वाराणसी और आसपास के इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कड़ी में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पड़ाव क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चौरहट से डोमरी तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण परियोजना ने अब रफ्तार पकड़ ली है। बुधवार को इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण), वन विभाग और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश और सत्यापन का काम शुरू कर दिया है। इस संयुक्त सर्वे के शुरू होते ही सड़क के दायरे में आने वाले दुकानदारों और मकान मालिकों के बीच हलचल तेज हो गई है।
अभिलेखों के आधार पर हुआ भूमि का सत्यापन
बुधवार को सुबह से ही प्रशासनिक अमले और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम चौरहट से डोमरी मार्ग पर सक्रिय नजर आई। अधिकारियों ने पुराने राजस्व अभिलेखों को आधार बनाकर जमीन की पैमाइश की। इस दौरान यह बारीकी से जांच की गई कि प्रस्तावित सड़क के दायरे में कौन-कौन सी जमीन आ रही है। टीम ने यह भीखाका तैयार किया कि जद में आने वाली भूमि पूरी तरह से सरकारी है, वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है या फिर किसी निजी व्यक्ति की कृषि योग्य भूमि है।
मौके पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, इस संयुक्त निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य परियोजना के रास्ते में आने वाली हर एक अड़चन और तकनीकी पहलुओं को पहले ही भांप लेना है। अधिकारियों ने भूमि के स्वामित्व, उसकी वर्तमान प्रकृति और विभागीय अधिकार क्षेत्र का गहनता से अवलोकन किया। इस प्रक्रिया से भविष्य में भूमि अधिग्रहण और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) हासिल करने की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी।
गंगा किनारे के एलिवेटेड रोड से जुड़ेगा नया फोरलेन
इस पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा काफी अहम है। जानकारों के मुताबिक, चौरहट से डोमरी तक बनने वाले इस नए फोरलेन को सीधे तौर पर गंगा किनारे निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड से जोड़े जाने की योजना है। इस कनेक्टिविटी के बन जाने से यातायात व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। वाराणसी और इसके आसपास के इलाकों में सफर करने वाले लाखों लोगों को भारी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही, माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को भी एक नया आयाम मिलेगा।
हालांकि, इस बड़े विकास कार्य के साथ ही स्थानीय स्तर पर चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं। पैमाइश की खबर मिलते ही सड़क के दोनों छोर पर बने मकानों, दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मालिकों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। लोगों को इस बात का डर सता रहा है कि सड़क चौड़ीकरण की इस जद में उनके आशियाने या दुकानें आ सकती हैं।
कौन-कौन अधिकारी रहे मौजूद?
इस हाई-लेवल सर्वे और स्थलीय निरीक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी मौके पर डटे रहे। टीम में मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारी शामिल थे:
- एनएचएआई (NHAI): प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर गगन विदुड़ी, मैनेजर टेक देवदत्त और अश्वनी सिंह
- वन विभाग (Forest Department): रेंजर राजकुमार गौतम और पवन सिंह
- रेलवे (Railway): तकनीकी प्रतिनिधि अश्वनी कुमार
इन सभी अधिकारियों ने मिलकर मौके की जमीनी हकीकत को परखा और आपस में प्रशासनिक तथा तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
विकास और जनजीवन का संतुलन
किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के आने से क्षेत्र का आर्थिक विकास तो तेजी से होता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर विस्थापन या अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। चौरहट-डोमरी फोरलेन प्रोजेक्ट को लेकर भी यही स्थिति बनती दिख रही है। प्रशासन की प्राथमिकता जहां तय समयसीमा में प्रोजेक्ट को पूरा करने की है, वहीं स्थानीय व्यापारी और निवासी अपनी आजीविका और संपत्तियों को लेकर आशंकित हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि प्रशासन इन तमाम चुनौतियों से कैसे निपटता है और क्या प्रभावित होने वाले लोगों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है या नहीं। फिलहाल, इस पैमाइश के बाद क्षेत्र में सरगर्मी काफी बढ़ गई है और हर किसी की नजरें आगे आने वाले प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं।