भारतीय राजनीति के गलियारों से शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को एक के बाद एक कई झटके लग रहे हैं, और इसी कड़ी में पार्टी की मजबूत राष्ट्रीय प्रवक्ता रहीं प्रियंका कक्कड़ ने भी 'झाड़ू' का साथ छोड़कर 'हाथ' का दामन थाम लिया है। एक दशक से भी ज्यादा लंबा सफर तय करने के बाद प्रियंका कक्कड़ का इस तरह से पार्टी से अलग होना और कांग्रेस में शामिल होना सियासी हलकों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में हुआ बड़ा फेरबदल
शनिवार को नई दिल्ली में हुए एक राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्रियंका कक्कड़ ने औपचारिक रूप से कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला, पवन खेड़ा और दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव विशेष रूप से मौजूद रहे। पार्टी में शामिल होने के बाद प्रियंका ने साफ कर दिया कि उनका यह फैसला किसी जल्दबाजी में लिया गया कदम नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और वैचारिक मंथन की एक लंबी दास्तान है।
पेशे से वकील रहीं प्रियंका कक्कड़ साल 2013 में आम आदमी पार्टी के गठन और शुरुआती दौर से ही इसके साथ जुड़ी हुई थीं। साल 2023 में उन्हें पार्टी का नेशनल चीफ स्पोक्सपर्सन बनाया गया था। इसके अलावा उन्होंने तेलंगाना पर्यवेक्षक के तौर पर भी सांगठनिक जिम्मेदारी संभाली थी और कई राज्यों में पार्टी के लीगल तथा ऑर्गेनाइजेशनल असाइनमेंट्स को लीड किया था। इतने लंबे समय तक मुख्य प्रवक्ता की भूमिका निभाने के बाद उनका यह कदम आम आदमी पार्टी के आंतरिक नेतृत्व के लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल माना जा रहा है।
क्यों छोड़ी आम आदमी पार्टी? गिनाई अंदर की बातें
पार्टी छोड़ने के बाद प्रियंका कक्कड़ ने खुलकर अपनी असहमति और भीतर की परिस्थितियों पर बात की। उन्होंने एक मीडिया इंटरव्यू और अपने बयानों में कहा कि वह अब राजनीति के ऐसे पड़ाव पर आ चुकी हैं जहां वह अपनी पूर्व पार्टी के भीतर हो रहे 'असुरक्षित' कामों और नीतियों का बचाव नहीं कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि उनका यह कदम एक 'ग्रीन, क्लीन, प्रोग्रेसिव और सेफ' दिल्ली के उनके विजन से गहराई से जुड़ा हुआ है।
आम आदमी पार्टी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने पार्टी की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए। प्रियंका ने कहा कि कभी जिस पार्टी ने सादगी की मिसाल पेश करते हुए सरकारी बंगलों और बड़ी गाड़ियों के इस्तेमाल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था, आज उसी पार्टी के भीतर निजी हेलीकॉप्टर में यात्रा करना आम प्रैक्टिस बन चुका है।
संगठन पर उठाए गंभीर सवाल
प्रियंका कक्कड़ ने पार्टी की अंदरूनी कार्यप्रणाली और सांगठनिक नियुक्तियों पर भी सवालिया निशान लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर काम करने और तजुर्बा हासिल करने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर कुछ चुनिंदा लोगों को शीर्ष पदों पर बैठा दिया गया। उनके मुताबिक, पार्टी उन बेहतरीन नेताओं और समर्पित कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़े रखने में बुरी तरह नाकाम रही है जो शुरुआती दौर से इसके साथ पूरी निष्ठा से खड़े थे।
राहुल गांधी की कार्यशैली की तारीफ
कांग्रेस पार्टी का दामन थामने की वजह बताते हुए प्रियंका कक्कड़ ने राहुल गांधी की जमकर तारीफ की। उन्होंने राहुल गांधी पर लगातार हो रहे राजनीतिक हमलों का जिक्र करते हुए उनके लचीलेपन और संघर्ष करने की क्षमता को सराहा। प्रियंका ने कहा कि उन्हें कांग्रेस पार्टी के भीतर एक खास किस्म की 'ऑथेंटिसिटी' (प्रामाणिकता) देखने को मिली, जिसने उन्हें पार्टी बदलने के लिए प्रेरित किया।
यही नहीं, प्रियंका ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल गांधी द्वारा चलाए जा रहे कैंपेन का भी खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कांग्रेस द्वारा उठाए गए 'वोट चोरी' के आरोपों को दोहराते हुए अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित किया। हालांकि, दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने इन सभी गड़बड़ी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उसके सभी फैसले स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही लिए जाते हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म
प्रियंका कक्कड़ का कांग्रेस में शामिल होना ऐसे समय में हुआ है जब दिल्ली की राजनीति में हलचल अपने चरम पर है। पिछले कुछ समय से लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों, हिरासत की घटनाओं और राजनीतिक दलों के बीच चल रही बयानबाजी के बीच यह डेंट आम आदमी पार्टी के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रियंका कक्कड़ जैसी तेज-तर्रार और मुखर वक्ता का कांग्रेस में जाना, आने वाले दिनों में विपक्ष की रणनीति को और धार दे सकता है। एक दशक का लंबा सांगठनिक अनुभव रखने वाली नेता का जाना यह संकेत देता है कि क्षेत्रीय दलों के भीतर भी अब वैचारिक मतभेद और असंतोष खुलकर सतह पर आने लगे हैं। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि प्रियंका कक्कड़ कांग्रेस पार्टी के भीतर किस नई भूमिका में नजर आती हैं और AAP इस झटके से उबरने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।