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मेडिकल स्टोर में चल रहा था खतरनाक खेल? मरीज को इंजेक्शन लगाते वीडियो वायरल

मेडिकल स्टोर में चल रहा था खतरनाक खेल? मरीज को इंजेक्शन लगाते वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मेडिकल स्टोर के भीतर मरीजों के इलाज का अवैध खेल सरेआम चल रहा था। इस पूरे मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य और ड्रग विभाग हरकत में आ गया है और मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी गई है।

अमलीपदर का वायरल वीडियो बना चर्चा का विषय

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला गरियाबंद जिले के अंतर्गत आने वाले अमलीपदर क्षेत्र का है। मेडिकल स्टोर जैसी जगहों पर केवल डॉक्टर की पर्ची के आधार पर दवाइयां बेची जानी चाहिए, लेकिन वायरल हो रहे वीडियो में कुछ और ही तस्वीर बयां हो रही है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक मेडिकल स्टोर के अंदर किस तरह खुलेआम एक मरीज को इंजेक्शन लगाया जा रहा है, जो सीधे तौर पर नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है।

यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों का कहना है कि झोलाछाप या बिना अनुमति के मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा इस तरह मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करना एक गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों पर अगर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो यह किसी की भी जान के लिए भारी पड़ सकता है.

स्वास्थ्य और ड्रग विभाग ने लिया कड़ा संज्ञान

वीडियो के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और ड्रग विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि वीडियो किस मेडिकल स्टोर का है और वहां असल में क्या चल रहा था।

  • जांच के मुख्य बिंदु: मेडिकल स्टोर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं।
  • दवा दुकान के भीतर चिकित्सकीय उपचार (इलाज और इंजेक्शन) देने की अनुमति थी या नहीं।
  • दोषी पाए जाने पर संचालक के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की चेतावनी: बख्शे नहीं जाएंगे दोषी

विभाग के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में मेडिकल स्टोर संचालक दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल स्टोर का लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ दुकान को सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा है अवैध इलाज का खतरा

यह अकेली ऐसी घटना नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के कई दूरदराज ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में अक्सर इस तरह की खबरें सामने आती रहती हैं जहाँ मेडिकल स्टोर संचालक ही खुद को डॉक्टर समझ बैठते हैं। झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध रूप से क्लीनिक या मेडिकल स्टोर में इलाज करने वालों का यह नेटवर्क आम जनता की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है। लोग कम खर्च या डॉक्टर के पास जाने से बचने के चक्कर में ऐसी जगहों पर चले जाते हैं, जो कई बार जानलेवा साबित हो जाता है।

निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई

फिलहाल, गरियाबंद के इस बहुचर्चित वीडियो ने एक बार फिर से स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल स्टोर्स की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय जांच टीम अमलीपदर पहुंच चुकी है और दुकान के दस्तावेजों तथा वहां के हालातों की बारीकी से पड़ताल कर रही है। देखना यह होगा कि इस जांच के बाद प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

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नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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