उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से इस वक्त एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने उच्च शिक्षण संस्थानों और पुलिस महकमे के बीच के रिश्तों पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। मामला दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) का है, जहां प्रशासनिक भवन के बाहर छात्रों के चल रहे प्रदर्शन और भूख हड़ताल के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच जमकर तनाव देखने को मिला। इसी हंगामे के बीच एक पुलिस अधिकारी यानी दारोगा का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें वे धरने पर बैठे छात्रों को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते नजर आ रहे हैं।
वायरल वीडियो में क्या कह रहे हैं दारोगा?
सामने आए इस वीडियो ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी है। वीडियो किसी सड़क, चौराहे या थाने का नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी परिसर का है। इसमें एक दारोगा आक्रोशित छात्रों के सामने पुलिसिया रौब दिखाते हुए साफ तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं, ''बता दे रहा हूं इतनी फोर्स मंगवाऊंगा कि ठंडा कर दूंगा, जान नहीं रहे हो, ये गोरखपुर पुलिस है।''
यह बयान सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया यूजर्स के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों से इस तरह की भाषा में बात करना उचित है?
सोशल मीडिया पर भड़के लोग, उठ रही कार्रवाई की मांग
जैसे ही यह वीडियो अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड हुआ, वैसे ही इस पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। लोग इस वायरल क्लिप को शेयर करते हुए यूपी पुलिस के इस रवैये की आलोचना कर रहे हैं।
- एक फेसबुक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, ''इस दारोगा को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए।''
- दूसरे यूजर ने लिखा, ''थोड़ा कम बोलिए दारोगा जी, छात्र शक्ति के बारे में शायद आपको अभी अंदाजा नहीं है।''
- एक अन्य नागरिक ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ''वर्दी का ऐसा घमंड ठीक नहीं है। इस दारोगा पर उचित विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।''
क्या है पूरा घटनाक्रम? जानिए 25 अगस्त से 8 सितंबर तक की पूरी कहानी
यह पूरा विवाद अचानक से पैदा नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे यूनिवर्सिटी परिसर में हफ्तों से सुलग रहा असंतोष है। जानकारी के मुताबिक, यह सारा घटनाक्रम 8 सितंबर की दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच का है। एक तरफ छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अड़े हुए थे, तो दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन किसी तरह परिसर में शांति व्यवस्था कायम करने की कोशिश में जुटा था।
यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन के सामने 25 अगस्त से ही छात्रों का धरना प्रदर्शन चल रहा था। छात्र नेताओं का आरोप है कि परिसर में कई तरह की अनियमितताएं और समस्याएं हैं, जिनका समाधान प्रशासन नहीं कर रहा है। शुरुआती दिनों में यह केवल सामान्य धरना था, लेकिन जब प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो 5 सितंबर से यह प्रदर्शन 'भूख हड़ताल' में बदल गया।
भूख हड़ताल की अगुवाई कर रहे छात्र नेता सतीश प्रजापति और उज्जवल सिंह ने साफ कर दिया था कि जब तक उनकी सभी मांगों पर लिखित और ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका यह आंदोलन यूं ही जारी रहेगा।
जब भूख हड़ताल खत्म कराने पहुंचे एडिशनल प्रॉक्टर
मामले को सुलझाने के लिए 8 सितंबर को एडिशनल प्रॉक्टर डॉ. वेद प्रकाश राय भारी पुलिस बल और यूनिवर्सिटी के सुरक्षाकर्मियों के साथ प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार पर पहुंचे। उनका मकसद भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से बातचीत करना और वहां की स्थिति को सामान्य बनाना था।
लेकिन जैसे ही प्रशासन की टीम ने छात्रों को वहां से हटाने की प्रक्रिया शुरू की, माहौल पूरी तरह से गरमा गया। धरने पर बैठे छात्र प्रशासन की इस जबरन हटाने की कार्रवाई से भड़क उठे। भूख हड़ताल कर रहे बीमार छात्रों के समर्थन में दूसरे छात्र भी लामबंद हो गए। देखते ही देखते प्रशासनिक अधिकारियों और छात्रों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
धक्का-मुक्की और तनाव के बीच रिकॉर्ड हुआ वीडियो
विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक के साथ-साथ धक्का-मुक्की भी शुरू हो गई। स्थिति को बेकाबू होते देख एडिशनल प्रॉक्टर डॉ. वेद प्रकाश राय को मौके से वापस लौटना पड़ा। इसी अफरा-तफरी और तनावपूर्ण माहौल के बीच वहां मौजूद पुलिसकर्मियों में से एक दारोगा का यह विवादित वीडियो रिकॉर्ड हो गया, जो अब इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
हालांकि, वायरल हो रहे इस वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती है, लेकिन इसने कैंपस की राजनीति और पुलिस-छात्र संबंधों को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस विभाग इस पूरे मामले पर क्या आधिकारिक रुख अपनाता है।