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रक्षाबंधन 2026: जानिए राखी बांधने का सही समय और भद्रा का साया

रक्षाबंधन 2026: जानिए राखी बांधने का सही समय और भद्रा का साया

भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक, पावन पर्व रक्षाबंधन हर साल सावन मास की पूर्णिमा तिथि को बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है। साल 2026 में इस त्योहार को लेकर लोगों के मन में तारीख और शुभ मुहूर्त को लेकर कई तरह की दुविधा बनी हुई है। पंचांग के जानकारों के अनुसार, इस बार पूर्णिमा तिथि और भद्रा काल के फेर की वजह से राखी बांधने के समय को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है कि आखिर किस दिन और किस समय भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधना सबसे ज्यादा फलदायी रहेगा।

रक्षाबंधन 2026 की सही तिथि और पंचांग की गणना

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन मास की पूर्णिमा तिथि का आरंभ और समापन इस प्रकार हो रहा है कि गृहस्थ जीवन जीने वालों और उदया तिथि मानने वालों के लिए तारीख का निर्धारण बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। पंचांगीय गणना के मुताबिक, इस वर्ष पूर्णिमा तिथि अगस्त के अंतिम सप्ताह में पड़ रही है। सही समय की जानकारी न होने के कारण कई बार लोग गलत समय पर पूजा या अनुष्ठान कर बैठते हैं, जिससे बचना बेहद जरूरी है।

ज्योतिषाचार्य और पंडितों का यह स्पष्ट कहना है कि रक्षाबंधन का त्योहार हमेशा भद्रा काल से मुक्त बेला में ही मनाया जाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल में राखी बांधना वर्जित माना गया है, क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार लंकापति रावण की बहन ने उसे भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, जिसका परिणाम उसका सर्वनाश हुआ था। यही वजह है कि सनातन संस्कृति में भद्रा के दौरान भाई को राखी बांधने की सख्त मनाही होती है।

भद्रा काल का साया और उसका समय

वर्ष 2026 में रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया कितने समय तक रहेगा, यह जानना हर बहन के लिए बेहद जरूरी है। पंचांग के अनुसार:

  • भद्रा का आरंभ: पूर्णिमा तिथि के साथ ही भद्रा भी शुरू हो जाती है।
  • भद्रा का समापन: दोपहर के समय भद्रा समाप्त होने के बाद ही राखी बांधने का सिलसिला शुरू होगा।
  • विशेष सावधानी: यदि भद्रा पाताल लोक या स्वर्ग लोक की है, तो उसका प्रभाव पृथ्वी पर कम या नहीं माना जाता, लेकिन मृत्यु लोक की भद्रा में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

राखी बांधने का सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

भद्रा काल समाप्त होने के बाद दोपहर और शाम का समय भाई-बहन के इस पावन पर्व के लिए सबसे उपयुक्त रहेगा। 2026 में रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के मुख्य मुहूर्त निम्नलिखित हैं:

  • दोपहर का मुहूर्त: दोपहर 01:30 बजे से लेकर शाम 04:15 बजे तक।
  • प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 06:30 बजे से रात्रि 08:30 बजे तक।

इन दोनों ही अंतरालों में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रोली, अक्षत और चंदन का टीका लगाकर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना कर सकती हैं।

पूजा की विधि और थाली की तैयारी

रक्षाबंधन के दिन केवल मुहूर्त का ध्यान रखना ही काफी नहीं है, बल्कि विधि-विधान से पूजा करना भी उतना ही आवश्यक है। त्योहार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने इष्टदेव, भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करें।

पूजा की थाली में निम्नलिखित चीजें अनिवार्य रूप से होनी चाहिए:

  • रोली या कुमकुम
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • दीपक (घी का दीया)
  • मिठाई (मुंह मीठा करने के लिए)
  • नारियल और ताजे फूल
  • रक्षा सूत्र या राखी

थाली सजाने के बाद सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करें। इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। भाई के माथे पर तिलक लगाएं, अक्षत लगाएं और दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधें। इसके बाद भाई का मुंह मीठा करवाएं और अंत में उसकी आरती उतारें। भाई अपनी क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार बहन को उपहार या शगुन देते हैं और जीवनभर उसकी रक्षा का वचन निभाते हैं।


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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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