छत्तीसगढ़ में सफर करने वाले आम जनता और रोजाना आवागमन करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। राज्य में यात्री बसों के किराए में भारी बढ़ोतरी होने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। परिवहन विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर सकता है, जिसके तहत प्रति किलोमीटर किराए में 1.75 रुपए तक की वृद्धि की जा सकती है। इस फैसले से सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, जो रोजाना सड़क मार्ग के जरिए एक शहर से दूसरे शहर सफर करते हैं।
छह साल बाद किराए में संशोधन की तैयारी
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में आखिरी बार साल 2018 में बस किराए में संशोधन किया गया था। इसके बाद से पिछले छह वर्षों में डीजल, मोबिल ऑयल, टायर-ट्यूब और ग्रीस जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में भारी उछाल आ चुका है। बस ऑपरेटरों का तर्क है कि इस बीच महंगाई कई गुना बढ़ गई है, लेकिन किराए में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं की गई। पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान ऑपरेटरों की मांग पर केवल 25 पैसे प्रति किलोमीटर की मामूली बढ़ोतरी की अनुमति दी गई थी, जो अब तक प्रदेश में लागू है।
यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों में ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं। जब 2018 में किराया तय हुआ था, तब डीजल की कीमत करीब 92 रुपए प्रति लीटर थी, जो बढ़कर अब 110 रुपए प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुकी है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध जैसी घटनाओं के बाद से ऑटो पार्ट्स और लुब्रिकेंट्स के दामों में भी भारी आग लगी है। ऐसे में पुराने किराए पर बसों का संचालन करना बस मालिकों के लिए आर्थिक रूप से असंभव होता जा रहा था।
हड़ताल की चेतावनी के बाद जागा प्रशासन
परिस्थितियों से त्रस्त होकर बस ऑपरेटरों ने सरकार के सामने अपनी कड़ी शर्तें रखी थीं। महासंघ ने चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया और किराया नहीं बढ़ाया गया, तो वे सड़कों पर बसें उतारने में असमर्थ हो जाएंगे। ऑपरेटरों ने तो यहां तक कह दिया था कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे आगामी 22 सितंबर से बसों का संचालन पूरी तरह बंद कर देंगे।
इस अल्टीमेटम के बाद हरकत में आए परिवहन विभाग ने मामले की गंभीरता को समझा। आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ राज्य में इस समय 12 हजार से अधिक यात्री बसों का संचालन किया जाता है। इस बड़े परिवहन कारोबार से सीधे तौर पर 1 लाख से ज्यादा लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। यदि बसें थम जातीं, तो आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाता, जिसे टालने के लिए अब सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए किराया बढ़ाने का मन बना लिया है.
टेक्स और अन्य नियमों को लेकर भी था विवाद
किराए के अलावा बस संचालकों की कुछ अन्य प्रशासनिक और तकनीकी शिकायतें भी थीं। ऑपरेटरों का मुख्य मुद्दा एक ही सीट पर डबल टैक्स वसूले जाने का था। इसके अलावा, ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट के कथित दुरुपयोग और बसों में अनिवार्य रूप से लगाए जाने वाले जीपीएस (GPS) उपकरणों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी थीं।
मालूम हो कि छत्तीसगढ़ में बस ऑपरेटरों के दो अलग-अलग संगठन सक्रिय हैं। इनमें से एक मुख्य यूनियन ने कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताल पर जाने का ऐलान किया था। इस आंतरिक और बाहरी दबाव को देखते हुए राज्य शासन ने मामले को सुलझाने के लिए उच्च स्तर पर बातचीत शुरू की थी।
किन विभागों से मिल चुकी है मंजूरी?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बस किराए में इस बहुप्रतीक्षित इजाफे के प्रस्ताव पर परिवहन मंत्री केदार कश्यप और वित्त विभाग की तरफ से हरी झंडी मिल चुकी है। अब इस प्रक्रिया में केवल विधि विभाग की औपचारिक अनुमति बाकी है। जैसे ही विधिक स्वीकृति मिलेगी, इसे आगामी कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा, जहां इस पर अंतिम मुहर लगने के बाद आधिकारिक रूप से घोषणा की जाएगी और राजपत्र (Gazette) में इसका प्रकाशन कर दिया जाएगा।
पड़ोसी राज्यों का क्या है हाल?
सरकार और बस महासंघ के बीच हुई बैठकों में इस बात का भी विशेष हवाला दिया गया कि छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्यों—मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में डीजल और अन्य लागत बढ़ने के बाद वहां पहले ही बसों के किराए में औसतन 2 रुपए प्रति किलोमीटर तक की बढ़ोतरी की जा चुकी है। ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ के बस ऑपरेटरों को भी पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर राहत देना जरूरी हो गया था, ताकि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बदहाल न हो और सुचारू रूप से चलती रहे।
किराया बढ़ने से क्या होगा प्रभाव?
- दैनिक यात्रियों पर बोझ: नौकरीपेशा, व्यापारी और छात्रों को अब हर महीने यात्रा पर अधिक पैसे खर्च करने होंगे।
- लंबे सफर का किराया: रायपुर से बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर या अंबिकापुर जाने वाले यात्रियों को टिकट के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी।
- सुचारू संचालन: किराए में वृद्धि होने से बस मालिकों को वित्तीय संकट से राहत मिलेगी और वे ग्रामीण तथा शहरी रूटों पर नियमित बसें चला पाएंगे।
फिलहाल, यात्रियों को आधिकारिक आदेश का इंतजार करना होगा। आदेश जारी होते ही नए रेट कार्ड लागू हो जाएंगे और छत्तीसगढ़ में बस सफर महंगा हो जाएगा।