हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद से एक बेहद संवेदनशील और मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के मुख्य द्वार पर एक महिला के प्रसव (डिलीवरी) होने की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब जिला स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है और त्वरित कार्रवाई करते हुए एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुई घटना?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बीती रात फरीदाबाद के एक स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर का यह पूरा वाकया है। परिवार के सदस्यों का आरोप है कि समय पर चिकित्सीय सहायता और अस्पताल के भीतर प्रवेश न मिलने के कारण महिला को अस्पताल के गेट के बाहर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। इस अमानवीय स्थिति का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में भारी रोष देखने को मिला। लोगों का सवाल है कि यदि सरकारी अस्पतालों में ही इस तरह की लापरवाही बरती जाएगी, तो आम गरीब और जरूरतमंद लोग कहां जाएंगे? सरकार के तमाम दावों और स्वास्थ्य सेवाओं के विज्ञापनों के बीच जमीनी हकीकत आज भी कितनी डरावनी है, यह इस घटना से साफ जाहिर होता है।
स्वास्थ्य विभाग ने उठाया सख्त कदम, गठित हुई जांच कमेटी
मामले के तूल पकड़ने और मीडिया में खबरें आने के बाद जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय ने इस पर संज्ञान लिया। लापरवाही के इस गंभीर आरोपों की तह तक जाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तुरंत एक विशेष जांच समिति (Enquiry Committee) का गठन कर दिया है।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कमेटी में डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया है। कमेटी को यह निर्देश दिए गए हैं कि वह घटना के हर एक पहलू की बारीकी से जांच करे।
जांच कमेटी के मुख्य बिंदु निम्नलिखित0 होंगे:
- घटना के समय ड्यूटी पर कौन-कौन डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद था?
- क्या परिजनों ने अस्पताल के अंदर आने का प्रयास किया था और यदि हां, तो उन्हें अंदर क्यों नहीं जाने दिया गया?
- क्या प्रसूता महिला को समय पर प्राथमिक उपचार या एंबुलेंस सेवा मुहैया कराई गई थी या नहीं?
- अस्पताल के सुरक्षा गार्ड्स और स्टाफ की क्या भूमिका रही?
जिम्मेदारों पर होगी कड़ी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई भी डॉक्टर, नर्स या अस्पताल का अन्य कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग का यह भी कहना है कि भविष्य में इस तरह की अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए अस्पतालों के स्टाफ को कड़ी चेतावनी दी जा रही है।
वर्तमान समय में मां और नवजात दोनों की सेहत कैसी है, इस पर भी डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। राहत की बात यह है कि दोनों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन इस घटना ने चिकित्सा प्रणाली की कार्यशैली पर एक बड़ा और गंभीर प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है।
जनता और जानकारों की प्रतिक्रियाएं
इस घटना के सामने आने के बाद से ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जानकारों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग बेहद कमजोर हो चुकी है। कागजों पर स्वास्थ्य योजनाएं जितनी शानदार दिखाई देती हैं, धरातल पर उनकी स्थिति उतनी ही बदतर नजर आती है।
आम जनता का कहना है कि सिर्फ जांच कमेटी बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसी घटनाओं के दोषियों को सजा मिले ताकि दोबारा किसी महिला को इस तरह की लाचारी और बेबसी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल, सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित इस जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना बेहद अहम होगा कि कमेटी अपनी रिपोर्ट में किसे दोषी मानती है और प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है।