बाजार में बिकने वाली जीवनरक्षक दवाइयां अब कितनी सुरक्षित हैं, इस पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग और ड्रग कंट्रोलर प्रशासन की सतर्कता के चलते एक ऐसे कुख्यात और बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो सीधे तौर पर आम जनता की जान से खिलवाड़ कर रहा था। गुरुग्राम के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग ने एक सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम देते हुए उच्च रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर (BP) जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में काम आने वाली नकली दवाओं के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले की जड़ें केवल एक शहर तक सीमित नहीं थीं, बल्कि इसका दायरा गुरुग्राम से लेकर गुजरात के कई इलाकों तक फैला हुआ था।
छापेमारी में हुआ सनसनीखेज खुलासा
प्राप्त जानकारियों के अनुसार, गुरुग्राम एफडीए की टीम को पिछले कुछ दिनों से लगातार यह इनपुट मिल रहा था कि बाजार में कुछ नामी कंपनियों के नाम पर भारी मात्रा में नकली दवाएं बेची जा रही हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने एक विशेष छापामार दल का गठन किया। गोपनीय सूचना के आधार पर जब गुरुग्राम और आसपास के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। वहां भारी मात्रा में हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाली नकली गोलियां, पैकेजिंग सामग्री और अन्य संदिग्ध सामग्रियां बरामद हुईं।
यह सिंडिकेट इतने शातिर तरीके से काम कर रहा था कि आम मरीजों या दुकानदारों के लिए असली और नकली दवा के बीच का फर्क करना लगभग असंभव था। ये लोग हूबहू असली जैसी दिखने वाली स्ट्रिप्स और रैपर तैयार करवाते थे और फिर उन्हें मेडिकल स्टोर्स तक सप्लाई करते थे।
कंपनी निदेशक समेत पांच शातिर गिरफ्तार
इस पूरे मामले में एफडीए और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल पांच आरोपियों को दबोचने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तार किए गए लोगों में कथित तौर पर एक दवा निर्माण कंपनी का निदेशक (Director) भी शामिल है, जो इस पूरे अवैध कारोबार का मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है। इसके अलावा, इस नेटवर्क में लॉजिस्टिक्स संभालने वाले और सप्लाई चेन को मैनेज करने वाले अन्य चार सहयोगियों को भी पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
अधिकारियों का मानना है कि यह कोई छुटपुट मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित अपराध (Organized Crime) है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर नकली दवाओं की खेप को अलग-अलग राज्यों में भेजा जा रहा था। पुलिस आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट के तार देश के अन्य हिस्सों से तो नहीं जुड़े हैं।
गुरुग्राम से गुजरात तक फैला था काला कारोबार
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस नकली दवा नेटवर्क का दायरा बेहद व्यापक था। हरियाणा के गुरुग्राम से शुरू हुआ यह खेल गुजरात के कई औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों तक अपनी जड़ें जमा चुका था। गुजरात में नकली दवाओं के निर्माण से लेकर उनकी री-पैकेजिंग और फिर वहां से उत्तर भारत के विभिन्न बाजारों में उनकी आपूर्ति का एक पूरा चक्र चलाया जा रहा था।
- उत्पादन: गुजरात के गुप्त ठिकानों पर घटिया सामग्री से गोलियां तैयार करना।
- पैकेजिंग: असली ब्रांड्स के नाम पर हूबहू रैपर और बॉक्स तैयार करना।
- वितरण: गुरुग्राम और आसपास के डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए मेडिकल स्टोर्स तक पहुंचाना।
जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी बेहद चालाकी से रूट बदलकर ट्रांसपोर्टेशन करते थे ताकि किसी की नजर उन पर न पड़े। लेकिन, मुखबिर तंत्र और सर्विलांस की मदद से एफडीए आखिरकार इस सिंडिकेट के अंतिम छोर तक पहुंच ही गया।
आम जनता की सेहत पर मंडरा रहा था बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर और क्रोनिक बीमारी के मरीजों को नियमित रूप से दवा लेनी पड़ती है। यदि ऐसे मरीजों को इलाज के नाम पर नकली या बेअसर दवाएं दी जाएं, तो उनके शरीर पर इसके घातक परिणाम हो सकते हैं। नकली दवाओं में एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) या तो बहुत कम मात्रा में होते हैं या फिर पूरी तरह गायब होते हैं। ऐसी स्थिति में अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने से पैरालिसिस, हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
एफडीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे दवाएं हमेशा किसी भरोसेमंद और लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही खरीदें। दवा खरीदते समय बिल जरूर लें और यदि किसी भी दवा के रंग, रूप, स्वाद या पैकेजिंग पर थोड़ा भी संदेह हो, तो उसकी सूचना तुरंत ड्रग विभाग को दें।
आगे की कानूनी कार्रवाई और कड़े कदम
फिलहाल, गिरफ्तार किए गए सभी पांचों आरोपियों को अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा ताकि इस अवैध कारोबार में शामिल अन्य चेहरों बेनकाब किया जा सके। ड्रग कंट्रोल विभाग उन सभी मेडिकल स्टोर्स और डिस्ट्रीब्यूटरों की भी सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने इन आरोपियों से दवाएं खरीदी थीं। विभाग का यह सख्त रुख साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में नकली दवाओं के इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों पर भी कानूनी शिकंजा कसना तय है।