यात्रियों की असुविधा रोकने के लिए दक्षिण रेलवे का सख्त कदम, 20 अक्टूबर तक चलेगा जागरूकता अभियान
ट्रेन सफर के दौरान मोबाइल पर तेज आवाज में गाने, वीडियो या सोशल मीडिया रील चलाने वाले यात्रियों को अब भारी पड़ सकता है। दक्षिण रेलवे ने इस प्रकार की हरकतों पर नकेल कसने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। यदि किसी यात्री ने सफर के दौरान मोबाइल स्पीकर पर तेज आवाज में मनोरंजन करके अन्य सहयात्रियों को परेशान किया, तो उसे न केवल ट्रेन से उतारा जा सकता है, बल्कि आर्थिक दंड का सामना भी करना पड़ सकता है।
रेलवे एक्ट की धारा 145 के तहत होगी कार्रवाई
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ट्रेन के डिब्बों में इस तरह का उपद्रव या शोर मचाना रेलवे अधिनियम के नियमों का उल्लंघन है। रेलवे एक्ट की धारा 145(2)(a) के तहत ऐसे मामलों में उपद्रव फैलाने के आरोप में कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें बीच रास्ते में ट्रेन से भी उतारा जा सकता है।
चेतावनी नजरअंदाज करने पर जेल की सजा का प्रावधान
यदि कोई यात्री रेलवे कर्मचारियों या सुरक्षाकर्मियों की चेतावनी के बाद भी अपनी हरकत से बाज नहीं आता है और लगातार उपद्रव जारी रखता है, तो उस पर और अधिक कठोर कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है। ऐसे मामलों में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छह महीने तक की साधारण कैद, पांच हजार रुपये तक का जुर्माना, या फिर दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।
सफर के दौरान नियमों का पालन करने की अपील
रेलवे अधिकारियों ने सभी रेल यात्रियों से अपील की है कि वे ट्रेन यात्रा के दौरान सहयात्रियों की सुविधा और आराम का पूरा ध्यान रखें। यदि किसी को सफर के दौरान गाने, संगीत या वीडियो सुनने हैं, तो वह व्यक्तिगत ईयरफोन या हेडफोन का उपयोग करे। दक्षिण रेलवे द्वारा इस संबंध में 20 अक्टूबर तक विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार कर यात्रियों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि लोग सफर में नियमों का पालन करें।