हल्द्वानी और काठगोदाम में रामलीला के मार्मिक प्रसंगों ने मोहा मन, मेघनाद वध और अंगद-रावण संवाद का हुआ जीवंत मंचन
उत्तराखंड के हल्द्वानी और काठगोदाम क्षेत्रों में आयोजित पारंपरिक रामलीलाओं में इन दिनों धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम है। शहर की लगभग 150 वर्ष पुरानी प्राचीन रामलीला संचालन समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में मेघनाद वध और सुलोचना सती के मार्मिक प्रसंगों का मंचन किया गया, जिसे देखकर दर्शक भावुक हो गए। वहीं काठगोदाम के नगर निगम इंटर कॉलेज प्रांगण में चल रहे रामलीला महोत्सव में अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति के दृश्यों ने दर्शकों का भरपूर उत्साहवर्धन किया।
हल्द्वानी रामलीला में मेघनाद वध और सुलोचना सती का प्रसंग
हल्द्वानी में व्यास पुष्कर दत्त शास्त्री के निर्देशन में मंचित लीला के दौरान दिखाया गया कि मायावी शक्तियों और ब्रह्मास्त्र के ज्ञाता मेघनाद ने जब निकुंभिला यज्ञ शुरू किया, तब लक्ष्मण जी वानर सेना के साथ वहां पहुंचे और यज्ञ को विध्वंस कर दिया। इसके बाद दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ और अंततः लक्ष्मण जी के हाथों मेघनाद का वध हुआ। इस प्रसंग में मेघनाद की भूमिका यश गुप्ता और रावण की भूमिका कैलाश भारती ने निभाई। इसके अलावा, पति का कटा हुआ शीश भगवान श्रीराम से वापस लाने और सुलोचना के सती होने के प्रसंग ने पंडाल में मौजूद दर्शकों की आंखें नम कर दीं।
रात्रि कालीन लीला और अंगद-रावण संवाद
रात्रि के सत्र में भगवान श्रीराम द्वारा समुद्र तट पर शिवलिंग की स्थापना, अंगद-रावण संवाद, मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण जी के मूर्छित होने तथा भगवान श्रीराम द्वारा कुंभकर्ण वध के प्रसंगों का मंचन किया गया। अंगद-रावण संवाद के दौरान जब अंगद ने रावण के दरबार में अपने पैर जमाए और वहां मौजूद कोई भी राक्षस उसे हिला नहीं सका, तो इस दृश्य ने दर्शकों में भारी उत्साह भर दिया। इस दौरान रामलीला संचालन समिति के वरिष्ठ सदस्य एडवोकेट विंदेश गुप्ता, एनबी गुणवंत, भोलानाथ केसरवानी, मनोज गुप्ता और राजेंद्र मुन्ना उपस्थित रहे।
काठगोदाम रामलीला महोत्सव के प्रमुख आकर्षण
काठगोदाम के नगर निगम इंटर कॉलेज प्रांगण में आयोजित रामलीला में भी कलाकारों के अभिनय ने देर रात तक दर्शकों को बांधे रखा। भगवान श्रीराम के दूत बनकर रावण के दरबार में पहुंचे अंगद ने माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाने की सलाह दी। रावण के अहंकार के आगे न झुकने पर अंगद ने चुनौती दी कि यदि कोई उनका पैर दरबार से हटा देगा, तो राम सेना बिना युद्ध किए लौट जाएगी। तमाम प्रयासों के बाद जब कोई योद्धा सफल नहीं हुआ, तो रावण को स्वयं आगे आना पड़ा। इसके बाद लंका के युद्ध में मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण जी के मूर्छित होने, वैद्यराज सुषेन के निर्देश पर हनुमान जी द्वारा द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाने और लक्ष्मण के स्वस्थ होने के दृश्यों ने रामदल में खुशी की लहर दौड़ा दी। इस आयोजन में अध्यक्ष संदीप राणा, हिमांशु साही, कुंदन सिंह बिष्ट, संतोष राणा, प्रदीप बिष्ट और राजू रावत समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
दशहरे पर रावण दहन और सुरक्षा प्रबंध
मीडिया प्रभारी विनीत अग्रवाल ने जानकारी दी कि आगामी दशहरे के पर्व पर रावण दहन का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके लिए शंभू बाबा का परिवार 55 फुट ऊंचा रावण का पुतला तैयार कर रहा है, जिसमें विशेष आतिशबाजी की व्यवस्था भी की गई है। समिति ने पर्व के दौरान जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए नागरिकों से सतर्कता बरतने, यातायात डायवर्जन के नियमों का पालन करने और मैदान में भीड़ नियंत्रित होने पर ही बाहर निकलने की अपील की है।