बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहे ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में दूसरे दिन शनिवार को राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। खराब मौसम, अंधेरे और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शुक्रवार को जो टीमें घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाई थीं, वे शनिवार तड़के ही क्रैश साइट के लिए रवाना हो गईं।
उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर से मिली जानकारी के अनुसार, मौसम साफ होते ही राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और स्थानीय पुलिस के संयुक्त दल ने कठिन ट्रैकिंग के बाद दुर्घटना स्थल तक पहुंच बनाई। दुर्गम पहाड़ियों और खड़े ढलानों के कारण शवों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की जांच शुरू
हादसे के कारणों की तकनीकी और आधिकारिक जांच के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की टीम सक्रिय हो गई है। डीजीसीए की जांच टीम ने दुर्घटना स्थल का हवाई सर्वेक्षण किया है। यह हेलीकॉप्टर बदरीनाथ धाम से उड़ान भरकर देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड के लिए निकला था, लेकिन रास्ते में पांडुकेश्वर के पास दुर्घटना का शिकार हो गया।
दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोग
इस भीषण हादसे में विमान के पायलट (जो दिल्ली के रहने वाले थे) और कर्नाटक से आए पांच तीर्थयात्रियों समेत कुल छह लोगों की मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार, कर्नाटक से आए ये पांचों यात्री बदरीनाथ धाम के दर्शन करने के बाद भारत के अंतिम गांव माणा के धार्मिक स्थलों का दीदार करने भी गए थे। हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के परिजन शनिवार को बदरीनाथ धाम पहुंच रहे हैं।
उत्तराखंड में विमान सुरक्षा और पूर्व हादसे
इस ताजा दुर्घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में विमानन सुरक्षा और पूर्व में हुई ऐसी घटनाओं के प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड में इससे पहले भी हेलीकॉप्टर हादसों से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनकी जांच रिपोर्टों और सुरक्षा मानकों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं होती रही हैं। फिलहाल प्रशासन की पहली प्राथमिकता सभी शवों को सुरक्षित नीचे लाने और दुर्घटना के असल कारणों का पता लगाने की है।