सफर के दौरान जब अचानक किसी चलती ट्रेन से धुआं निकलने लगे, तो यात्रियों के दिल की धड़कनें तेज होना लाजिमी है। रविवार को पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद रेल मंडल के अंतर्गत कुछ ऐसा ही डरावना मंजर देखने को मिला, जब झारखंड के कतरासगढ़ स्टेशन के पास एक महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेन के एसी कोच से अचानक घने धुएं के गुबार उठने लगे। इस घटना ने एक बार फिर से ट्रेनों में तकनीकी सुरक्षा और मेंटेनेंस के पुख्ता दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आइए जानते हैं कि आखिर उस डरावने पल में क्या-क्या हुआ और रेलवे प्रशासन ने इस स्थिति से कैसे निपटा।
कतरी नदी पुल के पास रुका सफर
मिली जानकारी के अनुसार, धनबाद से चलकर रांची के रास्ते केरल के अलेप्पी तक जाने वाली लोकप्रिय धनबाद-अलेप्पी एक्सप्रेस अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रही थी। ट्रेन जैसे ही कतरासगढ़ स्टेशन की सीमा के करीब पहुंची और कतरी नदी पुल के पास से गुजर रही थी, तभी अचानक उसके एक एसी कोच के निचले हिस्से से धुआं निकलता हुआ दिखाई दिया। कोच के अंदर और आसपास मौजूद यात्रियों ने जब इस असामान्य स्थिति को देखा, तो पलभर में वहां अफरातफरी मच गई।
खतरे की आशंका को भांपते हुए लोको पायलट ने सूझबूझ का परिचय दिया और ट्रेन की गति धीमी कर उसे कतरी नदी पुल पर ही रोक दिया गया। चलती ट्रेन से धुआं निकलने की खबर आग की तरह फैल गई, जिससे बोगियों के भीतर बैठे यात्रियों के चेहरों पर खौफ साफ झलकने लगा। कई यात्री अपनी सीटों से उठकर दरवाजे की तरफ भागे ताकि किसी भी अनहोनी से पहले सुरक्षित बाहर निकला जा सके।
क्या थी धुएं की असली वजह? शुरुआती जांच में खुलासा
ट्रेन के रुकने के तुरंत बाद रेलवे के तकनीकी कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी हरकत में आए। कोच की बारीकी से जांच की गई तो पता चला कि यह पूरा हंगामा 'ब्रेक बाइंडिंग' (Break Binding) की तकनीकी समस्या के कारण हुआ था। जानकारों के मुताबिक, जब ब्रेक शूज पहिए से पूरी तरह से अलग नहीं हो पाते और लगातार रगड़ खाते हैं, तो अत्यधिक घर्षण के कारण वहां से धुआं निकलने लगता है। गनीमत यह रही कि यह कोई बड़ी आग की घटना नहीं थी, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
कतरासगढ़ स्टेशन पर की गई विस्तृत तकनीकी जांच
पुल पर शुरुआती मुआयना करने के बाद रेलवे टीम ने सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए ट्रेन को तुरंत आगे बढ़ाया और उसे सुरक्षित रूप से कतरासगढ़ स्टेशन पर लाया गया। स्टेशन परिसर में संबंधित एसी कोच की पूरी तकनीकी टीम द्वारा गहन जांच की गई। इंजीनियरों ने आश्वस्त किया कि ब्रेक बाइंडिंग की समस्या को ठीक कर दिया गया है और अब ट्रेन का सफर करना पूरी तरह से सुरक्षित है।
तकनीकी खराबी दूर होने और स्थिति पूरी तरह सामान्य पाए जाने के बाद, ट्रेन को उसके निर्धारित गंतव्य की ओर रवाना कर दिया गया। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ट्रेन लगभग 15 मिनट की देरी से चली। गंतव्य की ओर ट्रेन के दोबारा बढ़ते ही यात्रियों ने चैन की सांस ली और राहत महसूस की।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल
यह घटना भले ही एक छोटी तकनीकी खामी के कारण टल गई हो और बड़ा हादसा होने से बच गया हो, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार गहरी होती जा रही हैं। पिछले कुछ दिनों में इस रूट पर इस तरह की यह कोई पहली घटना नहीं है। ठीक चार दिन पहले ही धनबाद-एलटीटी एक्सप्रेस (Lokmanya Tilak Terminus Express) की एक एसी बोगी में अचानक रात के वक्त फायर अलार्म बज उठा था। उस घटना के दौरान भी यात्रियों में भारी दहशत फैल गई थी और कई लोग अपने जरूरी सामान को छोड़कर अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे थे।
लगातार सामने आ रही ऐसी तकनीकी गड़बड़ियों ने रेल यात्रियों के मन में एक अनजाना डर पैदा कर दिया है। रोजाना सफर करने वाले आम मुसाफिरों का कहना है कि लंबी दूरी की ट्रेनों के रवाना होने से पहले उनके मेंटेनेंस और फिटनेस टेस्ट की प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता और सख्ती बरतने की आवश्यकता है, ताकि यात्रियों की जान को इस तरह जोखिम में न डाला जाए।
यात्रियों के लिए जरूरी हिदायतें
- ट्रेन के सफर के दौरान किसी भी असामान्य गंध, आवाज या धुएं को नजरअंदाज बिल्कुल न करें।
- ऐसी स्थिति में तुरंत ट्रेन के टीटीई (TTE) या चेन खींचकर (Chain Pulling) लोको पायलट को सूचित करें।
- घबराएं नहीं, अफवाहें न फैलाएं और रेलवे स्टाफ के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें।
फिलहाल, धनबाद-अलेप्पी एक्सप्रेस सुरक्षित रूप से अपने अगले पड़ाव के लिए निकल चुकी है, लेकिन रेलवे अधिकारियों को इन बढ़ती तकनीकी घटनाओं पर कड़ा संज्ञान लेने की सख्त जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी डरावनी स्थितियों की पुनरावृत्ति न हो सके।