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गाजीपुर में सीवर खुदाई का 7 साल का दर्द, बाजार पहुंचने वालों की बढ़ी मुश्किलें

गाजीपुर में सीवर खुदाई का 7 साल का दर्द, बाजार पहुंचने वालों की बढ़ी मुश्किलें

उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर गाजीपुर की गलियों और मुख्य बाजारों से गुजरना इन दिनों किसी रोमांचक सफर से कम नहीं है, लेकिन यह रोमांच रोमांचक कम और जानलेवा ज्यादा साबित हो रहा है। शहर के भीतर सीवर लाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को शुरू हुए लगभग सात साल बीत चुके हैं, लेकिन इन सात सालों में शहरवासियों को विकास के नाम पर केवल धूल, कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढे ही मिले हैं। स्थिति यह है कि शहर के प्रमुख बाजार अपनी चमक खो चुके हैं और वहां तक पहुंचना आम जनता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

सात साल और अंतहीन इंतजार: सीवर लाइन का धीमा जख्म

किसी भी शहर के विकास के लिए बुनियादी ढांचा यानी इंफ्रास्ट्रक्चर का मजबूत होना सबसे पहली शर्त होती है। गाजीपुर में भी सीवर लाइन का प्रोजेक्ट इसी उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था कि शहर को जलभराव और गंदगी से मुक्ति मिलेगी। हालांकि, धरातल पर तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आती है। प्रोजेक्ट की सुस्त रफ्तार और विभागों के बीच तालमेल की कमी ने इस योजना को शहर के लिए एक नासूर बना दिया है।

शहर के मुख्य मार्गों से लेकर अंदरूनी गलियों तक, हर तरफ आपको खुदी हुई सड़कें और बिखरी हुई गिट्टियां मिल जाएंगी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि काम कब शुरू होता है और कब बंद हो जाता है, इसकी कोई तय सीमा या सूचना नहीं होती। एक हिस्से को खोदकर महीनों तक छोड़ दिया जाता है, जिससे वहां के रहवासियों का जीना मुहाल हो जाता है।

बाजारों में सन्नाटा: व्यापारियों के कारोबार पर सीधा असर

गाजीपुर के मुख्य बाजारों की रौनक वहां आने वाले ग्राहकों से हुआ करती थी, लेकिन आज खराब सड़कों और जलभराव के कारण खरीदार इन बाजारों का रुख करने से कतराने लगे हैं। व्यापारियों का दर्द साफ झलकता है कि त्योहारों और शादियों के सीजन में भी उनकी दुकानें सूनी पड़ी रहती हैं।

  • ग्राहकों की कम होती संख्या: बाजार में कीचड़ और पानी भरा होने के कारण लोग अपने परिवारों के साथ आने से बचते हैं। वाहन चालकों की मुसीबतें: ई-रिक्शा, ऑटो और दोपहिया वाहन चालकों के लिए ये गड्ढे किसी खतरे से खाली नहीं हैं। रोजाना गाड़ियां फिसलने और लोगों के चोटिल होने की खबरें आम हो चुकी हैं। आर्थिक नुकसान: व्यापारिक संगठनों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में उनकी बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कई छोटे दुकानदार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।

मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति और प्रशासनिक उदासीनता

स्थानीय लोगों और व्यापारियों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि सीवर लाइन बिछाने के बाद सड़कों की रीसर्फेसिंग यानी मरम्मत का काम बेहद लचर तरीके से किया जाता है। खुदाई के बाद मिट्टी डालकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है और जब बारिश होती है, तो वही मिट्टी कीचड़ में बदल जाती है।

बरसात के दिनों में स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब सड़कों के गड्ढे पानी से पूरी तरह भर जाते हैं। राहगीरों को यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। कई बार लोग अनजाने में इन गहरे गड्ढों में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरी बदहाली को लेकर जनता का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। आमघाट क्षेत्र के सभासद सोमेश मोहन राय ने नगर पालिका और संबंधित कार्यदायी संस्थाओं की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि शहर की इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

सभासद सोमेश मोहन राय ने एक अहम बात यह भी उठाई कि नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि खुद व्यापारी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में व्यापारियों और शहर की इस विकराल समस्या को सबसे ज्यादा गंभीरता से लिया जाना चाहिए था। लेकिन अफसोस की बात यह है कि अपनों के जनप्रतिनिधि होने के बावजूद व्यापारियों को उनकी समस्याओं का समाधान नहीं मिल पा रहा है।

आगे की राह: कब मिलेगी राहत?

गाजीपुर की जनता अब सिर्फ आश्वासन सुनने के मूड में नहीं है। हर बार जब भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई जाती है, तो विभागों की ओर से जल्द ही काम पूरा करने का रटा-रटाया जवाब दे दिया जाता है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदलता।

शहरवासियों और व्यापारियों की मांग बिल्कुल स्पष्ट है:

  • शीघ्र सड़क निर्माण: जिन इलाकों में सीवर का काम पूरा हो चुका है, वहां तुरंत पक्की सड़कों का निर्माण कराया जाए। गुणवत्ता की जांच: निर्माण कार्य में पारदर्शिता बरती जाए ताकि कुछ ही महीनों में सड़कें दोबारा न उखाड़नी पड़ें। अस्थाई समाधान: जब तक निर्माण चल रहा है, तब तक कम से कम जल निकासी और कीचड़ हटाने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

फिलहाल, गाजीपुर के लोग एक अदद अच्छी सड़क के लिए तरस रहे हैं। देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब गहरी नींद से जागता है और शहरवासियों को इस नर्क जैसी जिंदगी से कब मुक्ति दिलाता है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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