प्रस्तावित फूड टेस्टिंग लैब का दायरा केवल महेंद्रगढ़ जिले तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके तहत दक्षिण हरियाणा के अन्य प्रमुख जिलों को भी कवर किए जाने की योजना है। प्रशासनिक योजनाओं के अनुसार रेवाड़ी, गुरुग्राम, पलवल और फरीदाबाद जैसे जिलों से एकत्र किए जाने वाले खाद्य नमूनों की जांच भी नारनौल की इसी लैब में की जा सकेगी। कम समय में रिपोर्ट मिलने से मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित मामलों में आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई बिना किसी अतिरिक्त देरी के आगे बढ़ाई जा सकेगी।
उपयुक्त जगह की तलाश और छह से सात स्थानों का निरीक्षण
नई लैब के निर्माण और संचालन के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार उपयुक्त जमीन और भवन की तलाश में जुटा हुआ है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. अमित कुमार के अनुसार, विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने संयुक्त रूप से जिले में छह से सात संभावित स्थानों का दौरा कर उनका निरीक्षण किया है। इस दौरान पटीकरा और जौरासी अमरपुरा समेत कई अन्य जगहों को भी बारीकी से देखा गया है, जिनमें से एक-दो स्थानों पर विभाग की सहमति भी बन चुकी है। विभाग की योजना फिलहाल 15 से 16 हजार वर्ग फीट कवर्ड एरिया का एक ऐसा भवन या परिसर तलाशने की है, जहां इस आधुनिक लैब को अस्थायी या स्थायी रूप से तुरंत शुरू किया जा सके।
हिसार में भी क्षेत्रीय लैब बनाने का प्रस्ताव
हरियाणा राज्य में अभी तक केवल चंडीगढ़ और करनाल में ही फूड टेस्टिंग लैब का संचालन किया जा रहा है। दक्षिण हरियाणा की भौगोलिक और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नारनौल में इस नई लैब का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य हिस्सों को सुविधा देने के लिए हिसार में भी एक अन्य क्षेत्रीय फूड टेस्टिंग लैब स्थापित किए जाने की दिशा में काम चल रहा है। प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के विशेष प्रयासों से इन दोनों महत्वपूर्ण योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है और वे खुद इसकी लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। हालांकि, अभी तक इन प्रयोगशालाओं की स्थापना पूरा होने और उनके पूर्ण संचालन को लेकर कोई आधिकारिक समयसीमा तय नहीं की गई है।