राजनीतिक सरगर्मियों के बीच शुक्रवार को चंडीगढ़ की सड़कों पर उस समय भारी तनाव देखने को मिला, जब कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग (CEC) और वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा राव नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और नेता चंडीगढ़ में एकत्र हुए थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पानी की बौछारें (वाटर कैनन) का सहारा लेना पड़ा।
चंडीगढ़ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और प्रदर्शन की रूपरेखा
सितंबर 2026 के इस गर्म माहौल में राजनीतिक दलों की गतिविधियां चरम पर हैं। शुक्रवार को पूर्वाह्न से ही चंडीगढ़ की सीमाओं और प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल की भारी तैनाती कर दी गई थी। कांग्रेस नेताओं का यह मार्च पूर्व निर्धारित था, जिसका मुख्य उद्देश्य निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और हालिया राजनीतिक मुद्दों पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराना था। जैसे ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम तयशुदा मार्ग से आगे बढ़ा, सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर रखी थी।
कार्यकर्ताओं ने जब बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति को बेकाबू होते देख प्रशासन ने तुरंत वाटर कैनन (पानी की तेज बौछारें) का इस्तेमाल किया, ताकि भीड़ को तितर-बितर किया जा सके। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं और नेताओं के कपड़े भीग गए, लेकिन उनका जोश कम नहीं हुआ और वे लगातार नारेबाजी करते रहे।
राव नरेंद्र सिंह और भूपेंद्र हुड्डा की अगुवाई
इस पूरे प्रदर्शन की कमान राज्य के कद्दावर नेताओं भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राव नरेंद्र सिंह ने संभाल रखी थी। हुड्डा ने मौके पर मौजूद मीडिया और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि जनता के अधिकारों की आवाज को दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जो दबाव बनाया जा रहा है, वह देश के संविधान के अनुकूल नहीं है।
वहीं, राव नरेंद्र सिंह ने भी प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक और राजनीतिक दल का मौलिक अधिकार है, लेकिन सरकार और प्रशासन तानाशाही रवैया अपनाते हुए पुलिस बल के दम पर आवाज को कुचलना चाहते हैं। नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनका यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक जनता को उनका हक और पारदर्शी व्यवस्था नहीं मिल जाती।
नेताओं की हिरासत और थाने ले जाया जाना
प्रदर्शन के उग्र रूप धारण करने के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन कदम उठाया। पुलिस ने हुड्डा और राव नरेंद्र सिंह समेत कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। सभी हिरासत में लिए गए नेताओं को बसों में भरकर नजदीकी पुलिस लाइन और थानों में ले जाया गया।
- प्रमुख हिरासतें: भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राव नरेंद्र सिंह और कई जिला स्तरीय पदाधिकारी।
- कार्रवाई का तरीका: बैरिकेडिंग तोड़ रहे कार्यकर्ताओं पर वाटर कैनन का प्रयोग।
- मौजूदा स्थिति: थानों के बाहर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा जारी, स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में।
हिरासत में लिए जाने के बाद भी नेताओं के तेवर ढीले नहीं पड़े। पुलिस थानों के बाहर भी बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता पहुंच गए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे अपने नेताओं की गिरफ्तारी से डरने वाले नहीं हैं और जनता के मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई जारी रखेंगे।
राजनीतिक गलियारों में हलचल और इसके मायने
चंडीगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में उबाल ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शन आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को बड़ा आकार दे सकते हैं। चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस का यह रुख सीधे तौर पर विपक्ष की आक्रामक रणनीति का हिस्सा है, जो जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने और सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती।
फिलहाल, शहर के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है, वहीं कांग्रेस नेतृत्व अपनी अगली रणनीति तय करने के लिए बंद कमरे में बैठकें कर रहा है। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद राज्य की राजनीति में गर्मी और बढ़ने के पूरे आसार हैं।