हालांकि, कुछेक तकनीकी और रणनीतिक बिंदुओं पर दोनों पक्षों के बीच अभी बातचीत का दौर जारी है, जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

अंतिम चरण में है भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

वाणिज्य सचिव ने यह महत्वपूर्ण बयान देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में आयोजित बहुचर्चित ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ के एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए दिया। उनके इस बयान ने भारतीय व्यापारिक जगत और वैश्विक बाजारों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। जानकारों का मानना है कि इस समझौते के धरातल पर उतरने से दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यावसायिक रिश्ते एक नए आयाम पर पहुंचेंगे।

राजेश अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि जब दो बड़े लोकतांत्रिक देश किसी बड़े व्यापारिक समझौते को अंतिम रूप देते हैं, तो दोनों पक्षों के हितों को साधना बेहद जरूरी होता है। वर्तमान में जो मामूली मतभेद या चर्चा के बिंदु बचे हैं, उन पर दोनों देशों के कूटनीतिक और व्यापारिक दल पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रहे हैं। उचित समय आने पर इस समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे।

सेवा क्षेत्र के निर्यात में विविधता लाने पर जोर

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के मंच से वाणिज्य सचिव ने केवल व्यापार समझौते तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि भारतीय उद्योगों के भविष्य के रोडमैप पर भी खुलकर चर्चा की। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था और विशेषकर सर्विस सेक्टर को लेकर एक बड़ी चेतावनी के साथ-साथ सुझाव भी साझा किए।

उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि देश की आर्थिक वृद्धि को लंबी अवधि तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए अब पारंपारिक तरीकों से आगे सोचना होगा। भारतीय उद्योग जगत को केवल सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), आईटी आधारित सेवाओं (ITES) और कुछ गिने-चुने पेशेवर क्षेत्रों पर ही अपनी निर्भरता खत्म करनी होगी। अब वक्त आ गया है कि भारत अपने सेवा निर्यात (Service Export) के दायरे को और अधिक विस्तृत और विविध बनाए।

वैश्विक वित्तीय बाजार में भारत की वर्तमान स्थिति

अपने संबोधन के दौरान वाणिज्य सचिव ने कुछ ऐसे चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे, जो नीति निर्माताओं और उद्योगपतियों के लिए मंथन का विषय हैं। उन्होंने वैश्विक वित्तीय सेवा क्षेत्र के विशाल आकार का जिक्र करते हुए भारत की मौजूदा हिस्सेदारी पर रोशनी डाली:

  • वैश्विक वित्तीय सेवा बाजार का आकार: लगभग 670 अरब अमेरिकी डॉलर।
  • भारत की हिस्सेदारी: मात्र 8 अरब अमेरिकी डॉलर।
  • प्रतिशत के हिसाब से: वैश्विक व्यापार का केवल एक फीसदी से कुछ ही अधिक।

इन आंकड़ों से साफ है कि वैश्विक स्तर पर वित्तीय सेवाओं का बाजार कितना बड़ा है और भारत के पास इसमें अपनी पैठ मजबूत करने की कितनी अपार संभावनाएं अभी भी बाकी हैं।

फिनटेक सेक्टर और भविष्य की चुनौतियां

वर्ष 2026 के इस दौर में जहां तकनीक और वित्त का मिश्रण सबसे तेजी से बढ़ रहा है, भारत के फिनटेक स्टार्टअप्स ने दुनिया भर में अपनी धाक जमाई है। इसके बावजूद, वित्तीय सेवाओं के पारंपरिक और संस्थागत वैश्विक बाजार में भारत को अभी लंबी दूरी तय करनी है। वाणिज्य सचिव का यह संदेश साफ था कि देश के तकनीकी युवाओं और वित्तीय दिग्गजों को अब केवल घरेलू बाजार या बेसिक आईटी प्रोजेक्ट्स से संतुष्ट होने के बजाय ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए आक्रामक रणनीति अपनानी होगी।

आर्थिक गलियारों में बढ़ी हलचलवाणिज्य सचिव के इन बignon के बाद से देश के व्यापारिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। जानकारों का अनुमान है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लागू होने के बाद, विशेष रूप से तकनीक, फिनटेक, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच का रास्ता और अधिक सुगम हो जाएगा। अमेरिकी निवेशकों और भारतीय सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए यह समझौता मील का पत्थर साबित हो सकता है।

आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रालयों के बीच होने वाली बैठकों पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। उम्मीद की जा रही है कि सभी बची हुई औपचारिकताओं को पूरा कर जल्द ही इस ऐतिहासिक समझौते की तारीख का औपचारिक ऐलान किया जाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार मानचित्र पर भारत की स्थिति और अधिक मजबूत होगी।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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