वाराणसी में इन दिनों गंगा का बढ़ता जलस्तर तटीय इलाकों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। नदी के उफान पर होने के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोगों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। इस प्राकृतिक संकट के बीच रविवार, 06 सितंबर 2026 को शहर के प्रसिद्ध सामने घाट पर आस्था और मानवीय प्रयासों का एक अनूठा संगम देखने को मिला। 'नमामि गंगे' से जुड़े स्वयंसेवकों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने मिलकर न केवल गंगा तट पर फैली गंदगी को साफ किया, बल्कि मां गंगा की विशेष आरती उतारकर इस आपदा से जल्द राहत मिलने की प्रार्थना भी की।
विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं डिगी आस्था, सामने घाट पर चला सफाई अभियान
जब नदी का जलस्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा हो और घाटों के रास्ते पानी में डूब रहे हों, ऐसे समय में किसी भी तरह का सार्वजनिक आयोजन करना आसान नहीं होता। लेकिन सामने घाट पर जो दृश्य सामने आया, वह शहरवासियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया। नमामि गंगे के स्वयंसेवकों ने बाढ़ के पानी के बीच ही अपना सेवा कार्य जारी रखा। अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए और तट पर फैले कूड़े-कचरे को करीने से एकत्र किया।
इस पूरी गतिविधि का उद्देश्य केवल सफाई तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए लोगों को यह संदेश भी देना था कि संकट की घड़ी में भी पर्यावरण और नदी के प्रति हमारी जिम्मेदारी कम नहीं होनी चाहिए। स्वयंसेवकों के हाथों में राष्ट्रध्वज, स्वच्छता संबंधी प्रेरक स्लोगन लिखी तख्तियां और पर्यावरण के अनुकूल कपड़े से बने झोले नजर आ रहे थे। इन माध्यमों से घाट पर मौजूद लोगों और दूर-दराज से आए पर्यटकों को प्लास्टिक मुक्त वातावरण अपनाने के लिए जागरूक किया गया।
मां गंगा की शरण में पहुंचे श्रद्धालु, की गई जलस्तर घटने की विशेष प्रार्थना
स्वच्छता अभियान के ठीक बाद शाम ढलते-ढलते घाट का माहौल पूरी तरह से आध्यात्मिक हो गया। स्वयंसेवकों और वहां मौजूद आम नागरिकों ने मिलकर विधिवत रूप से मां गंगा की आरती उतारी। इस आरती का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह से प्रार्थना पर केंद्रित था। सभी की जुबान पर बस एक ही कामना थी कि मां गंगा का जलस्तर जल्द से जल्द नीचे आए, ताकि बाढ़ के आगोश में समाए तटवर्ती इलाकों के लोगों का जीवन फिर से सामान्य हो सके।
आरती के दौरान माहौल काफी भावुक कर देने वाला था। नदी के विकराल रूप को शांत करने और बाढ़ प्रभावित परिवारों के सुरक्षित रहने की गुहार लगाते हुए श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित किए। बाढ़ के इस संकट के बीच इस धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठान ने लोगों को अंदर से मजबूत करने का काम किया। स्थानीय लोगों का मानना है कि आस्था के इस सामूहिक प्रयास से निश्चित रूप से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
'गंगा केवल आस्था नहीं, काशी की जीवनरेखा हैं'
नमामि गenge काशी क्षेत्र के संयोजक और नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने इस अवसर पर जनमानस को संबोधित करते हुए एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा को केवल एक नदी या धार्मिक आस्था का केंद्र मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि यह संपूर्ण काशी के जीवन और उसकी प्राचीन संस्कृति की मूल आधारशिला है।
'गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच आज तमाम गंगा सेवकों और श्रद्धालुओं ने मां गंगा के चरणों में यही प्रार्थना की है कि जलस्तर में तेजी से गिरावट आए और शहर का जनजीवन एक बार फिर से पूरी तरह सामान्य हो सके।' - राजेश शुक्ला, संयोजक, नमामि गंगे काशी क्षेत्र
उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि केवल सरकार या प्रशासन के भरोसे बैठकर गंगा को स्वच्छ और सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। नदी की निर्मलता बनाए रखना हर उस व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है जो इस शहर में सांस लेता है। 'सबका साथ हो - गंगा साफ हो' का नारा देते हुए उन्होंने सभी से अपील की कि वे घाटों की पवित्रता को किसी भी परिस्थिति में धूमिल न होने दें।
प्लास्टिक और प्रदूषण के खिलाफ सख्त संदेश
बाढ़ के इस दौर में एक और गंभीर समस्या सामने आती है, वह है पानी के साथ आने वाला कचरा, जिसमें प्लास्टिक और थर्माकोल की मात्रा बहुत अधिक होती है। अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने लोगों को विस्तार से समझाया कि कैसे प्लास्टिक के उपयोग से जलीय जीवों और खुद नदी के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को भारी नुकसान पहुंचता है।
लोगों को यह बताया गया कि पूजा-पाठ की सामग्री या घर का कचरा सीधे बहते पानी में न फेंका जाए, क्योंकि इससे नदी का जल तो दूषित होता ही है, साथ ही जल निकासी और सफाई कार्यों में भी भारी बाधा उत्पन्न होती है। स्वयंसेवकों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक जनता खुद आगे आकर इस मुहिम का हिस्सा नहीं बनेगी, तब तक प्रशासनिक या कागजी प्रयासों से पूर्ण सफलता मिलनी असंभव है।
इन प्रमुख चेहरों की रही सक्रिय भागीदारी
इस पूरे सेवा और जनजागरूकता अभियान को सफल बनाने में काशी के कई जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान प्रमुख रूप से:
- राजेश शुक्ला
- सुभाष श्रीवास्तव
- लल्लन सिंह
- गुड्डू महाराज
- शशिकांत पाण्डेय
- प्रमोद कुमार पाण्डेय और किरण पाण्डेय
- राजकपूर सिंह व कृष्णानंद
- आशीष कुमार राय, केदारनाथ त्रिपाठी, विनोद सिंह और राम सिंह
सहित बड़ी संख्या में अन्य समर्पित स्वयंसेवक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इन सभी ने मिलकर न केवल गंगा तट की सूरत को संवारा, बल्कि आपदा के इस कठिन समय में समाज को एकजुट होने का एक मजबूत संदेश भी दिया।