छत्तीसगढ़ के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने प्रशासनिक फेरबदल के तहत बड़े पैमाने पर तबादला आदेश जारी किए हैं। राज्य शासन द्वारा जारी इन आदेशों के दायरे में कुल 41 अधिकारी आए हैं, जिनमें खाद्य अधिकारी, सहायक खाद्य अधिकारी और खाद्य निरीक्षक शामिल हैं। राज्यपाल के नाम से उप सचिव स्तर के अवर सचिव द्वारा ये आदेश जारी किए गए हैं।
विभाग द्वारा जारी कुल तीन अलग-अलग आदेशों के माध्यम से इन प्रशासनिक बदलावों को अमलीजामा पहनाया गया है। पहले चरण के आदेश में चार खाद्य अधिकारियों के तबादले समन्वय में अनुमोदन के बाद किए गए। इनमें से दो अधिकारियों को संचालनालय, नवा रायपुर से विभिन्न जिलों में भेजा गया है। एक अन्य अधिकारी को बलरामपुर-रामानुजगंज से स्थानांतरित कर सारंगढ़-बिलाईगढ़ पदस्थ किया गया है, जबकि सारंगढ़-बिलाईगढ़ में तैनात एक अधिकारी को वापस संचालनालय, नवा रायपुर में लाया गया है।
निरीक्षकों और सहायक खाद्य अधिकारियों की नई पदस्थापना
तथ्यों के अनुसार, तबादला सूची का सबसे बड़ा हिस्सा खाद्य निरीक्षकों का है, जिसमें कुल 29 निरीक्षकों को नए जिलों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस फेरबदल के तहत दो निरीक्षकों को संचालनालय नवा रायपुर में पदस्थ किया गया है। इस सूची में एक संशोधन भी किया गया है, जिसके तहत पहले जिस निरीक्षक को बस्तर भेजने के निर्देश थे, उसे संशोधित करके जांजगीर-चांपा जिला आवंटित किया गया है। यह आदेश 25 अक्टूबर को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी किया गया था।
इसके अतिरिक्त, आठ सहायक खाद्य अधिकारियों के तबादले भी किए गए हैं। इस श्रेणी में एक अधिकारी का पदस्थापना प्रस्ताव संशोधित करते हुए सूरजपुर के स्थान पर महासमुंद किया गया है।
एकपक्षीय कार्यमुक्ति और समयसीमा के निर्देश
प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, जिन सहायक खाद्य अधिकारियों ने अब तक अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया था, उनके संबंध में कड़ा रुख अपनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के 25 नवंबर 2024 के परिपत्र के प्रावधानों का हवाला देते हुए इन अधिकारियों को 30 अक्टूबर को एकपक्षीय रूप से कार्यमुक्त कर दिया गया।
शासन के निर्देशानुसार, इन अधिकारियों को हर हाल में 2 नवंबर 2026 तक अपनी नई पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होगा और इसके बाद विभाग को पालन प्रतिवेदन सौंपना होगा। विभाग के स्पष्ट निर्देशों में कहा गया है कि निर्धारित समय पर नई जगह कार्यभार न संभालने वाले अधिकारी एकतरफा भारमुक्त माने जाएंगे। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों को अगले महीने का वेतन तभी मिलेगा, जब वे नई पदस्थापना पर आधिकारिक रूप से कार्यभार ग्रहण कर लेंगे। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित जिलों के कोषालय अधिकारियों को भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।