हिमाचल प्रदेश के रामपुर विधानसभा क्षेत्र से चार बार कांग्रेस विधायक रहे नंद लाल का 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वह एसपीजी और आईटीबीपी में भी सेवाएं दे चुके थे।
गांधी परिवार की सुरक्षा से जुड़े रहे थे नंद लाल, आईटीबीपी के डीआईजी पद से वीआरएस लेकर संभाली थी राजनीति की कमान
हिमाचल प्रदेश की राजनीति से एक दुखद खबर सामने आई है। रामपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक रह चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता नंद लाल का 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। राजनीति में आने से पहले वह देश के महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र का अहम हिस्सा रह चुके थे। उन्होंने विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) में करीब 12 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी थीं और देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े रहे थे।
शुरुआती जीवन और शिक्षा
नंद लाल का जन्म 16 मार्च 1954 को रामपुर बुशहर के देवठी क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पूरी की और राजनीति विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उनका चयन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में हो गया। आईटीबीपी अकादमी में कड़े प्रशिक्षण के बाद उन्हें कमांडो दल में शामिल किया गया था, जो उनके अनुशासित करियर की एक मजबूत शुरुआत थी।
एसपीजी में कार्यकाल और गांधी परिवार की सुरक्षा
सुरक्षा क्षेत्र में उनके बेहतरीन अनुभवों और कार्यकुशलता को देखते हुए वर्ष 1985 में उन्हें विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) में प्रतिनियुक्त किया गया। नंद लाल ने वर्ष 1985 से 1997 तक करीब 12 साल तक एसपीजी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इस दौरान उनकी तैनाती देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की सुरक्षा व्यवस्था में रही, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी की सुरक्षा से जुड़े कार्य भी शामिल थे। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया था। एसपीजी सेवा के दौरान उन्हें मॉरीशस, रूस, नेपाल, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रिया समेत दुनिया के कई देशों की यात्रा करने का अवसर मिला।
विशिष्ट सम्मान और उपलब्धियां
सुरक्षा बलों में अपने कार्यकाल के दौरान नंद लाल को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें उत्कृष्ट और सराहनीय सेवाओं के लिए दो बार वर्ष 2001 और 2007 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्होंने जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सुरक्षा कार्यों में अहम योगदान दिया। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने वर्ष 1982 के एशियाई खेलों और वर्ष 1983 में आयोजित गुटनिरपेक्ष सम्मेलन (नॉम) के दौरान भी सुरक्षा संबंधी विशिष्ट जिम्मेदारियां संभाली थीं।
राजनीतिक सफर की शुरुआत
सुरक्षा बलों में देश सेवा करने के बाद नंद लाल ने वर्ष 2007 में आईटीबीपी में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और कांग्रेस पार्टी का दामन थामा। कांग्रेस ने उन्हें रामपुर विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया। अपने पहले ही चुनावी मैदान में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बृज लाल को 64,700 से अधिक मतों के अंतर (6470 मतों) से पराजित किया और पहली बार विधानसभा में पहुंचे। इसके बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए रामपुर सीट पर लगातार चार बार जीत हासिल की और क्षेत्र के विकास में अहम योगदान दिया। उनके निधन से राजनीतिक गलियारों और उनके गृह क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।