हरियाणा के अन्नदाताओं के चेहरों पर इस सीजन की सबसे बड़ी मुस्कान दिखाई दे रही है। राज्य की अनाज मंडियों में इन दिनों धान की आवक पूरी रफ्तार पर है, और खासतौर पर '1509' बासमती किस्म ने किसानों की झोली खुशियों से भर दी है। इस किस्म ने बाजार में अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं और इसके दाम आसमान छू रहे हैं। प्रदेश की विभिन्न मंडियों में 1509 धान का भाव 3800 रुपये से लेकर 4400 रुपये प्रति क्विंटल तक बोला जा रहा है, जिससे किसानों की आमदनी में बंपर इजाफा हुआ है।
विदेशी बाजार में चमक और भारी डिमांड
कृषि विशेषज्ञों और निर्यातकों का मानना है कि इस बार कीमतों में इस ऐतिहासिक उछाल के पीछे घरेलू के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजार की मजबूत मांग है। विशेष रूप से मध्य पूर्व के देशों में भारतीय चावल की भारी मांग बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय चावल बाजार में ईरान का रुख सबसे अहम माना जाता है, जहां विभिन्न किस्मों की लगभग 12 लाख मीट्रिक टन की बड़ी मार्केट है। भारत से सबसे ज्यादा चावल का निर्यात मुख्य रूप से ईरान को ही किया जाता है।
वर्तमान सीजन में निर्यात बाजार का हाल यह है कि 1509 के स्टीम चावल का दाम 8600 से 9000 रुपये प्रति क्विंटल और सेला चावल का भाव लगभग 8400 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा है। मजबूत वैश्विक मांग का सीधा फायदा देश के किसानों को मिल रहा है, जिन्हें उनकी फसल के बेहतरीन दाम थामे जा रहे हैं।
वर्ष 2015 के बुरे दिन पीछे छूटे
धान की इसी 1509 किस्म का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2015 का वह दौर भी किसानों को अच्छी तरह याद है जब इस किस्म का बंपर उत्पादन हुआ था लेकिन इसके मुकाबले बाजार में खरीदार न के बराबर थे। तब भारी मांग की कमी के चलते किसानों को सड़कों पर उतरना पड़ा था और प्रदेश की मंडियों में भारी हंगामा व धरने-प्रदर्शन हुए थे। उस समय स्थिति को संभालने के लिए राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया था और 1800 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर इसकी खरीद की गई थी। इसके बाद वर्ष 2020 में नीतिगत फैसला लिया गया था कि यदि 1509 का बाजार भाव सामान्य पीआर धान से कम रहता है, तो इसे एमएसपी पर खरीदा जाएगा। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं, जहां सरकारी समर्थन से ज्यादा खुली बाजार की कीमतें किसानों को मालामाल कर रही हैं।
पीआर धान की भी खरीद शुरू, एमएसपी तय
कैथल की पुरानी अनाज मंडी के प्रधान श्याम बहादुर खुरानिया ने जानकारी देते हुए बताया कि मंडियों में आने वाले किसानों को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बासमती 1509 किस्म की खरीद मुख्य रूप से प्राइवेट एजेंसियों और व्यापारियों द्वारा की जा रही है, जो किसानों को खुले बाजार में आकर्षक दाम दे रहे हैं। इसके साथ ही सरकारी खरीद के दायरे में आने वाली पीआर (PR) धान की खरीद भी मंडियों में शुरू कर दी गई है, जिसे सरकारी एजेंसियां तयशुदा नियमों के तहत खरीद रही हैं। सरकार की तरफ से पीआर धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
किसानों की जुबानी: इस बार पूरा होगा पिछला घाटा
कैथल जिले के रोहेड़ियां गांव के प्रगतिशील किसान सतनारायण ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इस सीजन में 10 एकड़ भूमि पर 1509 धान की फसल उगाई थी। उन्हें अपनी फसल का औसत भाव 3900 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिला है। सतनारायण ने पिछले साल के अपने अनुभवों को याद करते हुए बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने करीब 30 एकड़ में धान लगाया था, लेकिन तब बाजार भाव मात्र 2700 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल पाया था जिससे कोई खास मुनाफा हाथ नहीं लगा था। पिछले साल हुए उस वित्तीय घाटे की भरपाई इस बार पूरी तरह से हो रही है। इस बार उन्हें प्रति एकड़ एक लाख रुपये से अधिक की शुद्ध कमाई हुई है।
प्रति एकड़ एक लाख रुपये से ज्यादा की रिकॉर्ड कमाई
मंडी में अपनी फसल लेकर पहुंचे काकौत गांव के किसान मदन की कहानी भी कुछ ऐसी ही सफलता की दास्तां कहती है। मदन ने करीब तीन एकड़ जमीन पर यह फसल तैयार की थी। इस बार के मानसून सीजन में क्षेत्र में औसत से कम बारिश दर्ज की गई थी, जिसके बावजूद आधुनिक खेती और सही प्रबंधन के कारण खेतों में बंपर उत्पादन निकला है।
मदन का धान बिल्कुल सूखा और साफ होने के कारण खुले बाजार में 4460 रुपये प्रति क्विंटल के ऊंचे भाव पर बिका। उनके खेतों में धान का झाड़ औसतन 58 मण प्रति एकड़ निकला। इस हिसाब से उनकी तीन एकड़ की फसल से कुल तीन लाख रुपये से अधिक की आय हुई है। किसानों का साफ तौर पर कहना है कि इस साल मौसम की हल्की बेरुखी के बावजूद धान की इस किस्म ने उनकी किस्मत के ताले खोल दिए हैं और उनके वारे-न्यारे कर दिए हैं।
निष्कर्ष और आगे की उम्मीदें
कृषि सेक्टर से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग का यह सिलसिला ऐसा ही बना रहा, तो धान के इन दामों में और भी मजबूती देखने को मिल सकती है। हरियाणा के किसानों के लिए यह सीजन पिछले कई सालों के मुकाबले सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार दे रहा है।