झारखंड की राजधानी रांची में धार्मिक आस्था का एक अनूठा और पावन दृश्य देखने को मिला है। हरमू रोड स्थित प्रसिद्ध श्री श्याम मंदिर में शनिवार को साप्ताहिक धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए 216वें श्री श्याम भंडारे का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शहर के श्रद्धालुओं में बाबा श्याम के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का भाव कितना गहरा है।
अभिषेक और पलक सिन्हा परिवार ने संभाली यजमान की भूमिका
धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के क्रम में इस बार 216वें भंडारे का आयोजन अभिषेक सिन्हा और पलक सिन्हा के परिवार की ओर से किया गया। यजमान परिवार ने पूरे विधि-विधान और निष्ठा के साथ अनुष्ठान की सभी रस्में पूरी कीं। इस अवसर पर मंदिर परिसर में सुबह से ही एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह का माहौल बना हुआ था।
यजमान परिवार के सदस्यों के साथ-साथ श्याम मित्र मंडल के तमाम पदाधिकारी भी इस पावन अनुष्ठान का हिस्सा बने। सभी ने मिलकर सबसे पहले आराध्य देव बाबा श्री श्याम और प्रथम पूज्य भगवान गणेश को अपनी श्रद्धासुमन अर्पित किए और भोग लगाया। इसके बाद मंदिर के आचार्यों को पूरे आदर के साथ भोजन प्रसाद कराया गया, जो सनातन परंपरा में सर्वोच्च सत्कार का प्रतीक माना जाता है।
भक्ति में सराबोर माहौल और गूंजते जयकारे
'हार के सहारे की जय' और 'गणपति बाप्पा मोरया' के जयकारों से पूरा हरमू रोड इलाका गूंज उठा। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। हर वर्ग के लोग, चाहे वे बुजुर्ग हों, युवा हों या महिलाएं, सभी इस भंडारे का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक नजर आए।
प्रसाद वितरण शुरू होते ही मंदिर के बाहर और अंदर श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। हालांकि, व्यवस्था इतनी सुचारू थी कि हर भक्त को अनुशासित तरीके से और बिना किसी असुविधा के प्रसाद प्राप्त हुआ। लोगों ने कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार किया और पूरी श्रद्धा के साथ महाप्रसाद ग्रहण किया।
विशेष व्यंजनों से सजा था बाबा का भोग
भंडारे के इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए लजीज और पारंपरिक व्यंजनों का प्रबंध किया गया था। इस बार के मेनू में निम्नलिखित चीजें शामिल थीं:
- गरमा-गरम छोला-भटूरा
- स्वादिष्ट खीर-चूरमा (जो श्याम भक्तों को विशेष प्रिय है)
- चटपटा अचार
- फ्रूटी जूस
इन सभी व्यंजनों के स्वाद ने प्रसाद ग्रहण करने आए हर भक्त के चेहरे पर एक अलग ही संतोष और प्रसन्नता का भाव ला दिया।
गौ सेवा का अनूठा संकल्प
इस आयोजन की सबसे बड़ी और खास बात यह रही कि इसे सिर्फ एक भंडारे तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसके जरिए जीव सेवा का भी संदेश दिया गया। आयोजकों से मिली जानकारी के अनुसार, भंडारे का बचा हुआ और तैयार किया गया भोग प्रत्येक शनिवार को नियमित रूप से गौशाला में गौ सेवा के लिए भेजा जाता है। सनातन संस्कृति में गौ सेवा को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है, और इस परंपरा का यहां बखूबी पालन किया जा रहा है.
कार्यकर्ताओं की निष्ठा और सहभागिता
इतने बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के पीछे श्याम मित्र मंडल के 50 से अधिक समर्पित कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत और सेवाभाव का बड़ा हाथ रहा। इस पूरी व्यवस्था को संभालने में मंडल के प्रमुख पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिनमें निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
- सुरेश सरावगी (निवर्तमान अध्यक्ष)
- विश्वनाथ नारसरिया (निवर्तमान महामंत्री)
- गोपाल मुरारका (अध्यक्ष)
- श्रवण ढांढनिया (उपाध्यक्ष)
- अशोक लड़ियां (उपाध्यक्ष)
- गौरव अग्रवाल (महामंत्री)
- मनोज खेतान (कोषाध्यक्ष)
- राजीव रंजन मित्तल (वरिष्ठ सदस्य)
इन सभी की देखरेख में आयोजित यह 216वां भंडारा रांची के धार्मिक इतिहास में एक और सफल अध्याय के रूप में जुड़ गया है। हर हफ्ते आयोजित होने वाले ये धार्मिक अनुष्ठान न केवल सामाजिक और धार्मिक एकता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति से भी जोड़कर रखते हैं।