सोते वक्त 10 छात्राओं की कटी चोटियां, हॉस्टल में मचा हड़कंप; CCTV ने खोली पोल
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सोते वक्त 10 छात्राओं की कटी चोटियां, हॉस्टल में मचा हड़कंप; CCTV ने खोली पोल

सोते वक्त 10 छात्राओं की कटी चोटियां, हॉस्टल में मचा हड़कंप; CCTV ने खोली पोल

नींद खुली तो उड़े होश: सुबह-सुबह हॉस्टल में मची अफरा-तफरी

सितंबर 2026 के इस दौर में तकनीक और विज्ञान कितनी भी तरक्की कर लें, लेकिन आज भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आ जाती हैं जो लोगों को सदमे में डाल देती हैं। उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान के गर्ल्स हॉस्टल में कुछ ऐसा ही वाकया घटा, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। रात के सन्नाटे में जब हॉस्टल की छात्राएं गहरी नींद में सो रही थीं, तब किसी अज्ञात या जानी-पहचानी ताकत ने एक के बाद एक 10 छात्राओं की चोटियां (बाल) काट दीं। सुबह जब सूरज की पहली किरण के साथ छात्राओं की आंख खुली, तो उन्होंने अपने कटे हुए बालों को बिस्तर पर बिखरा पाया। इस दृश्य को देखते ही हॉस्टल परिसर में चीख-पुकार मच गई और कुछ ही पलों में सनसनी फैल गई।

मामला गंभीर था क्योंकि यह सीधे तौर पर छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल की प्रबंधकीय व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा था। सुबह होते ही हॉस्टल वॉर्डन, सुरक्षा गार्ड और कॉलेज प्रशासन के तमाम अधिकारी मौके पर पहुंच गए। किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर सुरक्षा के इतने कड़े पहरे के बावजूद कोई बाहरी शख्स हॉस्टल के कमरों तक कैसे पहुंच गया और उसने सिर्फ बाल काटने की इस अजीबोगरीब हरकत को क्यों अंजाम दिया?

शुरुआती शक और डर का माहौल

घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। शुरुआती दौर में हर किसी के मन में यही ख्याल आया कि शायद कोई सिरफिरा या चोर हॉस्टल परिसर में घुस आया है। छात्राओं के अभिभावकों को जब इस बारे में पता चला, तो उनकी चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच गईं। माता-पिता तुरंत हॉस्टल के बाहर जमा होने लगे और प्रशासन से अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर कड़े सवाल करने लगे।

हॉस्टल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को ताक पर रखकर इस तरह की घटना को अंजाम देना किसी बड़ी अनहोनी का संकेत लग रहा था। कुछ छात्राओं का यह भी कहना था कि उन्हें रात के वक्त कुछ आहट महसूस हुई थी, लेकिन उन्होंने इसे महज वहम समझकर नजरअंदाज कर दिया था। डर इतना ज्यादा था कि कई छात्राओं ने तुरंत हॉस्टल छोड़कर अपने घर जाने का मन बना लिया। हालात को बिगड़ते देख स्थानीय पुलिस को तुरंत सूचना दी गई और पुलिस दल ने मौके पर पहुंचकर मामले की गहन छानबीन शुरू कर दी।

पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज की एंट्री

पुलिस ने जब मामले की तह तक जाने के लिए हॉस्टल के गलियारों और कमरों के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों (CCTV Footage) की फुटेज खंगालनी शुरू की, तो जांच का दायरा पूरी तरह से बदल गया। पुलिस अधिकारियों को उम्मीद थी कि फुटेज में कोई संदिग्ध बाहरी शख्स कैद हुआ होगा जो रात के वक्त चुपके से हॉस्टल में दाखिल हुआ हो।

लेकिन, जब साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की टीम ने घंटों तक फुटेज की एक-एक फ्रेम की बारीकी से जांच की, तो उनके होश उड़ गए। कैमरे में कोई भी बाहरी व्यक्ति हॉस्टल की चारदीवारी फांदकर अंदर आते हुए दिखाई नहीं दिया। न तो मुख्य गेट का ताला टूटा था और न ही किसी खिड़की से छेड़छाड़ के निशान मिले थे। इसके बाद पुलिस का शक हॉस्टल के अंदरूनी सिस्टम और खुद वहां रहने वालों पर गहराने लगा।

सीसीटीवी ने खोली पोल: सामने आया चौंकाने वाला सच

जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज का दायरा बढ़ाया और कैमरों की एंगल की मैपिंग की, तो जो सच सामने आया उसने सबको अवाक कर दिया। किसी बाहरी भूत, प्रेत या चोर का यह कारनामा नहीं था, बल्कि इसके पीछे का सच बेहद अजीब और मनोवैज्ञानिक स्तर पर हैरान करने वाला था।

जांच में यह बात सामने आई कि हॉस्टल के अंदर ही कुछ ऐसा घटित हो रहा था जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। हालांकि पुलिस इस मामले में अभी आधिकारिक तौर पर पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह पूरी घटना किसी सोची-समझी शरारत या सामूहिक मानसिक तनाव (Mass Hysteria) का परिणाम प्रतीत हो रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी अ अंदेशा जताया जा रहा है कि शायद हॉस्टल की ही कुछ छात्राओं ने पब्लिसिटी पाने या डर का माहौल पैदा करने के लिए इस अजीब हरकत को अंजाम दिया हो।

प्रशासन और मनोवैज्ञानिकों की राय

इस प्रकार की घटनाएं हमारे समाज में छिपी मनोवैज्ञानिक समस्याओं और किशोर उम्र के बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलावों को उजागर करती हैं। शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि टीन एज या हॉस्टल लाइफ में रहने वाले छात्र-छात्राएं कई बार अत्यधिक दबाव, होमसिकनेस (घर की याद) या फिर आपस में किसी प्रैंक (मजाक) के चक्कर में ऐसी अजीबोगरीब हरकतों को अंजाम दे बैठते हैं, जो बाद में एक बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं।

  • सुरक्षा पर उठे सवाल: भले ही मामला अंदरूनी शरारत का निकला हो, लेकिन हॉस्टल के भीतर इस तरह की चीजें होना सुरक्षा प्रबंधों की पोल खोलता है।
  • मानसिक स्वास्थ्य की जरूरत: ऐसे मामलों से निपटने के लिए हॉस्टल परिसरों में नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाने चाहिए।
  • अंधविश्वास से बचाव: ग्रामीण या अर्ध-शहरी इलाकों में आज भी ऐसी घटनाओं को तंत्र-मंत्र या भूत-प्रेत से जोड़कर देखा जाता है, जिससे समाज में डर फैलता है।


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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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