वाराणसी के भगवानपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली चंद्रनगर कॉलोनी इन दिनों किसी नरक से कम नजर नहीं आ रही है। यहां की मुख्य सड़क की बदहाली और भारी जलभराव ने स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि महज दस से पंद्रह मिनट की सामान्य बारिश के बाद भी पूरी सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है। पिछले दो सालों से यह समस्या यहां के बाशिंदों के लिए एक नासूर बन चुकी है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते आज तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
महज 10-15 मिनट की बारिश और तालाब बन जाती है सड़क
आधुनिक विकास के दावों के बीच चंद्रनगर कॉलोनी की ये तस्वीर सिस्टम के खोखलेपन को आईना दिखाने के लिए काफी है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, आसमान में थोड़े से भी बादल घिरते ही लोगों के दिलों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। बारिश शुरू होते ही सड़क गायब हो जाती है और उसकी जगह एक तालाब या दलदल जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। जलनिकासी का कोई भी उचित प्रबंध न होने के कारण यह गंदा पानी हफ्तों तक सड़कों पर जमा रहता है, जिससे भीषण दुर्गंध और बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है.

स्थानीय निवासी संतोष कुमार और अमित पटेल ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि पानी भरने के बाद सड़क पर बने दो फीट तक गहरे गड्ढे पूरी तरह छिप जाते हैं। इन जानलेवा गड्ढों का अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है। नतीजतन, दोपहिया वाहन चालक और पैदल चलने वाले लोग रोजाना इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। यह समस्या केवल आवागमन की नहीं, बल्कि लोगों की जान और माल की सुरक्षा से जुड़ी हुई है.
गड्ढे में गिरने से टूट चुकी है महिला की हड्डी
यह समस्या अब केवल असुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि हादसों का सबब बन चुकी है। हाल ही में हुई एक घटना ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। सड़क पर बने एक गहरे और खतरनाक गड्ढे में अचानक संतुलन बिगड़ने से एक महिला बुरी तरह गिर पड़ी। इस भीषण हादसे में उनकी हड्डी तक टूट गई। महीनों से वे बिस्तर पर हैं और इस दर्दनाक वाकये ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है.
"हम दो साल से अधिकारियों और नेताओं के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। हर बार सिर्फ कोरे आश्वासन मिलते हैं, जमीन पर कुछ नहीं बदलता। क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है?" - एक स्थानीय नागरिक का दर्द
मासूम बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर भी पड़ रहा असर
बदहाल सड़कों का सबसे बुरा असर कॉलोनी के छोटे-छोटे स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। सुबह स्कूल जाने के लिए जब ये बच्चे घर से निकलते हैं, तो उन्हें पानी और कीचड़ के इस समंदर को पार करना पड़ता है। कई बार बच्चों की यूनिफॉर्म पूरी तरह गंदी हो जाती है, तो कई बार स्थिति इतनी खतरनाक होती है कि अभिभावक उन्हें स्कूल भेजने से ही मना कर देते हैं। कीचड़ भरे रास्तों के कारण वैन और ऑटो चालकों ने भी कॉलोनी के भीतर आने से इनकार कर दिया है, जिससे बच्चों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है.
विधायक के शिलान्यास कार्यक्रम में गूंजा था दर्द, पर नतीजा शून्य
जनता की यह बेबसी सिर्फ मौखिक शिकायतों तक सीमित नहीं रही है। करीब चार महीने पहले जब क्षेत्र में विधायक का एक शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित हुआ था, तब स्थानीय रहवासियों ने एकजुट होकर इस मुद्दे को उनके सामने जोरदार तरीके से उठाया था। लोगों ने हाथ जोड़कर गुहार लगाई थी कि कम से कम गड्ढों में मिट्टी डलवाकर इसे चलने लायक तो बना दिया जाए। उस वक्त आश्वासन भी मिला था, लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. वादे कागजों तक ही सिमट कर रह गए हैं.
महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा बेहाल
इस जलभराव और कीचड़ के बीच सबसे अधिक कठिनाई महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। घर का जरूरी सामान लाने के लिए बाजार जाना हो या किसी चिकित्सीय आपातकाल में अस्पताल, हर कदम पर मौत का कुआँ जैसी यह सड़क चुनौती बन जाती है। बुजुर्ग लोग तो अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो चुके हैं क्योंकि वे इस दलदलनुमा रास्ते पर एक कदम भी नहीं चल सकते।
स्थानीय लोगों की दो टूक मांग
- सड़क पर बने जानलेवा गड्ढों को तुरंत भरकर समतल किया जाए।
- बारिश के पानी की निकासी के लिए पक्के और सुदृढ़ नालों का निर्माण हो।
- क्षेत्रीय विधायक और संबंधित पार्षद मौके पर आकर जमीनी हकीकत देखें।
- स्थाई सड़क निर्माण का कार्य जल्द से जल्द शुरू किया जाए।
चंद्रनगर कॉलोनी के लोग अब पूरी तरह आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को विवश होंगे। लोकतंत्र में जनता की आवाज को कब तक अनसुना किया जाएगा, यह बड़ा सवाल अब भी वाराणसी के इस कोने में गूंज रहा है।
