फतेहाबाद के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के बजाय उनकी सुरक्षा और मिड-डे मील की रखवाली करनी पड़ रही है।
हरियाणा के फतेहाबाद में बंदरों का उत्पात लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। सुंदर नगर स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल ठाकर बस्ती और जगजीवनपुरा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में बंदरों के झुंड ने शिक्षकों और विद्यार्थियों का जीना मुहाल कर दिया है। स्थिति यह है कि सुबह स्कूल खुलने से लेकर छुट्टी तक शिक्षक लाठी लेकर पहरा देने को मजबूर हैं, ताकि बच्चों को बंदरों के हमलों से बचाया जा सके।
ठाकर बस्ती स्कूल में सुबह साढ़े सात बजे से शुरू होता है खतरा
राजकीय प्राथमिक स्कूल ठाकर बस्ती में रोजाना सुबह करीब साढ़े सात बजे ही आठ से दस बंदरों का झुंड पहुंच जाता है। बाल वाटिका से लेकर पांचवीं कक्षा तक के छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल स्टाफ हर समय सतर्क रहता है। सबसे बड़ी चुनौती मिड-डे मील तैयार करने और परोसने के समय आती है। रसोई में बंदर घुसकर भोजन और राशन को नुकसान न पहुंचाएं, इसके लिए शिक्षिकाओं को अंदर रहकर निगरानी करनी पड़ती है। बच्चों को हमलों से सुरक्षित रखने के लिए कमरों के दरवाजे और कुंडी बंद करके उन्हें अंदर ही खाना खिलाया जाता है। पिछले दो दिनों में बंदरों के हमलों से तीन शिक्षक घायल भी हो चुके हैं, जिससे पूरे स्टाफ में भय का माहौल है।
जगजीवनपुरा स्कूल और पार्क में भी हाहाकार
इसी तरह जगजीवनपुरा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों—सुनीता रानी, मुकेश, अंजली, ममता और राजेश कुमार ने बताया कि स्कूल परिसर में बंदरों का आतंक पिछले करीब दो महीने से बना हुआ है। स्कूल खुलने से पहले ही बंदरों के झुंड वहां पहुंच जाते हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों को हाथ में लाठी लेकर बंदरों को भगाना पड़ता है, लेकिन कई बार बंदर उलटा शिक्षकों की तरफ दौड़ पड़ते हैं। मिड-डे मील बनाने वाले कर्मचारियों पर भी बंदर कई बार झपट चुके हैं। स्कूल के पास स्थित पब्लिक पार्क में भी लोगों का चलना मुश्किल हो गया है। हाल ही में पार्क में सुबह व्यायाम कर रही कंचन शर्मा और पिछले शनिवार को स्कूल की छात्रा प्रतिमा को बंदरों ने काटकर घायल कर दिया था।
पार्षद खुद कर रहे निगरानी, नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर नाराजगी
बच्चों की लगातार बढ़ती असुरक्षा को देखते हुए स्थानीय वार्ड पार्षद मोहनलाल नारंग खुद सुबह स्कूल पहुंचकर बंदरों पर नजर रखते हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा मिड-डे मील और राशन की रखवाली में जुटना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर 15 अक्टूबर को हुई वार्ड कमेटी की बैठक में भी मुद्दा उठाया गया था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला। पार्षद मनोज भयाना, एसडीओ राज कुमार मेहता, संदीप और तरुण बजाज सहित कई स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद की सुस्त कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई है।
पुराना ठेका समाप्त, नई एजेंसी की नियुक्ति का इंतजार
स्कूल स्टाफ की ओर से नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को पत्र लिखकर बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग की जा चुकी है। पार्षद मोहनलाल नारंग के अनुसार, नगर परिषद की तरफ से बार-बार शिकायत करने पर यही आश्वासन मिला कि दो दिन के भीतर बंदर पकड़ने वाली टीम भेज दी जाएगी, लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब इस संबंध में नगर परिषद के कर्मचारी और एसआई महेश से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि बंदर पकड़ने का पुराना ठेका समाप्त हो चुका है। फिलहाल नगर परिषद द्वारा नई एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया चलाई जा रही है, जिस कारण वर्तमान में कोई भी एजेंसी बंदर पकड़ने के लिए उपलब्ध नहीं है।