रसोई गैस का इस्तेमाल करने वाले छत्तीसगढ़ के उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को अब एलपीजी सिलेंडर की अगली बुकिंग के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खाद्य विभाग और पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा लिए गए एक बड़े फैसले के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर बुक करने की समयसीमा को काफी कम कर दिया गया है। अब शहरी इलाकों की तर्ज पर ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपभोक्ता महज 25 दिनों के भीतर अपना अगला रसोई गैस सिलेंडर बुक करवा सकेंगे।
क्या था पुराना नियम और क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?
गौरतलब है कि इससे पहले ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडर की बुकिंग का अंतराल 45 दिन तय किया गया था। यानी एक बार सिलेंडर मिलने के पूरे 45 दिन बीत जाने के बाद ही अगली बुकिंग की अनुमति मिलती थी। इस कड़े नियम के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव, विशेषकर अमेरिका और ईरान के बीच उपजे हालातों के कारण गैस आपूर्ति बाधित होने की आशंका थी।
तेल विपणन कंपनियों ने एहतियात के तौर पर इस नियम को लागू किया था ताकि बाजार में किसी भी तरह की कृत्रिम किल्लत या कालाबाजारी से बचा जा सके। लेकिन इस 45 दिन की पाबंदी के कारण ग्रामीण इलाकों के बड़े परिवारों, संयुक्त परिवारों और जिन घरों में शादी-ब्याह या अन्य बड़े समारोह थे, उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। समय से पहले गैस खत्म हो जाने पर लोगों को खुले बाजार से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने या अन्य विकल्पों की तलाश करने के लिए मजबूर होना पड़ता था।
सरकार का त्वरित हस्तक्षेप और नया आदेश
जनता की इन परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति की समीक्षा की। आपूर्ति की स्थिति में सुधार और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर थोड़ी स्थिरता को देखते हुए सरकार ने पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए।
सोमवार को इस संबंध में आए आधिकारिक बयानों के अनुसार, ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग का अंतराल अब एक समान यानी 25 दिन कर दिया गया है। सरकार के इस तत्काल प्रभाव वाले आदेश से छत्तीसगढ़ के लाखों ग्रामीण परिवारों ने राहत की सांस ली है।
रायपुर जिले में क्या पड़ेगा इसका असर?
राजधानी रायपुर समेत पूरे जिले के ग्रामीण इलाकों में गैस कनेक्शन धारकों की संख्या लाखों में है। खाद्य विभाग से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो अकेले रायपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन दो से तीन हजार एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग दर्ज की जाती है।
वहीं, अगर सिर्फ रायपुर शहर की बात की जाए तो यहाँ रोजाना औसतन 5,000 से 6,000 सिलेंडर बुक होते हैं, जिनमें से लगभग 4,000 सिलेंडर विभिन्न गैस एजेंसियों के माध्यम से सीधे उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
रायपुर के खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने इस नए आदेश की पुष्टि करते हुए बताया कि विभाग को निर्देश प्राप्त हो चुके हैं और अब ग्रामीण उपभोक्ता बिना किसी परेशानी के 25 दिनों के भीतर ही अपना नया सिलेंडर बुक कर सकते हैं। एजेंसियों का मानना है कि इस नियम के हटने से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले बुकिंग ऑर्डर्स की संख्या में तेज उछाल देखने को मिलेगा।
नए कनेक्शन की चाह रखने वालों को अभी करना होगा इंतजार
एक तरफ जहां पुराने उपभोक्ताओं को बुकिंग के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल गई है, वहीं नए कनेक्शन लेने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए अभी भी मुश्किलें बरकरार हैं। वर्तमान में नए गैस कनेक्शन जारी करने पर रोक लगातार जारी है।
इस रोक के कारण रायपुर जिले सहित पूरे प्रदेशभर में हजारों ऐसे लोग परेशान हैं जो हाल ही में दूसरे शहरों से आए हैं या किराए के मकानों में रह रहे हैं। नए कनेक्शन न मिलने की वजह से इन लोगों को या तो अत्यधिक ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं या फिर उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कई गैस एजेंसियां और वितरक इस स्थिति से निपटने के लिए उपभोक्ताओं को फिलहाल 10 किलोग्राम वाले छोटे व्यावसायिक या कंपोजिट सिलेंडरों का विकल्प चुनने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि नए कनेक्शन शुरू करने को लेकर अभी तक ऊपर से कोई आधिकारिक दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए इस मोर्चे पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
आम जनता पर इसका प्रभाव
जानकारों का मानना है कि रसोई गैस बुकिंग के नियमों का यह सरलीकरण आम आदमी के दैनिक जीवन को सुगम बनाएगा। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को अब ईंधन खत्म होने की चिंता से मुक्ति मिलेगी। हालांकि, नए कनेक्शन पर लगी रोक को हटाने की मांग भी अब जोर पकड़ने लगी है, क्योंकि किराए पर रहने वाले तबके और छात्रों को इससे काफी मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बहरहाल, 25 दिन के इस नए नियम के लागू होने से गैस वितरण प्रणाली में एक बार फिर गति आएगी और त्योहारों या शादियों के सीजन में घरेलू बजट को संभालना थोड़ा आसान हो जाएगा।