उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में बाढ़ का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है, और इस प्राकृतिक आपदा के बीच प्रशासनिक दावों की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। बाढ़ की विभीषण लहरों के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने वाले नाविक खुद व्यवस्था की लाचारी का शिकार हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें नाविकों ने रातभर भूखे रहने और डीजल जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी न होने का दर्द बयां किया है।
वायरल वीडियो ने खोली प्रशासनिक दावों की पोल
शुक्रवार सुबह रेवतीपुर क्षेत्र से सामने आए एक वीडियो ने सनसनी फैला दी। इस वीडियो में एक नाविक अपने 7 से 8 साथियों के साथ बाढ़ के पानी के बीच घिरे होने की बात कह रहा है। नाविक के मुताबिक, वे लोग 3 सितंबर की दोपहर करीब 12 बजे से अपनी नावें लेकर बाढ़ पीड़ितों के रेस्क्यू और राहत कार्यों में जुटे हुए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उन्हें ना तो नाव चलाने के लिए पर्याप्त डीजल मिला और ना ही पेट भरने के लिए भोजन।
वीडियो में साफ तौर पर सुना जा सकता है कि कैसे ये अन्नदाता जैसे नाविक, जो खुद दूसरों की जिंदगी बचा रहे हैं, अपनी ही बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। वीरऊपुर और हसनपुरा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे इन नाविकों का यह दर्द सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
रातभर बारिश में भीगने को मजबूर हुए नाविक
ताड़ीघाट निवासी एक अन्य नाविक बबलू चौधरी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि स्थानीय लेखपाल के आदेश पर उन्हें और उनके साथियों को बाढ़ क्षेत्र में ड्यूटी पर लगाया गया था। उनके इस दल में करीब 8 से 9 नावें शामिल हैं। बबलू का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें केवल ड्यूटी पर उतार दिया, लेकिन उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का कोई ध्यान नहीं रखा गया।
- नावों के संचालन के लिए पर्याप्त डीजल नहीं दिया गया।
- खाने-पीने के लिए राशन या भोजन की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
- जान बचाने के लिए जरूरी लाइफ जैकेट तक उपलब्ध नहीं कराई गईं।
- रात के अंधेरे में रास्ता देखने के लिए टॉर्च और बारिश से बचने के लिए तिरपाल तक नसीब नहीं हुआ।
बबलू ने बताया कि गुरुवार की रात जब मौसम ने करवट ली और मूसलाधार बारिश के साथ बिजली कड़क रही थी, तब वे लोग बीच पानी में नावों पर ही फंसे हुए थे। बारिश से बचने के लिए उन्होंने कई नावों को आपस में जोड़ा और किसी तरह एक फटे हुए तिरपाल के सहारे पूरी रात काटी।
डीजल की कमी से रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही बाधा
संकट सिर्फ खाने-पीने का ही नहीं, बल्कि नावों के संचालन का भी है। डीजल खत्म होने या पर्याप्त मात्रा में न मिलने के कारण कई नाविक समय पर सुरक्षित स्थानों तक आवाजाही नहीं कर पा रहे हैं। स्थिति यह हो गई कि गुरुवार की शाम नाविकों ने हसनपुरा के ग्राम प्रधान से मिलकर अपनी यह पीड़ा साझा की और डीजल तथा भोजन की गुहार लगाई, लेकिन स्थानीय स्तर पर भी उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिल सकी। हालांकि, कुछ दयालु ग्रामीणों ने आगे आकर अपने स्तर पर थोड़ा बहुत खाना उपलब्ध कराया, लेकिन वह नाविकों की संख्या के हिसाब से ऊंट के मुंह में जीरे के समान था।
ग्राम प्रधान की अपनी मजबूरियां
इस पूरे मामले पर जब वीरऊपुर की प्रधान मुरहिया देवी के प्रतिनिधि नाखड़ू राम से बात की गई, तो उन्होंने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब शासन-प्रशासन की तरफ से गांव में कोई विशेष बजट या व्यवस्था नहीं भेजी जा रही है, तो ऐसे में ग्राम प्रधान अपनी जेब से डीजल और अन्य भारी-भरकम खर्च कहां से उठाएं।
नाखड़ू राम ने बताया कि उनके गांव में केवल दो ही नावें हैं—एक बड़ी नाव और दूसरी छोटी डेगी नाव। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि 3 सितंबर को जब राहत पैकेट बांटने के लिए भाजपा नेता पीयूष राय गांव पहुंचे थे, तो उनसे भी एक अतिरिक्त नाव उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। प्रधान प्रतिनिधि का तर्क है कि नाव के तेल, पानी और अन्य रोजाना के खर्चों का वहन ऊपर से होना चाहिए, क्योंकि एक ग्राम पंचायत के सीमित संसाधनों से यह सब संभालना नामुमकिन है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि प्रशासन चाहे तो मौके पर आकर जमीनी हकीकत की जांच कर सकता है, जिससे सारी पोल अपने आप खुल जाएगी।
सुरक्षा और मानवीय दृष्टिकोण पर बड़े सवाल
बाढ़ की इस त्रासदी में नाविक रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। वे अपनी जान जोखिम में डालकर एक कोने से दूसरे कोने तक लोगों और राहत सामग्री को पहुंचाते हैं। ऐसे में, यदि वही लोग सुरक्षित उपकरणों, लाइफ जैकेट और दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करते नजर आएं, तो यह आपदा प्रबंधन तंत्र की बहुत बड़ी विफलता को दर्शाता है।
फिलहाल, वायरल वीडियो और लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद नाविकों की एक ही मांग है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से पर्याप्त डीजल, भोजन, आपातकालीन टॉर्च, लाइफ जैकेट और तिरपाल मुहैया कराए जाएं। यदि समय रहते इन जांबाज नाविकों की सुध नहीं ली गई, तो बाढ़ राहत कार्यों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ सकता है।