बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने जनगणना आयुक्त को राज्य में अनुमानित अनुसूचित जनजाति (एसटी) की आबादी को अधिसूचित करने से रोक दिया है। इस अंतरिम आदेश के बाद आगामी विधानसभा चुनावों में एसटी समुदाय के लिए चार सीटें आरक्षित करने की प्रक्रिया पर रोक लगने की संभावना है।
याचिकाकर्ता एडविन लूसियो फर्नांडिस ने 'गोवा राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व का पुनर्समायोजन अधिनियम, 2025' को चुनौती दी थी। याचिका में इस अधिनियम को असंवैधानिक करार देने का आग्रह किया गया था। यह अधिनियम अगस्त 2025 में विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था और इसे अगस्त 2026 में लागू किया गया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इस अधिनियम के प्रावधान 2026 के बाद पहली जनगणना पूरी होने तक विधानसभा या लोकसभा चुनावों के लिए आरक्षित सीटों के पुनर्समायोजन पर रोक लगाते हैं।
याचिकाकर्ता के अनुसार, अधिनियम की धारा 3 की उप-धारा (1) के तहत जनगणना आयुक्त को पिछली जनगणना के आधार पर राज्य में अनुसूचित जनजाति की आबादी का आकलन या अनुमान लगाने, कुल जनसंख्या में एसटी आबादी के अनुपात का पता लगाने और ऐसी जनसंख्या के अनुमानों को अधिसूचित करने की शक्ति दी गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस तरह के अनुमानित या निर्धारित आंकड़ों की अधिसूचना का प्रकाशन अंतिम होगा और इसे किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
केंद्र सरकार का पक्ष और कानून का उद्देश्य
भारत के उप सॉलिसिटर जनरल प्रवीण फल्देसाई ने केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए दलील दी कि संसद ने यह अधिनियम विशेष रूप से गोवा राज्य के लिए बनाया है। इसे फरवरी 2027 तक होने वाले अगले विधानसभा चुनाव से पहले लागू किया गया था, ताकि भारत के चुनाव आयोग को विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में संशोधन करने के लिए सक्षम प्रावधान मिल सकें। उन्होंने कहा कि चूंकि 2027 की जनगणना अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए 2001 और 2011 की जनगणना के मौजूदा जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर गोवा विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का पुनर्समायोजन करने हेतु चुनाव आयोग को अनुमति देने वाले सक्षम प्रावधानों वाले कानून की आवश्यकता महसूस की गई थी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 170(3) के प्रावधानों के तहत गणना के लिए केवल 2001 की जनगणना ही उपलब्ध थी, जिस समय कुनबी, गौड़ा और वेलिप इन तीनों नई जातियों को अनुसूचित जनजाति घोषित नहीं किया गया था। इन तीनों समुदायों को 8 जनवरी 2023 को अनुसूचित जनजाति घोषित किया गया था।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां और अंतरिम आदेश
न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति अमित एस जामसांडेकर की खंडपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि जनगणना आयुक्त ने पिछली जनगणना (2001 या 2011 की जनगणना) के अनुसार अनुसूचित जनजाति की आबादी का आकलन या अनुमान लगाने का प्रयास किया था और विधि एवं न्याय मंत्रालय को 10 सितंबर 2026 को जारी अपने संचार में यह दर्ज किया था कि वह गोवा में मौजूदा आबादी या किसी भी श्रेणी (अनुसूचित जनजाति सहित) के तहत आबादी का अनुमान लगाने या पता लगाने में असमर्थ है।
अदालत ने कहा, "और भी आश्चर्य की बात यह है कि जनगणना आयुक्त ने अब यह स्वीकार करने के बाद कि जनसंख्या के आंकड़ों का अनुमान लगाना या उनका पता लगाना संभव नहीं है, 2001 की जनगणना के आधार पर यह दर्ज किया है कि यह 'उचित रूप से माना जा सकता है' कि राज्य की कुल जनसंख्या में एसटी समुदाय का अनुपात 9.9 प्रतिशत है, जो कि स्थिर रहा है।"
अदालत ने आगे कहा कि यदि जनगणना आयुक्त के पास धारा 3 के अनुसार जनसंख्या के आंकड़ों का पता लगाने या उनका अनुमान लगाने का कोई तरीका नहीं था, तो प्रकाशन से पहले यह मान लेने का कोई औचित्य नहीं हो सकता था कि वर्तमान में अनुसूचित जनजाति समुदाय की आबादी का अनुपात राज्य की जनसंख्या का 9.9 प्रतिशत है, जबकि यह आंकड़ा 2001 की जनगणना से संबंधित है। अदालत ने कहा कि इन आंकड़ों को दर्शाने वाली किसी भी अधिसूचना को जारी करना न केवल भारत के संविधान के अनुच्छेद 170(3) और अनुच्छेद 332 के आदेश के विपरीत होगा, बल्कि अधिनियम की अपनी आवश्यकता के भी खिलाफ होगा।
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि सरकार अनुसूचित जनजातियों के हितों और गोवा विधानसभा में उन्हें आरक्षण प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "गोवा सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाया है और अनुसूचित जनजाति समुदाय के पक्ष में कानून बनाया गया है। हालांकि, अदालती मामलों के कारण उत्पन्न कानूनी बाधाओं को भारत सरकार के समक्ष पूरी गंभीरता से उठाया जाएगा और केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा कि वह गोवा राज्य में अनुसूचित जनजाति समुदाय के हितों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख करे।"