उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में अघोर पीठ रामगढ़ के प्रांगण में बाबा कीनाराम का 427वां जन्मोत्सव इस वर्ष बेहद भव्य और दिव्य रूप में आयोजित होने जा रहा है। इस धार्मिक और सांस्कृतिक महाकुंभ को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। हाल ही में जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने आयोजन स्थल का दौरा कर व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की और मातहतों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। लाखों की संख्या में देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता पर रखते हुए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।
10 से 12 सितंबर तक चलेगा भव्य जन्मोत्सव समारोह
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह तीन दिवसीय अनुष्ठानिक और सांस्कृतिक समारोह आगामी 10 सितंबर से शुरू होकर 12 सितंबर तक रामगढ़ स्थित मुख्य प्रांगण में चलेगा। इस दौरान बाबा कीनाराम के जीवन दर्शन, उनके उपदेशों और लोक कल्याणकारी कार्यों पर आधारित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जन्मोत्सव के इन तीन दिनों में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और देश के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में अघोर पंथ के अनुयायी और श्रद्धालु रामगढ़ पहुंचना शुरू हो चुके हैं।
श्रद्धालुओं के सैलाब को देखते हुए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। आयोजनों के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले, इसके लिए स्थानीय प्रशासन पल-पल की अपडेट ले रहा है।जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने संभाली कमान
कानून-व्यवस्था और जनसुविधाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए चंदौली के जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग और पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने संयुक्त रूप से रामगढ़ मेला क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारियों ने मेला परिसर के चप्पे-चप्पे का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मंच स्थल, पार्किंग जोन, बैरिकेडिंग और श्रद्धालुओं के आने-जाने वाले रास्तों का बारीकी से मुआयना किया।
अधिकारियों ने संबंधित विभागों के विभागाध्यक्षों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की, जिसमें स्पष्ट शब्दों में यह निर्देश दिया गया कि सौंपी गई जिम्मेदारियों में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से दर्शन करे और सुगम व्यवस्था के साथ अपने गंतव्य को लौटे।
बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर: 24 घंटे बिजली और पानी
भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं के मोर्चे पर चाक-चौबंद व्यवस्था की है। डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने ऊर्जा विभाग और जल निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि:
- बिजली आपूर्ति: मेला क्षेत्र और आसपास के मार्गों पर पूरे तीन दिन यानी 24 घंटे अनवरत बिजली आपूर्ति बहाल रखी जाए। इसके लिए वैकल्पिक जनरेटर सेट की भी व्यवस्था करने को कहा गया है।
- पेयजल प्रबंधन: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जगह-जगह शुद्ध पेयजल के टैंकर और वाटर कियोस्क लगाए गए हैं।स्वच्छता अभियान: नगर पंचायत और स्वच्छता विभाग की टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर दो घंटे पर मेला परिसर की सफाई सुनिश्चित करें ताकि किसी प्रकार की गंदगी या संक्रामक बीमारियों का खतरा न उत्पन्न हो।
सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम और ड्यूटी पॉइंट
सुरक्षा के मोर्चे पर पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने बेहद सख्त तेवर दिखाए हैं। उन्होंने पुलिस बल की तैनाती को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी निर्धारित ड्यूटी पॉइंट पर पुलिसकर्मियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जिसके प्रभारी राजपत्रित अधिकारियों (gazetted officers) को बनाया गया है।
सादे कपड़ों में भी पुलिस बल तैनात रहेगा ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखी जा सके। इसके अलावा, यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है और उनके लिए अलग से पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं।
चिकित्सा सुविधा, एम्बुलेंस और खोया-पाया केंद्र सक्रिय
आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। मेला परिसर में ही एक अस्थायी अस्पताल और नियंत्रण कक्ष (Control Room) स्थापित किया गया है, जहां डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें चौबीसों घंटे तैनात रहेंगी।
किसी भी चिकित्सीय आपातकाल से तुरंत निपटने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों से लैस एम्बुलेंस को मौके पर मुस्तैद रखा गया है। इसके अलावा, मेले की भीड़भाड़ में अपनों से बिछड़ने वाले लोगों की मदद के लिए 'खोया-पाया केंद्र' (Lost and Found Centre) भी बनाया गया है, जहां से लगातार सार्वजनिक घोषणाएं की जाएंगी।
सुरक्षा कारणों से मेले में झूले के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध
इस बार के जन्मोत्सव मेले में एक बड़ा बदलाव सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। वर्तमान मौसम के मिजाज और संभावित सुरक्षा जोखिमों का आकलन करने के बाद जिला प्रशासन ने मेला परिसर में किसी भी प्रकार के झूले के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। प्रशासन का मानना है कि अस्थाई झूलों से किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए जनहित में यह कड़ा निर्णय लिया गया है।
आपात स्थिति के लिए अग्निशमन वाहन मुस्तैद
किसी भी अप्रत्याशित अग्नि दुर्घटना या शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं से तुरंत निपटने के लिए दमकल विभाग (Fire Services) की गाड़ियों को रणनीतिक स्थानों पर खड़ा किया गया है। अग्निशमन कर्मियों को भी पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।
एसपी की दो टूक: लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने पुलिस बल और प्रशासनिक कर्मियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि ड्यूटी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी ड्यूटी पॉइंट से कर्मचारी नदारद पाए गए या उनके स्तर से कोई चूक हुई, तो संबंधित के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की इस मुस्तैदी और कड़े प्रबंधों से उम्मीद जताई जा रही है कि बाबा कीनाराम का यह 427वां जन्मोत्सव शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और भव्य तरीके से संपन्न होगा, जिससे आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।