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दतिया में शतरंज प्रतियोगिता का बुरा हाल: भूखे रहे बच्चे, गायब मिले जूते

दतिया में शतरंज प्रतियोगिता का बुरा हाल: भूखे रहे बच्चे, गायब मिले जूते

खेल के मैदान पर जहाँ बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और उनकी प्रतिभा को निखारने के दावे किए जाते हैं, वहीं जब व्यवस्था की लापरवाही सामने आती है तो पूरा सिस्टम कटघरे में खड़ा हो जाता है। मध्य प्रदेश के दतिया जिले में इन दिनों कुछ ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने खेल प्रेमियों और अभिभावकों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। यहाँ आयोजित 70वीं संभागीय शालेय शतरंज प्रतियोगिता में भाग लेने आए नन्हे-मुन्ने खिलाड़ी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते नजर आए। आरोप है कि ये मासूम बच्चे सुबह से लेकर शाम तक भूखे पेट बोर्ड पर चालें चलने को मजबूर रहे, वहीं उन्हें मिलने वाली खेल किट से जूते तक गायब मिले।

बुनियादी सुविधाओं के अभाव में फंसे मासूम खिलाड़ी

संभागीय स्तर के इस बड़े आयोजन में हिस्सा लेने के लिए दतिया के अलावा संभाग के अन्य कई जिलों से भी होनहार छात्र और खिलाड़ी पहुंचे थे। उम्मीद थी कि एक प्रतिष्ठित सरकारी आयोजन में बच्चों को हरसंभव सुविधा मिलेगी, ताकि वे पूरी एकाग्रता के साथ अपनी बौद्धिक क्षमता का प्रदर्शन कर सकें। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत निकली। आयोजन स्थल पर पहुंचते ही बच्चों को कुप्रबंधन का शिकार होना पड़ा। दिनभर मानसिक ऊर्जा खर्च करने वाले इन बच्चों को समय पर दो वक्त की रोटी तक मयसर नहीं हो पाई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चों के लिए तय समय पर भोजन की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। सुबह से खेल मुकाबलों में व्यस्त रहने वाले बच्चे दोपहर ढलने के बाद भी भोजन का इंतजार करते रहे। घंटों बीत जाने के बाद भी जब उन्हें कुछ खाने को नहीं मिला, तो उनकी परेशानी बढ़ती चली गई। खेल के दौरान ऊर्जा की कमी और परवान चढ़ती भूख ने इन नन्हे खिलाड़ियों की सुध लेने वाला कोई नहीं छोड़ा।

मीडिया के दखल के बाद जागा प्रशासन

इस पूरे मामले ने तूल तब पकड़ा जब स्थानीय मीडिया कर्मियों को इस गंभीर लापरवाही की भनक लगी। मीडिया के संज्ञान में मामला आने और इस पर सवाल उठाए जाने के बाद आयोजकों की नींद टूटी। शाम के वक्त जाकर कहीं इन खिलाड़ियों के लिए भोजन का इंतजाम हो पाया। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी आयोजनों में बच्चों की बुनियादी जरूरतों का ख्याल रखने के लिए हमेशा मीडिया के हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि सुबह से भूखे बच्चे शाम तक कैसे खेल पाएंगे?

अव्यवस्था का आलम यह था कि कई छोटे बच्चे भोजन मिलने से पहले ही नाउम्मीद होकर अपने घरों को लौट गए। लंबे सफर और बिना भोजन के वापस लौटने वाले इन बच्चों के चेहरों पर निराशा साफ झलक रही थी। उनके साथ आए अभिभावकों और खेल प्रेमियों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा और नाराजगी देखने को मिल रही है।

खेल किट से जूते गायब, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

भोजन की भारी कमी के अलावा इस प्रतियोगिता से जुड़ी एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। आरोप है कि खिलाड़ियों को वितरित की जाने वाली किट में से जूते नदारद थे। संभागीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के लिए शासन स्तर से मिलने वाले बजट और खेल सामग्री वितरण की पारदर्शिता पर अब गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं। जब खिलाड़ियों को तयशुदा सामग्री ही पूरी नहीं मिलेगी, तो वे अपनी खेल भावना को कैसे आगे बढ़ाएंगे?

  • सुबह से शाम तक का इंतजार: बच्चों को समय पर भोजन न मिलने से उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ा।
  • गायब खेल सामग्री: किट में जूते न होने से भ्रष्टाचार और लापरवाही की बू आ रही है।
  • अभिभावकों में रोष: बच्चों के परिजनों ने सीधे तौर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को कोसा है।
  • लौटना पड़ा भूखे: कई बच्चे बिना खाए ही अपने घर वापस जाने को विवश हो गए।

शालेय शिक्षा विभाग की भूमिका पर टिकी निगाहें

इस पूरे घटनाक्रम के बाद दतिया जिले का शालेय शिक्षा विभाग सीधे तौर पर कटघरे में आ गया है। आयोजन की बागडोर संभालने वाले अधिकारियों की जवाबदेही पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर खेल बजट और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का पैसा और संसाधन कहां गए? क्या जानबूझकर बच्चों की सुविधाओं में कटौती की गई या फिर यह महज़ एक प्रशासनिक विफलता थी?

फिलहाल, इस मामले के तूल पकड़ने के बाद खेल प्रेमियों और बुद्धिजीवियों ने उच्च स्तर पर इसकी निष्पक्ष जांच कराने और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस शर्मनाक स्थिति पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है और पीड़ित बच्चों के साथ न्याय करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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